शिक्षा और कैरियर

ये बातें सिर्फ Hostel में रहने वाले ही समझेंगे

हॉस्‍टल में – कई बच्‍चों को घर पर रहकर मां-बाप और परिवार का साथ और प्‍यार नहीं मिल पाता है।

कभी पढ़ाई तो कभी अनुशासन के नाम पर उन्‍हें हॉस्‍टल भेज दिया जाता है। हम सभी जानते हैं कि हॉस्‍टल बच्‍चों को बच्‍चों की तरह नहीं बल्कि सैनिकों की तरह अनुशासन में रखता है।

हॉस्‍टल की जिंदगी जीने का एक अलग ही तरीका होता है। अगर आप भी कभी ना कभी हॉस्‍टल में रहे हैं तो आपके साथ भी ऐसा जरूर हुआ होगा जिसके बारे में हम जिक्र करने वाले हैं।

इन सारी बातों को सिर्फ एक हॉस्‍टल में रहने वाला इंसान ही समझ सकता है।

कपड़े धोने की आदत

जिन बच्‍चों ने कभी अपने घर पर कपड़े धोना सीखा भी नहीं होता उन्‍हें हॉस्‍टल में आकर कपड़े धोने तक पड़ जाते हैं। रातभर कपड़ों को वॉशिंग पाउडर में भिगोकर रखना और सुबह उठकर कपड़े धोना। घर पर रह कर हम इतने आलसी हो चुके होते हैं कि हॉस्‍टल की लाइफ सुन्‍न कर देती है।

मैगी और चाय का साथ

जब हम घर पर होते हैं खाने की फरमाइशे करते हुए नहीं थकते हैं लेकिन हॉस्‍टल में इस सब पर ताला लग जाता है। जब खुद खाना बनाना पड़े तो मैगी से ही पेट भरने लगता है और ऐसे में चाय तो वोडका का काम करती है।

आए दिन पार्टियां

हॉस्‍टल में आए दिन पार्टी, बर्थडे, पास होने की पार्टी, ब्रेकअप की पार्टी और ना जाने किस-किस की पार्टियां होती रहती हैं। जबकि घर पर इन सबकी परमिशन मिलना बहुत मुश्किल होता है। वैसे आप कह सकते हैं कि हॉस्‍टल में रहने का ये एक फायदा होता है।

सिनेमा

हमारी जिंदगी में सिनेमा एक हस्‍त रेखा है। रोज़ एक फिल्‍म ना देखो तो खुजली और गुदगुदी सी होने लगती है। एग्‍जाम हो या छुट्टी हो एक फिल्‍म तो देखना बनता ही है।

चौकीदार से जान-पहचान

जब आप अकेले रहते हैं तो कभी सुरक्षा के लिहाज़ से तो कभी अकेलेपन को दूर करने के लिए चौकीदार से दोस्‍ती कर लेते हैं।

नहाने से दुश्‍मनी

ये प्रॉब्‍लम लड़कों में ज्‍यादातर देखी जाती है। घर पर तो उन्‍हें नहाने को लेकर मां और दीदी से डांट पड़ती रहती है लेकिन हॉस्‍टल में उन्‍हें कोई डांटने वाला नहीं होता है इसलिए वो नहाने से जी चुराते हैं। हॉस्‍टल में तो ना नहाने का कॉम्‍पीटिशन होता है कि देखते हैं कौन कितने दिन तक नहीं नहाता है।

अगर आप भी कभी हॉस्‍टल में रहे हैं तो इन सब बातों को अच्‍छी तरह से समझ पाएंगें कि वहां पर घर और परिवार से दूर आपने किन-किन चीज़ों और बातों को सहा है।

हाल ही में संजय दत्त की फिल्‍म संजू में संजय दत्त को अपने पिता की मर्जी पर हॉस्‍टल में भेज दिया जाता है और इस बात पर संजू अपने पिता से उम्रभर नाराज़ रहते हैं। संजू अपनी मां से बहुत प्‍यार करते थे और उनसे दूर नहीं जाना चाहते हैं।

अकसर बच्‍चों को हॉस्‍टल जाने पर बहुत दुख होता है और इसका उनके दिमाग पर कभी-कभी नेगेटिव असर भी पड़ जाता है। अगर बच्‍चे बड़े होकर अपनी पढ़ाई या जॉब के लिए हॉस्‍टल में रहते हैं तो ठीक है वरना अगर आप जबरदस्‍ती उन्‍हें स्‍कूल के लि हॉस्‍टल में डाल देते हैं तो परिवार से दूरी वो बर्दाश्‍त नहीं कर पाते हैं।

Parul Rohtagi

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Parul Rohtagi

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