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किन्नर ने ललकारा प्रधानमंत्री को ! मैं हर हालत मैं करूंगी राम मंदिर का निर्माण

किन्नर राम मंदिर नरेन्द्र मोदी

राम मंदिर अब केवल देश के राजनेताओं और मात्र भक्तों का मुद्दा बनकर नहीं रहने वाला है.

अब सभी जानते हैं कि जो भी राम मंदिर की बात करेगा, जनता उसको सर-आँखों पर रखेगी. इसलिए शायद अब किन्नर से साध्वी बनी शैली राय ने भी राम मंदिर को लेकर अपना पक्ष जाहिर कर दिया है.

इन्होनें एक बड़े हिंदी अख़बार को अपना इंटरव्यू देते हुए सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ललकारा है.

आइये पढ़ते हैं कि क्या बोला है साध्वी शैली ने-

राम मंदिर को लेकर दिया ब्यान

मैं नेपाल से हूँ और हिन्दू हूँ. अब मैं भारत की नागरिक हूँ. भारत में रहने वाला हर नागरिक सनातनी है और जो लोग राम मंदिर को लेकर राजनीति कर रहे हैं वह गलत है. सरकार और देश के लोग राम मंदिर का निर्माण नहीं कर रहे हैं तो राम मंदिर निर्माण के लिए हम किन्नर लोग ही काफी हैं.

सरकार मंदिर निर्माण करने से देरी कर रही है. देश की सरकार भगवान राम को उनका स्थान देने से अगर डर रही है तो मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी सरकार हमें दे दे और हम किन्नरों में इतना दम है कि हम राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में करा देंगे.

वैसे ये ऊपर बोली गयी बातें कोई विवादित बात नहीं है. यह साध्वी का अपना निजी पक्ष है. देश की राजनीति जहाँ राम मंदिर को लेकर वोट और अपनी चुनावी रोटियां बनाते हैं वहीँ देश की इस साध्वी ने इस तरह की हिम्मत दिखाई है.

कौन हैं साध्वी शैली:-

आज साध्वी बनी शैली, एक किन्नर हैं. अभी देखें तो आपको इनके बदन पर गेरुआ रंग नजर आयेगा लेकिन शैली ने फैशन डिजायनिंग का कोर्स किया है और वह इस क्षेत्र में कार्य भी कर चुकी हैं. अभी वर्तमान में शैली साध्वी बन चुकी हैं और हाल ही में उज्जैन में चल रहे सिहस्थ के अन्दर इनको लेकर कुछ विवाद भी हुआ था.

kinnar shaily

लेकिन राम मंदिर क्यों हैं इनका एजेंडा

राम मंदिर इनका एजेंडा शायद इसीलिए है क्योकि यह सनातनी हैं और खुद को हिन्दू राम भक्त बताती हैं.

लेकिन जैसा कि हम सभी जानते ही हैं कि राम मंदिर आस्था का उतना महत्व नहीं रखता है जितना कि यह राजनीति का मुद्दा है. शायद हो सकता है कि साध्वी शैली ने सही कहा हो कि किन्नर अब राम मंदिर का निर्माण कराने के लिए तैयार हैं.

लेकिन साध्वी ने सबसे बड़ी बात यह कही है कि देश की राजनीति राम मंदिर का निर्माण नहीं करा सकती हैं.

अब जब एक संत को मंदिर निर्माण के लिए सामने आना पड़ रहा है तो कोर्ट और सरकार दोनों को ही इस मुद्दे पर जल्द से जल्द अपना निर्णय दे देना चाहिए.

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