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केजरीवाल जी- घर का भेदी लंका ढाए !

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घर का भेदी लंका ढाये

वर्षों पुरानी यह कहावत आज भी अस्तित्व में है. कभी रामायण में हमने यह बात रावण के परिवार के लिए पढ़ी थी, जब रावण का भाई विभीषण, अपने ही भाई और पूरे राक्षस परिवार के खात्मे का कारण बनता है.

आज भी हमारी राजनीति में यह कहावत सत्य होती है. अभी थोड़े ही समय पहले की बात है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल जी राक्षसों को मारने के लिए अपने रथ पर सवार होकर निकले ही थे कि अचानक से पार्टी के दो मुख्य नेता और अरविन्द के मुख्य सहयोगी ही इनकी नीतियों और इनके व्यवहार पर आरोप लगा देते हैं.

अब केजरीवाल को जो एक डर सता रहा है वह यही है कि प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव जो अब बागियों में गिने जा रहे हैं, इन दोनों को केजरीवाल जी के सारे राज पता हैं. कब अरविन्द केजरीवाल क्या खाते हैं और क्या पीते हैं, इनकी ताकत से लेकर इनकी कमजोरी तक सब कुछ इन दोनों नेताओं को पता है.

अब ऐसे में प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव दोनों की घर के भेदी बने हुए हैं और लंका को ढाने की कोशिश कर रहे हैं. वैसे रावण के खेमे में एक ही भेदी था और यहाँ केजरीवाल जी के खेमे में तो मुख्य दो भेदी हैं और उनके साथ कई और भी भेदी है जो सोने की लंका (दिल्ली में मिली जीत के बाद से ‘आप’ अभी सोने की ही बनी पार्टी बनी हुई है) को मिटाने की तैयारी में लगे हुए हैं.

प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव इतिहास के पन्नों में

आम आदमी पार्टी अरविन्द केजरीवाल और सहयोगियों की मदद से बनी एक राजनैतिक पार्टी है जो व्यवस्था परिवर्तन के उद्देश्य से बनाई गयी थी. पार्टी के गठन की घोषणा 26 नवम्बर 2012 को जंतर मंतर, दिल्ली में की गयी थी.

प्रशांत भूषण भारत के उच्चतम न्यायालय में एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं. इन्हें न्यायपालिका के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन के लिए जाना जाता हैं.

तो वहीँ योगेन्द्र सिंह यादव एक भारतीय सामाजिक वैज्ञानिक, चुनाव विश्लेषक हैं.

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दिल्ली की जीत में दोनों का योगदान

दिल्ली के विधानसभा के चुनावों में दोनों ने ही मुख्य भूमिका निभाई थी. आप को मिली 67 सीटों की जीत का श्रेय दोनों को भी जाता है. ये दोनों ही नाम रणनीति बनाने में माहिर हैं और किसको कहाँ से सीट दी जाये, किन मुद्दों पर बात की जाये, जनता से संवाद क्या किया जाये, कैसे विरोधियों को टक्कर दी जाये और खासकर बीजेपी का विजय रथ कैसे रोका जाये, इन मुद्दों की रूप रेखा बनाने के पीछे मुख्य रूप से यही दो दिमाग काम कर रहे थे.

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क्यों हुए यह दोनों अरविन्द केजरीवाल से नाराज

प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव की मांग सिर्फ इतनी थी कि पार्टी को आरटीआई के दायरे में आना चाहिए. अन्य राज्यों में भी चुनाव लड़ना चाइये. पार्टी में वह और ज्यादा पारदर्शिता ही लाना चाहते थे. दोनों को पता था कि अगर पार्टी हमें कभी दरकनार करने की गलती करेगी तब ऐसे में आप दो खेमों में बंट जायेगी.

अभी तक आप दूसरों का स्टिंग करती थी पर इन दोनों ही विभीषणों ने इनका बह्मास्त्र इन्हीं पर प्रयोग किया और अरविन्द केजरीवाल की छवि को जिससे काफी नुकसान उठाना पड़ा है.

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वर्तमान हालात क्या हैं

अभी हाल ही में बागियों की एक बैठक हुई है जिसमें तय हुआ है कि आप के खिलाफ देश भर में एक अभियान चलाया जायगा, जहाँ अरविन्द केजरीवाल और आप की असलियत को लोगों तक लेकर जाया जायेगा.

ज्ञात हो कि स्वराज अभियान नाम से योगेंद्र-प्रशांत ने जो नया संगठन बनाया है, वह पार्टी की जनता विरोधी नीतियों को सामने लाने का काम करेगा और अरविन्द केजरीवाल की पूरी काली चिठ्ठी को लोगों बतायेगा.

दूसरी तरफ आप का भी फरमान आ चुका है कि पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी बागियों पर कार्यवाही करेगी.

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इन सवालों का जवाब दें मुख्यमंत्री जी

सवाल उठाया जा रहा है कि दिल्ली का मुख्यमंत्री और पार्टी का संयोजक एक ही व्यक्ति क्यों है? केजरीवाल क्यों दूसरों को बोलने की आज़ादी नहीं दे रहे हैं? क्या अरविन्द केजरीवाल जीत के बाद तानाशाही बन चुके हैं? पार्टी में जो संविधान लिखा गया है उसका पालन क्यों नहीं हो रहा है? लोकपाल की जो मांग योगेन्द्र यादव ने उठाई है वह क्यों आपको गलत लग रही है? अभी तक पार्टी के 2 महीने दिल्ली में हो चुके हैं, पर अपने जनता को किया कौनसा वादा पूरा किया? क्या आपकी यह कलह कहीं जनता का ध्यान मुद्दों से हटाकर बस उनका मनोरंजन करने के लिए तो नहीं है?

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घर के भेदी क्या नुकसान कर सकते हैं पार्टी का ?

अब अगर पार्टी से अलग होकर दोनों नाम भेदी बन ही गये हैं तो सबसे पहले केजरीवाल जी की चालाक बातों और उनके उद्देश्य को जनता के सामने रखने रखने का काम होगा. पार्टी की छवि को तार-तार किया जायेगा. अब या तो अरविन्द केजरीवाल एक नई पार्टी का गठन करेंगे या योगेन्द्र-प्रशांत जी नई पार्टी का गठन करेंगे.

विरोधी पार्टियों को ‘आप’ की कमजोरियों से वाकिफ कराया जायेगा.

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अब ऐसे में मुख्यमंत्री केजरीवाल को पता होगा कि उनके मित्र जो अब साथ नहीं हैं वह कहाँ-कहाँ वार करने वाले हैं और इन वार से कैसे बचना है?

अगर केजरीवाल सही हैं जो जीत इन्हीं की होगी अन्यथा राम फिर आयेंगे और विभीषण( प्रशांत-योगेन्द्र) की मदद से लंका को जलाकर राख कर देंगे.

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