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इस हीरो ने कारगिल की लड़ाई में 48 पाकिस्तानियों को मारकर फहराया था तिरंगा

कारगिल का हीरो

कारगिल का हीरो – भारत के गौरवमयी इतिहास में कारगिल का युद्ध हर देशवासी का सिर गर्व से ऊंचा कर देता है।

इस जंग में भारत के सैनिकों और जवानों ने अपनी बहादुरी से पाकिस्‍तान को धूल चटा दी थी। कभी भी देश या दुनिया में कोई संकट आता है तो भारतीय सैनिक अपनी जांबाजी से उस खतरे को दूर करने में अपनी जान तक कुर्बान कर देते हैं। भारतीय सेना का तो लोहा पूरी दुनिया मानती है।

सन् 1999 में हुआ कारगिल का युद्ध भारतीयों के साथ-साथ पाकिस्‍तानियों को भी याद रहेगा। 26 जुलाई, 1999 को भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। इसी दिन भारत ने कारगिल युद्ध में पाकिस्‍तान को हराकर जीत हासिल की थी। आपको बता दें कि इस जंग में भारत के 500 सैनिक शहीद हुए थे और इनमें से कई जवान ऐसे भी थे जिनकी वीर गाथा को आज भी याद किया जाता है।

कारगिल युद्ध में अपनी जांबाजी दिखाने वाले जवानों में से एक रिटायर्ड फौजी कारगिल का हीरो दिगेंद्र सिंह भी थे। राजस्‍थान के सीकर के रहने वाले दिगेंद्र सिंह ने कारगिल जंग में पाकिस्‍तानी फौज की नाक में दम कर दिया था।

कारगिल का हीरो जिसने पांच गोलियां खाई

जंग में दिगेंद्र को पांच गोलियां लगी थीं लेकिन फिर भी उन्‍होंने देश के प्रति अपनी जिम्‍मेदारी निभाई।

उरी हमले के बाद दिगेंद्र ने पहले ही कह दिया था कि अगर जंग होती है तो वो लड़ने जरूर जाएंगें और 100 दुश्‍मनों को तो मारकर ही आएंगें। जिस दिन जंग होगी उसी दिन वो बिस्‍तर से उठकर मैदान में आ जाएंगें, कुछ ऐसा कहना था भारत के इस वीर जवान का। अगर देश से उन्‍हें जंग में शामिल होने का आदेश नहीं मिलता है तो भी वो जंग में हिस्‍सा लेने की पूरी कोशिश करेंगें।

वह सेना की सबसे बेहतरीन बटालियन 2 राजपूताना रायफल्‍स में थे। आपको बता दें कि कारगिल युद्ध में दिगेंद्र ने 48 पाकिस्‍तानी सैनिकों को मार गिराया था।

कारगिल का हीरो जिसने मेजर का सिर काट दिया

कारगिल युद्ध में दिगेंद्र ने बहुत बहादुरी दिखाई। उन्‍होंने चाकू से पाक के मेजर अनवर का सिर काटकर उसमें तिरंगा फहराया था। दिगेंद्र का कहना था कि उनके पास युद्ध का अनुभव है। अगर वो खुद नहीं लड़ पाए तो अपने अनुभव से अपने साथियों की मदद करेंगें। जंग में जीत के बाद राष्‍ट्रपति डॉक्‍टर केआर नारायणन ने उन्‍हें महावीर चक्र से सम्‍मानित किया था। दिगेंद्र को इंडियन आर्मी के बेस्‍ट कोबरा कमांडो के रूप में जाना जाता था। साल 2005 में 47 साल की उम्र में दिगेंद्र रिटायर हो गए।

कारिगल का युद्ध भारत अपने ऐसे ही सैनिकों की बहादुरी और हौंसले से जीता था। देश के लिए जान देने में भारतीय सैनिक एक पल की भी देरी नहीं करते हैं और इस बात का प्रमाण खुद दिगेंद्र सिंह ही हैं जिन्‍होंने एक जंग के बाद कारगिल की लड़ाई में शामिल होने का पूरा मन बना लिया था।

ये था कारगिल का हीरो – उनके हौंसले इतने बुलंद थे कि उन्‍होंने अकेले ही 48 पाकिस्‍तानी सैनिकों को मार गिराया था। ये वाकई में भारत के लिए गर्व की बात है कि उसकी सुरक्षा में इतने जांबाज और बहादुर सिपाही लगे हैं। कारगिल का युद्ध भारतीयों के साथ-साथ पाकिस्‍तानियों को भी याद रहेगा।

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