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कराची में महादेव मंदिर के दरवाजे पर पढ़ाया जा रहा है शिक्षा का पाठ

कराची में महादेव मंदिर

कराची में महादेव मंदिर – पाकिस्तान का नाम सुनते ही अक्सर आपके दिमाग में आतंकवाद और नफरत जैसे ख्याल आने लगते होंगे. आपने हमेशा यही सोच होगा कि पाकिस्तान में हिंदू मंदिर होने असंभव है क्योंकि वहां आतंक का साम्राज्य है.

जहां पर आतंकवाद का बोलबाला हो वहां नेक काम की बात कैसे हो सकती है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर की बात बताने जा रहे हैं, जो पाकिस्तान के कराची में स्थित है. जी हाँ, कराची में महादेव मंदिर, जहां भगवान शिव विराजमान हैं. इस महादेव मंदिर के दरवाजे पर 93 बच्चों की रोज पाठशाल लगती है. इस पाठशाला को देखकर आपको विविधिता में एकता की सीख जरूर मिलेगी. क्योंकि यहां पढ़ने वाले बच्चों सभी हिंदू धर्म के हैं लेकिन पढ़ाने वाली शिक्षिका मुस्लिम धर्म की हैं.

तो चलिए आपको बताते हैं कराची में महादेव मंदिर और कैसे शुरु हुई ये पाठशाला और कैसे पढ़ाने लगी मुस्लिम शिक्षिका…

कराची में महादेव मंदिर

दरअसल कराची में इनिशिएटर ह्यूमन डेवलेपमेंट फाउंडेशन(आईएचडीएफ) नामक एक गैरी सरकारी संगठन ने मंदिर के द्वार पर इस स्कूल को खुलवाया है. ताकि वंचित बच्चों को स्कूल शिक्षा और सदाचार मिल सकें. उस वक्त स्थानीय हिंदू समुदाय ने ही संस्था को मंदिर के अंदर स्कूल खोलने का प्रस्ताव दिया. अभी तक इस इलाके में न तो कोई सरकारी और न ही प्राइवेट स्कूल खुला था.

कराची में महादेव मंदिर

मंदिर के द्वार पर लगती है 93 बच्चों की पाठशाला

कराची में महादेव मंदिर के पुजारी रूपचंद बताते हैं कि यह एक ऐसा मदिर है जहां पर हर धर्म के लोग पूजा-पाठ करने आ सकते हैं. किसी को मनाही नहीं है. यह मंदिर मानवता की सेवा करत है और यहां सबका स्वागत होता है. मंदिर में मुस्लिम अध्यापकों द्वारा हिंदुओं को पढ़ाया जाना विविधता का बड़ा उदाहरण है. रूप चंद कहते हैं कि हमने खुद का स्कूल खोलने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उसके लिए बहुत ज्यादा पैसे मांगे. और कहा कि स्थानीय हिंदू अतिक्रमण करते हैं और उन्हें यहां स्कूल नहीं खोलने दिया जा सकता है.

कराची में महादेव मंदिर

स्कूल के समय मंदिर में आने की है मनाही

मंदिर के पुजारी ने बताया कि जब स्कूल के बाहर पाठशाला लगती है तो मंदिर में आने की मनाही है. वैसे अभी तक बच्चों को फर्नीचर और किताबों की सुविधा मुहैया नहीं हुई है. लेकिन जल्द ही इसकी भी आपूर्ति की जाएगी. फिलहाल वर्तमान में 93 बच्चे पढ़ने आ रहे हैं. बच्चों को जमीन पर पट्टी डालकर स्लेट में पढ़ाया जाता है.

पिछले साल से हिंदू बच्चों को पढ़ा रही हैं मुस्लिम टीचर

इस स्कूल की मुस्लिम शिक्षिका अनम आगा है. जो हर सुबह अपना हिजाब सही करते हुए आती है और बच्चों से हाथ मिलता हैं साथ ही अस्सलामुअलैकुम कहती हैं तो उन्हें जोर से जवा मिलता है “जय श्री राम”. यह रोजाना का होता है. अनम ने एक पाकिस्तानी अखबार से बातचीत के दौरान बताया कि वह साल 2017 से इस स्कूल में पढ़ाने आ रही हैं.उनके लिए एक मुस्लिम टीचर होकर यहां पढ़ाना गर्व की बात है. अनम यहां के छात्रों को बुनियादी शिक्षा देती हैं. बीते साल अनम ने रहमान कॉलोनी के सरकारी डीएमसी स्कूल में 100 बच्चों का दाखिला कराया.

कराची में महादेव मंदिर

अनम आगा ने कभी नहीं सोचा था मंदिर आने के बारे में

अनम कहती है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे कभी किसी मंदिर में प्रवेश करेंगी. लेकिन साल 2017 से वह हर रोज यहां आती है और बच्चों को पढ़ाती हैं. उन्होंने बताया कि जब उन्हें हिंदू समुदाय की पिछड़ी जातियों के बच्चे को पढ़ाने का अवसर मिला तो वह मना कर ही नहीं पाईं. उन्होंने हां कर दी.

अनम कहती हैं कि एक मुस्लिम शिक्षिका होने के नाते मेरे लिए यह गर्व की बात है कि हिंदू समुदाय मुझे उनके बच्चों को पढ़ाने  का मौका दे रहा है. अनम कहती हैं कि पिछले साल मुस्लिम शिक्षकों और हिंदू छात्रों ने मिलकर कराची में महादेव मंदिर में होली, रक्षाबंधन, दिवाली और ईद अन्य त्योहार साथ ही मनाए हैं.

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