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इस बार नवरात्रि में बस इतनी ही देर है कलश स्थापना का शुभ मुहुर्त

कलश स्थापना का शुभ मुहुर्त

कलश स्थापना का शुभ मुहुर्त – कल से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रही है.

नवरात्रि के पहले दिन लोग अपने घरों में कलश की स्थापना करते हैं और कलश हमेशा शुभ मुहुर्त में ही रखना चाहिए. अगर आप भी अपने घर में कलश स्थापना करना वाले हैं.

तो चलिए हम आपको बता दें कि इस बार कितनी देर के लिए है कलश स्थापना का शुभ मुहुर्त.

कलश स्थापना का शुभ मुहुर्त –

इस बार कलश स्थापना का शुभ मुहुर्त बहुत कम समय के लिए है. ये महज़ एक घंटे दो मिनट तक ही रहेगा. कलश स्थापना मुहूर्त सुबह 06:22 से 07:25 तक रहेगा. शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के लिए आपको एक दिन पहले ही सारी तैयारियां कर लेनी होंगी. यदि आप किसी कारण से शुभ मुहुर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो 10 अक्‍टूबर को सुबह 11:36 बजे से 12:24 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्‍थापना कर सकते हैं.

कलश स्थापना के समय कुछ नियमों का पालन करना भी ज़रूरी है.

अगर आप घर में कलश स्थापना कर रहे हैं तो सबसे पहले कलश पर स्वास्तिक बनाएं. फिर कलश पर मौली बांधें और उसमें जल भरें. कलश में साबुत सुपारी, फूल, इत्र और पंचरत्न व सिक्का डालें. इसमें अक्षत भी डालें. कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में करना चाहिए. सुबह नहाने के बाद पूजा स्थल से अलग एक पाटे पर लाल व सफेद कपड़ा बिछाएं. इस पर अक्षत से अष्टदल बनाकर इस पर पानी से भरा कलश स्थापित करें.

कलश का मुंह खुला ना रखें, उसे किसी चीज से ढक दें. यदि कलश को किसी ढक्कन से ढका है तो उसे चावलों से भर दें और उसके बीचों-बीच एक नारियल भी रखें. कलश की स्थापना करने के बाद सुबह-शाम दोनों समय मंत्र जाप करें, चालीसा या सप्तशती का पाठ करना चाहिए. दोनों समय आरती भी करनी चाहिए. मां को दोनों समय भोग भी लगाएं.

भोग में लौंग और बताशा चढ़ा सकते हैं और देवी मां को लाल फूल चढ़ाएं. दीया जलाकर देवी के मंत्र का जाप करें

अब कलश के सामने गेहूं व जौ को मिट्टी के पात्र में रोपें. इस ज्वारे को माताजी का स्वरूप मानकर पूजा करें और दशहरे के दिन इसका विसर्जन कर दें. ईशान कोण में माता की प्रतिमा या कलश रखे. यदि कलश की स्थापना चंदन की लकड़ी पर की जाए तो ये अच्छा माना जाता है. कभी भी बाथरूम या टॉयलेट के आसपास वाली जगह पर कलश की स्थापना न करें.

कलश स्थापना का शुभ मुहुर्त – पूरे विधि-विधान से शुभ मुहुर्त में कलश स्थापना और पूजा से देवी मां प्रसन्ना होती हैं और आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं.

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