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नेहरू की इस गलती से आज चीन में है कैलाश !

कैलाश मान सरोवर

कैलाश मान सरोवर, जिसे भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। हिन्दुओ का ये प्रसिध्द तीर्थ स्थल आज चीन के कब्जे वाले तिब्बत में आता है लेकिन शायद आप नहीं जानते होंगे कि इसके पीछे पं जवाहर लाल नेहरू की गलती थी।

इतिहास के पन्नों को पलटने पर ये पता चलता है कि नेहरू जी की नीतियों के कारण ही ऐसा हुआ और आज कैलाश, चीन में है और वहां दर्शन करने जाने के लिए चीन का वीजा लगवाना आवश्यक है।

कैलाश मान सरोवर

भारत की आज़ादी के बाद इस बात पर चर्चा प्रारम्भ हुई थी कि क्योकि कैलाश मान सरोवर भारत का ही हिस्सा है इसलिए इसे भारत को मिल जाना चाहिए लेकिन नेहरू जी की नीतियों की वजह से ऐसा हो नहीं पाया।

आज़ादी के बाद के इतिहास और कईं ऐतिहासिक दस्तावेजों पर नज़र डालने पर ये पता चलता है कि नेहरू जी ने केवल कैलाश को ही नहीं, बल्कि बल्कि ऐतिहासिक रूप से भारत का हिस्सा रहे एक बड़े इलाके को नेहरू ने चीन को दे दिया।

कैलाश मान सरोवर

ये उस वक्त की बात है जब चीन की सेना बहुत कमज़ोर थी और चीन के मुकाबले भारत की सेना कही अधिक ताकतवर थी ऐसे में अगर नेहरू चाहते तो बड़ी ही आसानी से कैलाश मान सरोवर को भारत में शामिल कर सकते थे लेकिन उन्होने ऐसा नहीं किया।

कैलाश मान सरोवर के इतिहास पर आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि ये प्राचीन भारत का हिस्सा रहा है। असल में प्राचीन भारत में तिब्बत नाम की कोई जगह ही नहीं थी और कैलाश मान सरोवर का पूरा इलाका, भारतीय राजाओं के ही अधीन था।  बीतते वक्त के साथ जब भारत पर मुगलों और अंग्रेज़ो का राज हुआ तो उन्होने इस पहाड़ी हिस्से में ज्यादा रूचि नहीं दिखाई और फिर भारत की आज़ादी के बाद, चीन ने तिब्बत पर हमला कर उसे अपने अधीन कर लिया। उस वक्त पर अगर भारत की सेना चाहती तो चीन की सेना को धर्राशायी कर सकती थी लेकिन उन्होने ऐसा नहीं किया, इसकी वजह नेहरू जी थे, उन्होने चीन को अपना मित्र मानते हुए कोई सख्त कदम नहीं उठाए।

कैलाश मान सरोवर

नेहरू ने सिर्फ  दलाई लामा और उनके समर्थकों को चीनी सेना से बचाते हुए उन्हे अपने देश में जगह दी पर कैलाश मान सरोवर को वापिस पाने में कोई रूचि नहीं दिखाई।

कैलाश मान सरोवर

ऐसा कहा जाता है कि संसद में भी बाद में कईं बार इस बात की चर्चा हुई लेकिन नेहरू हर बार इस बात पर निरूत्तर दिखाई पड़े। संसद में कईं लोगों का ये मत था कि भारत को कैलाश मान सरोवर को चीन के चंगुल से छुड़ाने की कोशिश करनी चाहिए लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। कुछ जानकार इस बात को भी मानते हैं कि अगर सरदार वल्लभ भाई पटेल का निधन नहीं हुआ होता तो वो कैलाश को छुड़ाने में ज़रूर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते और शायद आज कैलाश मान सरोवर भारत के अधिकार में होता।

कैलाश मान सरोवर

इतिहास के पन्नों में झांकने पर यही जानकारी मिलती है। इस विषय पर सबके अलग मत हो सकते हैं ये आर्टिकल सिर्फ कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों को एकत्रित कर लिखा गया है।

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