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अगर सऊदी अरब से जॉब का ऑफर है तो रुक जाइये क्योंकि…

सऊदी अरब से जॉब का ऑफर

अगर प्लेसमेंट एजेंसी आपसे कहे कि सऊदी अरब से जॉब का ऑफर है और मोटी सेलरी पर वह आपकी नौकरी लगवा सकती है तो एक बार सोच लीजिए.

क्योंकि इन दिनों कई प्लेसमेंट एजेंसी खाड़ी में नौकरी के लुभावने आॅफर बताकर लोगों का बेवकफूफ बना रही हैं.

सऊदी अरब में इस समय मंदी आई हुई है, जिस कारण कई कंपनियां अपने कर्मचारियों की सेलरी नहीं दे पा रही है. हालात यहां तक खराब है कि लोगों को चार चार माह से वेतन नहीं मिला है. वहीं मंदी को देखते हुए कंपनियों ने वहां कास्ट कटिंग के नाम पर मोटी सेलरी पर काम करने वाले लोगों की छटनी करनी शुरू कर दी है.

सऊदी अरब से जॉब का ऑफर

मंदी और नौकरी की अस्थिरता से घबराकर काफी संख्या में लोग सुरक्षित भविष्य की तलाश में खाड़ी के देशों में नौकरी छोड़कर अन्य देशों में जाॅब ज्वाइन कर रहे हैं.

इस कारण वहां की कंपनियों पर दोहरा संकट आ गया है. एक आर्थिक मंदी का और दूसरे योग्य पेशेवरों द्वारा सुरक्षित भविष्य की तलाश में कंपनी छोड़ने का. इस कारण वहां योग्य लोगों का भी संकट खड़ा हो रहा है.

प्लेसमेंट एजेंसियों से कहा जा रहा है कि वह उन्हें कम सेलरी पर अनुभवी लोग उपलब्ध कराए. इसलिए सऊदी अरब से जॉब का ऑफर लोगों को मिल रही है.

इसके लिए इन कंपनियों ने भारत सरीखे देशों में पर अपनी नजरे गड़ा दी हैं. क्योंकि भारत में जिस प्रकार लोगों में विदेशों में जाकर नौकरी करने का क्रेज है उसको ये भुनाना चाहते हैं.

इसलिए खाड़ी के देशों में नौकरी का चयन करने से पहले आपको सावधानी बरतने की बहुत आवश्यकता है. नहीं तो बाद में कहीं ऐसा न हो कि आपको पछताना पड़े. क्योंकि हो सकता है कि शुरू में तो ये कंपनी आपको खुशी खुशी बुला लें और बाद में आपको समय पर सेलरी न दें या सेलरी दो तीन महीने की देरी से देकर आपको वहीं उलझा कर रूकने के लिए मजबूर कर दें.

क्योंकि होता क्या है कि जब एक बार कोई व्यक्ति विदेश चला जाता है तो उसकी मजबूरी बन जाती है कि वह वहां से कुछ पैसा कमाकर ही लौटे. या जो पैसा उसने विदेश में जाने के लिए खर्च किया है उसको किसी तरह निकाल ले.

इसी कशमश में वह अपना शोषण कराता रहता है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था तेल पर निर्भर है और जिस प्रकार कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है उसके चलते यहां बजट घाटा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है. बाजार में कैश यानी नगदी की कमी हो गई है. वहीं सरकार खर्च में कटौती कर घाटे को काबू में करने के लिए जो उपाय कर रही है उससे मांग में कमी आएगी. जिससे हालात और खराब होने की आशंका है. लंदन स्थित कैपिटल इकोनाॅमिक्स के अनुसार इन उपायों का नागरिकों पर काफी असर पड़ने वाला है.

इसलिए सऊदी अरब से जॉब का ऑफर या खाड़ी के देशों से मिलने वाले नौकरी के आॅफर को सोच विचार के बाद ही चुने.

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