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जगन्नाथ पुरी मंदिर के रत्न भंडार की खोई चाबियों

जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की चाबियाँ

जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की चाबियाँ – श्री जगन्नाथ मंदिर हज़ारों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है.

भारत के चार धामों में से एक भगवान विष्णू का धाम श्री जगन्नाथ मंदिर है, जहां विराजमान है भगवान जगन्नाथ, उनकी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र.

ये मंदिर प्राचीन काल से ही हिंदुओं की आस्था का केंद्र रहा है. पूरी के जगन्नाथ मंदिर का निर्माण सन् 1078 -1148  के बिच कलिंग राजा ने शुरू करवाया था. लेकिन सन् 1197 में ओड़िआ शासक आनंद भीम देव ने मंदिर को पूरी तरह तैयार करवाया. इस मंदिर पर सदियों से राजा महाराजा का आस्था बना रहा है, उन्होंने सोने, रत्न और हिरे जोरात भगवान को भेट किये थे. इन्ही में से एक थे महाराजा रण जीत सिंह जिन्होंने सबसे ज्यादा हिरे जोरात  दान किए थे.

जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की चाबियाँ

ये सारें हिरे जोरात भगवान श्री जगारथ के पैरों के नीचें रत्न भंडार में रखें हुए है. लेकिन आज उसकी चाबी गम हो गई है.

4 अप्रैल 2018 को श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन कमेटी की बैठक में पता चला कि कोष के अंदरूनी कक्षों की चाबियां गायब थीं. नियमों के अनुसार, ताला लगाने के बाद जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की चाबियाँ जिला अधिकारी को दे दी जाती हैं, जिसके बाद ये चाबियां जिला कोष में जमा कर दी जाती हैं. खबरों को मानें तो, चाबियों न तो सरकारी कोष में है और न ही जिला अधिकारी के पास.

जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की चाबियाँ

4 अप्रैल को 16 सदस्यीय का एक दल रत्न भंडार की स्थिति जानने के लिए इसके दरवाजे 34 साल बाद खोले थे. निरीक्षण टीम में पुरी के राजा गजपति महाराज दिव्यसिंह देव या उनके प्रतिनिधि और पत्तजोशी महापात्र भी शामिल थे. हालांकि अंदरूनी कक्षों की चाबियां नहीं होने के कारण वे अंदर नहीं जा सके. इसके बाद वे बाहरी कक्षों का ही निरीक्षण करने के बाद लौट आए.

पिछली बार 1984 में इसका निरीक्षण किया गया था तब रत्न भंडार के 7 में से सिर्फ 3 चैंबरों को ही खोला गया था. यह कोई नहीं जानता है कि अन्य चैंबरों में क्या रखा हुआ है. बता दें कि इससे पहले यह 1984, 1978, 1926 और 1905 में खोला गया था. मंदिर के अधिकारियों को कोषागार की चाबी उसी दिन पुरी स्थित सरकारी कोषागार से मिलती है.

जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की चाबियाँ

जगन्नाथ मंदिर एक्ट 1960 के मुताबिक मंदिर का कोषागार घर हर 6 महीने में खोला जाना चाहिए. और हर 3 साल पर मंदिर कमिटी चेंज होने पर रत्न की जांच की जाने चाहिए. लेकिन पिछले 34 साल से कोषागार की जांच नहीं होने पर न मंदिर कमिटी कुछ कहना चाहती न ही सरकार कुछ बोलना चाहता है.

ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की चाबियाँ नहीं मिलने पर सियासत तेज हो गई है. जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की चाबियाँ खोने के बाद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. फिर भी लोगो को लगता है कि जगन्नाथ मंदिर से खजाने की चोरी हुई है, लेकिन चोरी की ये पहला मामला नहीं है साल 2001 में भी जगरनाथ मंदिर से 2 मूर्तियाँ चोरी हुई थी. अभी भी ये रहस्य बनी हुई है कि जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की चाबियाँ कहाँ गई और क्या सारें रत्न सुरक्षित है. इस सारें रहस्यों का तब  खुलासा हो  पाएगा जब सरकार दुबारा जांच कमिटी बेठाएगी  और अच्छे से जांच करेगी. तब तक हम बस कर सकते है तो इंतजार.

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