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भारतीय ड्रेसिंग रूम के किस्‍से जो आपको हंसाएगा और भावुक करेगा

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कैमरे के सामने क्रिकेट खिलाड़ी की जिंदगी जैसी दिखती है, ड्रेसिंग रूम में उससे जुदा होती है।

ड्रेसिंग रूम के अंदर ऐसा बहुत कुछ घटता है, जिसके हम गवाह नहीं होते। प्रेरणादायी भाषण से लेकर शरारत तक वहां सबकुछ होता है और कई बार तो ड्रेसिंग रूम जंग के मैदान में भी बदल जाता है।

मगर, वहां की कहानियां दीवारों के कानों से होती हुई बाहर आती हैं।

कभी किसी क्रिकेटर की बायोग्राफी या फिर किसी इंटरव्‍यू के जरिये भी अक्‍सर ड्रेसिंग रूम के अंदर की हलचल दुनिया के सामने आ जाती है।

इनमें से कुछ ऐसी कहानियां है, जो बाहर आने के बाद हमेशा लोगों के जेहन में दर्ज हो जाती हैं।

हम भी आपको भारतीय ड्रेसिंग रूम के कुछ ऐसे ही चुनिंदा वाकये बताने जा रहे है, जो आपको प्रेरित भी करेंगे और आपके चेहरे पर मुस्‍कान भी लाएंगे।

जब टीम वालों ने विराट की खींची टांग-

विराट कोहली का भारतीय ड्रेसिंग रूम में पहला दिन था। वह सब खिलाडि़यों से अलग किनारे पर बैठे थे। कुछ खिलाडि़यों ने विराट के साथ मजाक करने का फैसला किया। विराट को बताया गया कि भारतीय ड्रेसिंग रूम में जिसका भी पहला दिन होता है उसे पंरपरा के मुताबिक सचिन तेंडुलकर के पैर छूने होते हैं। सचिन जब अभ्‍यास के लिए किट पहन रहे थे तब विराट उनके करीब गए। सचिन ने पूछा कि क्‍या हुआ, कुछ मदद चाहिए तो विराट ने उन्‍हें पूरी घटना बताई। इस पर सचिन ने जोरदार ठहाका लगाया और बोले कि ऐसा कुछ नहीं है। भारतीय ड्रेसिंग रूम में तुम्‍हारा स्‍वागत है।

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ड्रेसिंग रूम में सबसे ज्‍यादा उड़ा धोनी का मजाक-

कई क्रिकेटर शुरुआती करियर में धोनी को ‘बिहारी’ कहकर उनका मजाक बनाते थे। युवराज सिंह हमेशा धोनी का मजाक बनाते थे। युवी कहते थे कि सिर्फ चौके-छक्‍के जमाना बड़ी बात नहीं बल्कि टीम के लिए मैचविजेता बनो तो नाम होगा। मगर जब धोनी ने मैच विजेता पारी खेलना शुरू की तो युवी तब भी नहीं घबराए और बोले- टेस्‍ट मैच से खिलाड़ी की असली पहचान होती है। युवी के तानों से परेशान धोनी ने एक दिन कहा- यह सब तो ठीक है, लेकिन ये बताओ कि तुम हमेशा गुस्‍से में क्‍यों रहते हो। इस बात ने दोनों खिलाडि़यों के बीच की दूरी मिटा दी और बाद में दोनों अच्‍छे दोस्‍त बने।

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भावुक विराट ने छुए सचिन के पैर-

शरारत से हटकर यह विराट के जीवन का शायद सबसे भावुक दिन था। मास्‍टर ब्‍लास्‍टर सचिन तेंडुलकर ने 16 नंवबर 2013 को अपने जीवन का आखिरी अंतरराष्‍ट्रीय मैच खेला। मैच की शुरुआत में विराट की आंखों में आंसू थे। वह अपने हाथ में कुछ धागे लेकर आए और सचिन को सौंप दिए। विराट ने कहा कि मेरे पापा के बाद सोचता था कि इसका असली हकदार कौन है और तभी उन्‍होंने सचिन के पैर छुए। सचिन ने विराट को गले लगाया और कहा कि तुम्‍हारी जगह पैरों में नहीं बल्कि दिल में है। इस बात का उल्‍लेख सचिन ने अपनी बायोग्राफी प्‍लेइंग इट माय वे में किया है।

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फारुख इंजीनियर ‘डक’ पर हुए आउट

1971 में फारुख इंजीनियर और सुनील गावस्‍कर का चयन रेस्‍ट ऑफ वर्ल्‍ड की टीम में हुआ। मुकाबला ऑस्‍ट्रेलिया से था। सुनील गावस्‍कर ने अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था जबक‍ि इंजीनियर उनसे सीनियर थे। इंजीनियर ने गावस्‍कर से ड्रेसिंग रूम में सलाह देने के इरादे से कहा कि शून्‍य पर आउट होकर मत आना क्‍योंकि मेलबर्न का पवैलियन बहुत दूर है। मजेदार बात यह रही कि गावस्‍कर को हिदायत देने वाले इंजीनियर खुद शून्‍य पर आउट होकर लौटे। गावस्‍कर को बहुत हंसी आई होगी।

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जब जॉन राइट ने सहवाग की कॉलर पकड़ी-

2002 की नेटवेस्‍ट सीरीज में सहवाग अपने सर्वश्रेष्‍ठ फॉर्म में थे। मगर वह खराब शॉट खेलकर अपना विकेट गंवा देते थे। उस समय के कोच जॉन राइट ने ड्रेसिंग रूम में सहवाग की कॉलर पकड़ी ली और धमकी दे डाली कि तुम खराब शॉट खेलकर अपना विकेट नहीं थ्रो करोगे क्‍योंकि राइट इस सीरीज में जीतना चाहते थे। अगले ही मैच में सहवाग खराब शॉट खेलकर आउट हुए। राइट ने अपने बयान के अनुसार ड्रेसिंग रूम में सहवाग की कॉलर पकड़ी और जमकर हिलाया। सहवाग ने ईमानदार खिलाड़ी बनकर राइट से कुछ नहीं कहा और अपनी गलती मानी। बाद में भारत ने नेटवेस्‍ट ट्रॉफी पर कब्‍जा किया।

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कपिल ने दाऊद को कर दिया ड्रेसिंग रूम से बाहर-

भारतीय टीम के पूर्व कप्‍तान दिलीप वेंगसरकर ने मुंबई में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान खुलासा किया कि भारत के मोस्‍ट वॉन्‍टेड डॉन दाउद इब्राहिम एक बार भारतीय ड्रेसिंग रूम में घुस आया था। वेंगी ने बताया कि 1986 शारजाह टूर्नामेंट में दाउद ने ड्रेसिंग रूम में आकर पाकिस्‍तान को हराने पर भारतीय खिलाडि़यों को कार देने की बात कही थी। तब तत्‍कालीन कप्‍तान कपिल देव ने उन्‍हें ड्रेसिंग रूम से बाहर जाने के लिए कहा था।

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खिलाडि़यों ने ‘दादा’ को बनाया मामू-

युवराज सिंह और हरभजन सिंह ने तत्‍कालीन भारतीय कप्‍तान सौरव गांगुली से ड्रेसिंग रूम में नाराजगी जाहिर की। इसका कारण बताया कि ‘दादा’ ने पत्रकारों से कहा कि युवी और भज्‍जी का बर्ताव अच्‍छा नहीं है और वो दोनों बहुत हंगामा करते है। गांगुली अपनी सफाई देने लगे और दोनों खिलाडि़यों को मनाने में जुट गए। इस बात को बढ़ता देख राहुल द्रविड की हंसी नहीं रूकी जिन्‍हें इस शरारत का पूरा अंदाजा था। दरअसल, गांगुली को अप्रैल फूल बनाया गया था।

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युवी आप ओपनिंग करोगे-

2001 नेटवेस्‍ट सीरीज में गांगुली ने युवराज से कहा कि ‘कल ओपनिंग करेगा।’ नया खिलाड़ी होने के कारण युवी के पास हां कहने के अलावा कोई और विकल्‍प नहीं था। एक मध्‍यक्रम के बल्‍लेबाज के लिए अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर जल्‍द ओपनिंग करना आसान नहीं होता। अगली सुबह युवराज बहुत बैचेन थे। तब गांगुली ने उनसे कहा कि वह सिर्फ एक मजाक था। युवराज सिंह पहले खूब हंसे और फिर राहत की सांस ली।

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द्रविड को मुक्‍का मार देते सचिन-

पाकिस्‍तान के खिलाफ 2004 मुल्‍तान टेस्‍ट में सचिन जब 194 रन बनाकर खेल रहे थे तब तत्‍कालीन कप्‍तान राहुल द्रविड ने पारी घोषित कर दी। सचिन की आंखों में गुस्‍सा साफ नजर आ रहा था। टीम के खिलाडि़यों को लग रहा था कि सचिन ड्रेसिंग रूम में आकर द्रविड को मुक्‍का मार देंगे। मगर अपनी छवि और नाम के अनुसार सचिन ने बेहद शांत रास्‍ता अपनाया और किसी से बात नहीं करना सही समझा। वह गॉगल पहनकर मैदान में उतरे।

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जब सचिन बने टीम के प्रेरक-

2003 विश्‍व कप के फाइनल में ऑस्‍ट्रेलिया ने भारत के सामने 359 रन का विशाल लक्ष्‍य रखा था। ड्रेसिंग रूम में लौटते समय भारतीय खिलाड़ी निराश थे। तब सचिन ने प्रेरक की भूमिका निभाते हुए पूरी टीम की हौसला अफजाई की और कहा कि अगर हम प्रति ओवर एक बाउंड्री निकालने में सफल रहे तो 50 गेंदों में 200 रन जुटा लेंगे। फिर 160 गेंदों में 250 रन बनाना मुश्किल नहीं होगा। हालांकि यह मैच भारत हार गया, लेकिन सचिन की महानता इस भाषण से समझ आई कि वह कभी हार नहीं मानते। यह वाकया हर्षा भोगले ने आईआईएम में बताया था।

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सुधीर कुमार चौधरी ने जीती विश्‍व कप ट्रॉफी-

सचिन के सबसे बड़े प्रशंसक सुधीर कुमार चौधरी को बड़ा खास तोहफा मिला। सचिन तेंडुलकर ने 2011 विश्‍व कप ट्रॉफी जीतने के बाद सुधीर को ड्रेसिंग रूम में बुलाया और विश्‍व कप की ट्रॉफी के साथ फोटो खिंचवाया। इसके बाद सचिन ने उन्‍हें ट्रॉफी सौंप दी। सचिन के बाद जहीर खाने ने सुधीर को गले लगाया और फोटो खिंचवाई। सचिन आप सच में महान हो।

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