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अफ्रीका के शेरों ने किया भारतीय शेरों का घर में शिकार!

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क्रिकेट के दिग्गज…. दुनिया की सबसे खतरनाक युवा टीमों में से एक भारत.

अपनी धरती पर शायद भारत से अच्छा रिकॉर्ड रखने वाली कम ही टीम है.

पिछले कुछ दिनों में हमारी टीम ने सभी टीमों को हराया और हर नए खिलाडियों में एक नया जोश दिखाई दे रहा था.

और फिर आई  बहुप्रतीक्षित सीरीज भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका

इस दौरे की शुरुआत हुई  T20 से . दोनों मैच हमारे देश ने बुरी तरह हारे. दर्शकों को और भारतीय टीम के समर्थकों को बहुत बुरा लगा. लेकिन ये आस थी कि वन डे सीरीज में हमारी टीम अफ्रीका की टीम को नानी याद दिला देगी.

वन डे श्रृंखला भी शुरू हुई. दोनों ही टीम तैयार थी लोहा लेने को. जैसा की सोचा था वैसा ही हुआ दोनों में मुकाबला कांटे का हुआ.

पांच मैच की श्रृंखला में दोनों टीम दो -दो मैच जीत कर पहुंची मुंबई. मुंबई के वानखेड़े में वो मुकाबला था जो निश्चित करता कि कौन होगा इस श्रृंखला का विजेता.

क्रिकेट पंडितों से लेकर प्रशंसकों तक सबको भरोसा था वानखेड़े में भारत अपना परचम ज़रूर लहराएगा.

मैच शुरू होते ही सबकी गलतफहमी दूर हो गयी.  पहली गेंद से ही अफ्रीका की टीम ने भारतीय गेंदबाजों को जो पीटना शुरू किया वो मैच की आखिरी गेंद तक चलता रहा.

भारतीय गेंदबाज़ अंतर्राष्ट्रीय स्तर के गेंदबाज़ ना लगकर किसी गली मोहल्ले में खेलने वाले खिलाड़ी लग रहे थे.

मोहित शर्मा,भुवनेश्वर कुमार  की गेंदों को जिस तरह से खेला वो देखने लायक था.

लेकिन अभी भी ये किसी ने नहीं सोचा था कि स्कोर 300-350 से ऊपर जा सकेगा. और फिर उसके बाद आया एक तूफ़ान जिसका नाम था AB डिवेलिएर्स . पूरे मैदान में रनों की बारिश हुई और अफ्रीका ने अपने तीन बल्लेबाजों के शतकों की बदौलत भारत के खिलाफ भारत में सबसे बड़ा स्कोर 438 रन खड़ा कर दिया.

इतने विशालकाय स्कोर के सामने टिक पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था. एक तरह से सीरीज तो हाथ से जा ही चुकी थी फिर भी प्रशंसकों को उम्मीद थी कि शायद रोहित शर्मा या कोहली के बल्ले से कोई चमत्कार हो जाये. खासकर शर्मा से जिनके नाम वन डे में दो -दो दोहरे शतक है.

लेकिन उम्मीद पूरी ना हो सकी और ऐसी हार मिली जो शायद भारतीय क्रिकेट टीम और दर्शकों को बहुत समय तक याद रहेगी.

हार जीत तो लगी रहती है पर इतनी बुरी हार का असर शायद युवा खिलाडियों पर पड़ेगा. कितना भी मज़बूत खिलाडी हो ऐसी हार से आत्मविश्वास पर असर तो पड़ता ही है.

अब आने वाली टेस्ट सीरीज आखिरी मौका है अफ्रीका के सामने अपना आत्मविश्वास और सम्मान फिर से हासिल करने का.

धोनी की कप्तानी में हुई दोनों श्रृंखला हारने के बाद अब नज़रें टिकी है विराट कोहली पर जो टेस्ट टीम के कप्तान है.

आशा करते है कि भारत अपनी धरती पर इस सीरीज में सूपड़ा साफ़ नहीं होने देगा.

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