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जब फुटबॉल विश्व कप में नंगे पैर खेलना चाहती थी भारतीय टीम लेकिन फिर जो हुआ…

फुटबॉल विश्व कप

फुटबॉल विश्व कप – अक्सर इस विषय पर चर्चा होती है कि अगर भारत साल 1950 के फुटबॉल विश्व कप में खेल लेता तो आज फुटबॉल में भी भारतीय टीम का जलवा देखने को मिलता।

माना जाता है कि इस विश्व कप में भारतीय टीम के पास खेलने के लिए जूते नहीं थे और इस कारण टीम इंडिया नंगे पैर मैच खेलने की तैयारी कर रही थी। लेकिन फीफा ने भारतीय खिलाड़ियों को नंगे पैर खेलने की इजाजत नहीं दी और इस कारण भारत के फीफा विश्व कप में खेलने के सपने पर पानी फिर गया।

आज हम आपको बताएंगे कि क्या ऐसा वाकई हुआ था, क्या फुटबॉल विश्व कप में भारत को नंगे पैर होने की वजह से मैच खेलने से रोक दिया गया था या फिर इसके पीछे कुछ और वजह थी। आइए जानते हैं।

1948 के ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन कर जीता दिल:

आजादी मिलने के 1 साल बाद भारतीय टीम ने फुटबॉल में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला। 1948 के ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम ने गजब का खेल दिखाया। भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन ने हर किसी का दिल जीत लिया। हालांकि इस दौरान एक दिलचस्प बात देखने को मिली थी और वो ये थी कि भारतीय टीम ने अपने ज्यादातर मैच नंगे मैर या फिर मोजे पहन कर खेला था।

फीफा विश्व कप में भारत को मिला खेलने का मौका:

साल 1950 में फीफा विश्व कप होना था। विश्व कप के लिए एशिया की एक ही टीम का चयन होना था। एशिया से फिलिपींस, इंडोनेशिया और बर्मा ने अपना नाम वापस ले लिया और भारत को टूर्नामेंट में खेलने का मौका मिल गया। हालांकि इस दौरान फीफा ने पहले ही भारत को आगाह कर दिया था कि अगर भारत को टूर्नामेंट में हिस्सा लेना है तो उन्हें नंगे पैर नहीं बल्कि जूतों में खेलना होगा।

ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन ने दिया कम अभ्यास का हवाला:

इन सबके बीच ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन ने घोषणा कर दी कि वो टीम चयन से संतुष्ट नहीं है और साथ ही टीम के खिलाड़ियों ने इस टूर्नामेंट के स्तर का अभ्यास नहीं किया है और इस कारण भारतीय टीम इस विश्व कप में शामिल नहीं होगी। दावा किया गया कि एआईएफएफ विश्व के लिए ओलंपिक जितना गंभीर नहीं था और इससे भारतीय खिलाड़ियों के हौसले पस्त हो गए।

हालांकि ये आज तक साफ नहीं हो पाया कि भारतीय टीम विश्व कप में चुने जाने के बाद भी क्यों नहीं खेल पाई। क्या इसके पीछे खिलाड़ियों के नंगे पैर खेलने की आदत थी या फिर एआईएफएफ के निर्देश। वजह भले ही कुछ भी रही हो लेकिन ये कदम भारत के लिए घातक साबित हुआ और भारत आज तक फुटबॉल के खेल में संघर्ष कर रहा है।

ओलंपिक में अच्छा करने के बाद भी भारत 1950 के विश्व कप में भाग लेते-लेते रह गया।

इतना तो तय है कि अगर भारत 1950 के फुटबॉल विश्व कप में खेल लेता तो आज फुटबॉल में भारत की रैंकिंग 150 के पार नहीं होती और भारत में इस खेल का स्तर भी काफी ऊंचा होता।

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