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क्या सचमुच मंत्रो से हुआ पौरणिक कथाओं में बच्चों का जन्म या हकीकत है कुछ और

paandav-kunti

पौराणिक कथाओं में अक्सर ये सुनने को मिलता हैं कि किसी देवी या देवता के नाम के मंत्र का उच्चारण करने से बच्चों के जन्म की बात कही गई है.

क्या वाकई में ये सच है  कि बच्चे पारंपरिक रुप से पैदा ना होकर मंत्रो से पैदा होते है?

क्या वाकई में मंत्रों में इतनी शक्ति होती है कि जिसकी वजह से सिर्फ मां की कोख से बच्चे पैदा करने के लिए किसी पुरुष की जरुरत नहीं होती या फिर इनके पीछे कुछ और सच छिपा है.

कहा जाता है कि कुंती के पति पांडू शापित थे, जिससे कुंती को उनसे बच्चे नहीं हो सकते थे. ऐसे में महर्षी दुर्वासा  ने एक उपाय निकाला  एक वरदान देने का जिसकी वजह से राजा पांडू को एक बात का इत्मीनान हो गया कि उन्हें भी अब बच्चे मिल पाएंगे. कुंति को धर्मराज से युधिष्ठीर को, वायु से भीमसेन को और इन्द्र से अर्जुन को उत्पन्न किया गया. कहा जाता है कि बिना शारारिक संबंध बनाए ही संबंधित देवताओं के वर से ही बच्चों की उत्पत्ती हुई.

सबसे बड़ा सवाल ये उठता हैं कि कलियुग में अगर ऐसा संभव नहीं है तब क्या वाकई में उस दौर में सिर्फ वर से ही बच्चों का जन्म हुआ, या फिर हकीकत कुछ और थी क्या पौराणिक पात्रों को बदनामी से बचाने के लिए ऐसी कहानियां रची गई.

कहा जाता हैं कि कुंती ने मंत्र पढ़कर  भगवान सूर्यदेव का स्मरण किया. भगवान सूर्य, कुंती के सामने आ गए. कहा जाता हैं कि भगवान को देखकर कुंति भी उनकी तरफ आकर्षित हो गई.  सूर्य ने कहा, कुंती में तुम्हें पुत्र देने आया हूं. कुंती घबरा गईं, उन्होंने कहा कि मैं अभी कुंआरी हूं, ऐसे में मैं पुत्रवती नहीं होना चाहती. सूर्य ने कहा कि  मंत्र के वरदान से तुम्हें पुत्र जरूर देकर जाउंगा और तुम्हारा कौमार्य भी सुरक्षित रहेगा.  इस तरह कुंती ने एक सुंदर से बच्चें को जन्म दिया.

इसलिए कुंती ने उस पुत्र को एक संदूक में रखकर गंगा नदी में बहा दिया. वह संदूक तैरता हुआ, अधिरथ नाम के एक सारथी की नजर में पड़ा. सारथी की कोई संतान नहीं थी, उसने जब संदूक खोला तो उसे पुत्र मिल गया.

सिर्फ महाभारत में नहीं की गई बिना स्त्री- पुरुष के बच्चे होने की बात नहीं कही गई जानते है उन फ़ेमस पात्रों का जन्म वरदान या फिर पांरपरिक रुप से स्त्री-पुरुष के संबंध से नहीं हुआ है.

1.  होरस

होरस प्राचीन मिस्र में आकाश के देवता माने जाते थे और सूर्य को होरस की शक्ति का प्रतीक माना जाता था, होरस को बाज़ के सर के साथ दिखाया जाता है और बाज़ होरस का प्रतीक है. कहा जाता है कि इनके जन्म के बावजूद उनकी मां वर्जिन थी. कहा जाता है कि उनके शरीर में एक आत्मा का प्रवेश हो गया था. जिसकी वजह से वो कुंवारी भी रही और होरस का जन्म भी हुआ.

२.  परस्यूस-

ग्रीक मॉयथोलॉजी के मुताबिक इनकी मां इनके जन्म के वक्त एक कमरे में बंद थी और सोने की बारीश हुई उससे ही इनका जन्म हुआ.

३.  हैफ़ीस्टस

प्राचीन युनानी धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक थे. वो अग्नि, लोहारो, धातुकी और कारख़ानों के देवता माने जाते है. कहा जाता है कि इनका जन्म भी बिना किसी पुरुष की मदद से हुआ था. सिर्फ इच्छा शक्ति के बल पर.

भारत ही नहीं दूसरे देशों में सुपरनेचुरल पावर के जरिए बच्चों का जन्म हुआ हैं वो बिना स्त्री या पुरुष के विवाह से हालांकी वैज्ञानिक मत के अनुसार ऐसा संभव नहीं है और बात पुरानी होने के वजह से इसके कोई प्रमाण भी नहीं है.

आस्था और लोगों का विश्वास ही वर्जिन बर्थ यानि बिना शारिरिक संबंध के मत को प्रबल बनाता है. जिसका आधार पौराणिक कथाएं और प्राचीन ग्रंथ हैं.

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