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मुझे दिखाओ वो दुनिया जहाँ बिना इकन्नी हिलाये इंसानियत हिलती हो!

corruption

सारा दिन अख़बार और टीवी चैनलों पर एक ही बात अलग-अलग तरह से दिखाई जाती है: भारत में भ्रष्टाचार से मचा हाहाकार!

जी हाँ, हमारे देश में भ्रष्टाचार बुरी तरह से फैला है और शायद ही कोई होगा जो इस अप्रिय हरक़त में भागीदार ना हो| लेकिन कोई यह भी तो बताये कि दुनिया में आख़िर ऐसी कौन-सी जगह है जहाँ भ्रष्टाचार नहीं है?

ऐसा एक शहर, एक गाँव, एक देश दिखा दो जहाँ रिश्वतबाज़ी ना चलती हो, जहाँ पैसों को लेकर बेईमानी ना होती हो, और जहाँ बिना इकन्नी हिलाये इंसानियत हिलती हो .

कारण है कि हर जगह बस्ते तो सिर्फ़ इंसान ही हैं! और सभी इंसानों की फितरत एक सी ही होती है| कोई ज़रुरत के कारण हेरा-फेरी करता है तो कोई लालच में आकर! किसी की मजबूरी है रिश्वत लेकर काम करना तो कोई अरबों कमाकर भी संतुष्ट नहीं है,

उदहारण के तौर पर हमारे देश की पुलिस को ले लीजिये| बेचारे कई बार 72 घंटे तक बिना सोये मुस्तैदी से नौकरी करते हैं लेकिन तनख्वाह के नाम पर उनको मिलता है, कपिल शर्मा की भाषा में बाबा जी का ठुल्लु! अब घर चलाने के लिए, बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवाने के लिए उन्हें रिश्वत का सहारा लेना पड़ता है तो बेचारों की क्या ग़लती है? अगर सरकार और अधिकारी उनकी तनख्वाहें उनकी नौकरी की ज़रूरतों के हिसाब से बढ़ा दें, तो ज़ाहिर है उन्हें इस ग़लत काम का सहारा नहीं लेना पड़ेगा|

अब उदहारण लीजिये अमरीका का!

हर कोई कहता है बड़ा ही साफ़ देश है, सभी लोग शराफ़त के पुतले हैं लेकिन कोई पूछे कि इराक़ में लड़ाई के पीछे क्या कारण था? तेल पर कब्ज़ा ही तो अमरीका का इतनी बड़ी लड़ाई लड़ने का मुद्दा था! और ऐसी ही कितनी लड़ाईयाँ उसने लड़ डाली कभी अपने हथियारों की इंडस्ट्री को मुनाफ़ा पहुँचाने के लिए तो कभी सत्ता हथियाने के लिए तो कभी अपने देश में वोट बटोरने के लिए! हाँ, इसे आप चिंदिगारी वाला भ्रष्टाचार नहीं कह सकते लेकिन यह बड़े ही गुप्त तरीके का, बड़े तरीके का, अरबों-खरबों डॉलर्स वाला भ्रष्टाचार ज़रूर रहा है|

और अमरीका जैसे बहुत से दूसरे देश भी हैं जहाँ भ्रष्टाचार का रूप-रंग बेशक़ हमसे अलग हो, लेकिन है वह भी भ्रष्टाचार!

तो आख़िर होना क्या चाहिए?

सबसे पहले तो यह ढोल पीटना बंद करो कि हम सबसे भ्रष्ट लोग हैं!

उसके बाद जिन लोगों को भ्रष्ट होने से बचाया जा सकता है, उन पर काम करो! यानि कि तनख्वाहें बढ़ाओ, उन्हें जीने का मौका दो|

फिर जो जन्मजात लालची और घटिया किस्म के लोग हैं, उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजो!

लेकिन हम सब जानते हैं कि यह सब इतना आसान नहीं है| इसलिए सबसे आसान रास्ता इस वक़्त यही है कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाओ पर उस से पहले हर अधिकारी, सरकारी कर्मचारी के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाओ, यह सुनिश्चित करो कि उन्हें उनकी मेहनत के मुताबिक मुआवज़ा मिले ताकि वो ज़रूरत के बोझ से दबकर भ्रष्ट ना बनें!

दुनिया में कभी भी कहीं भी भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं हो सकता, यह बात मान लेनी चाहिए|

हाँ, उसे कम ज़रूर किया जा सकता है और हम सबकी कोशिश बस यही रहनी चाहिए!

आईये कोशिश करें कि समस्या का हल ढूँढा जाए, सिर्फ़ उसका ढिंढोरा ना पीटते रहें!

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