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सुबह से शाम तक होते हैं 18 घंटे! ऐसी होनी चाहिए एक असरदार दिनचर्या!

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हम सबकी ज़िन्दगी में एक दिन में 24 घंटे होते हैं|

अब चाहे वो देश के प्रधानमंत्री हों या स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट! लेकिन फिर भी देखिये, एक प्रधानमंत्री के पास जितना काम होता है, उतना कॉलेज के बच्चों के पास नहीं होता, है ना?

तो कैसे मुमकिन हो पाता होगा प्रधानमंत्री के लिए एक दिन में इतना सारा काम कर पाना जब स्टूडेंट्स कॉलेज की पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पाते?

जवाब है: टाइम टेबल!

जी हाँ, समय सब के पास बराबर का है, ज़रुरत है उसके सही इस्तेमाल की| आप किस तरह अपने दिन को बाँटते हैं, किस तरह ज़रूरी कामों को पहले और ग़ैर-ज़रूरी कामों को बाद में करने का प्लैन बनाते हैं, वही फ़ैसला करेगा कि आपको कितनी सफ़लता मिलेगी!

टाइम टेबल बनाने से पहले सबसे ज़रूरी काम है कि ये जान लें कि करना क्या है, जो काम ज़रूरी हैं क्या उन्हें करने के सभी साधन हैं आपके पास? जैसे कि अगर कॉलेज में पढ़ते हैं और परीक्षाओं के लिए पढ़ना है तो क्या ज़रूरी किताबें और नोट्स तैयार हैं? अगर नहीं तो उन्हें पाने या बनाने में कितना समय लगेगा, उसका हिसाब भी बराबर बनाना होगा!

जिन बातों का ध्यान रखना पड़ेगा एक टाइम टेबल या एक असरदार दिनचर्या बनाते वक़्त वो हैं:

1)   खाने और सोने का वक़्त बंधा होना चाहिए, क्योंकि उसके बिना और कोई काम नहीं हो पायेगा!

2)   आपके दोस्तों और घरवालों को आपके टाइम टेबल के बारे में पता होना चाहिए ताक़ि वो आपको डिस्टर्ब ना कर सकें!

3)   कुछ समय एक्सेरसाइज़ और खेलों के लिए निकालें!

4)   होमवर्क और ख़ुद की पढ़ाई के लिए समय अलग से बंधा होना चाहिए|

5)   अपने लिए भी समय होना चाहिए, चाहे कितनी ही पढ़ाई क्यों ना करनी हो!

6)   टाइम टेबल फ्लेक्सिबल होना चाहिए ताक़ि अचानक से आये प्रोजेक्ट्स या किसी एक्ज़ाम के लिए भी समय निकल सके!

7)   समय-समय पर देखते रहें कि ये टाइम टेबल आपके लिए काम कर रहा है या नहीं वरना ज़रूरी फेर-बदल के लिए हमेशा तैयार रहें!

अब इन बातों का ध्यान रखेंगे तो उदाहरण स्वरुप आपका टाइम टेबल कुछ इस तरह का होना चाहिए:

सोने के लिए: 7 घंटे

खाने-पीने के लिए: 1 घंटा

बाथरूम, एक्सेरसाइज़ के लिए: 1 घंटा

कॉलेज या ट्यूशन पर आने-जाने के लिए: 1.5 घंटा

कॉलेज में: 5 घंटे

रिलैक्स करने के लिए: 0.30 घंटा

दोस्तों के साथ मस्ती के लिए: 1 घंटा

ट्यूशन के लिए: 2 घंटे

टीवी या म्यूज़िक सुनने के लिए: 1 घंटा

इन सब ज़रूरी कामों को करने के बाद भी आपके पास करीब 4 घंटे बचते हैं जिन्हें आप पढ़ाई की ज़रुरत के अनुसार आसानी से बाँट सकते हैं! बस ध्यान रहे कि वक़्त की बर्बादी ना हो और हर सेकंड का अच्छा इस्तेमाल हो!

तो इंतज़ार किस बात का है? बना लीजिये एक टाइम टेबल और फिर उसे पूरे अनुशासन के साथ अपनी दिनचर्या में ढाल लीजिये! देखिएगा, सफ़लता आपके क़दम चूमेगी!

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