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हमारे पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के लिए शादी कितनी जरुरी है ?

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सदी कोई भी हो महिलाओं के लिए शादी आज भी भारत में अनिवार्य मानी जाती है.

अगर कोई इस प्रवाह से विपरीत जाने का इरादा करता है तो इतिहास गवाह है, उन्हें बहुत प्रताड़ित होना पडा है.

आप कहेंगे कि शादी तो जरुरी है, यह लडू सभी लड़कियों ने खाना चाहिए. अन्यथा समाज में वह अकेली महिला खुशी से अपना जीवन व्यतीत नहीं कर सकती.

सवाल यह उठता है कि शादी कितनी जरुरी है?

क्यों नहीं अविवाहित महिला अकेले ख़ुशी से रह सकती है?

समाज अपने ही बेटी बहन को जीने का हक़ और कुछ कर दिखाने का हौसला क्यों नहीं देता. महिलाओं को २१वी सदी में भी उसका हक़ पूरी तरह से नहीं मिला है. शादी और प्रोपर्टी खरीदने के महत्वपूर्ण निर्णय लेने में महिला अभी तक पिछड़ी हुई है.

इसका कारन केवल महिलाओं की सुरक्षा, सामाजिक स्थान के साथ वंश बढाना होता है. इस ढांचे से बाहर जो भी लड़की निकली है, उसे केवल प्रताड़ित होना पड़ा है. रुतबा से प्रताड़ना और सराहना का स्तर में कम ज्यादा बढोतरी नज़र आती है.

नीना गुप्ता सबसे बेहतरीन उदाहरण है.

नीना गुप्ता ’90 के दशक में दुस्साहस का पर्याय बनकर उभरीं. यह वो समय था जब लड़कियां ऐसा सोचने का कतई भी साहस नहीं करती थी. हलांकि उनकी राय व्यवहारिक जिंदगी से बिल्कुल उलट है. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘शादी से पहले बच्चा नहीं होना चाहिए.’ जबकि उनकी बेटी मसाबा उनकी और विवियन रिचड्र्स के प्यार की निशानी है. जो दर्द नीना गुप्ता ने सहा, उसे देखते हुए वो नहीं चाहती की अन्य लड़कियां भी वही यातनाये सहे. वह कहती हैं कि हमारे यहां सिंगल मदर बनना बहुत बड़ी चुनौती है. किसी भी आम महिला के लिए यह आसान नहीं है.

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सुष्मिता सेन बदलते वक़्त का उदाहरण

हमारा कानून हमें इस बात की इजाजत देता है कि कोई भी अनाथ आश्रम से बच्चा गोद ले सकता है. शायद यही कारण है कि सुष्मिता सेन बिना शादी किये दो-दो बेटियों की मां बन चुकी हैं. उनकी बेटियों की परवरिश भी शानदार ढंग से हो रही है.

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यह उदाहरण आम महिलाओं के नहीं है, बावजूद इसके शायद ही कोई आम और खास भारतीय महिला ऐसा सोचने का दुत्साहस् करती हो. दरसल, शादी करनी चाहिए. शादी जीवन का अंतिम पड़ाव तो नहीं है. लेकिन शादी एक नए सफ़र की शुरुवात है, जिसमें दो परिवार मिलकर अपने बच्चों की ख़ुशी में शामिल होकर उन्हें आशीर्वाद देते है.

कटरीना कैफ यही सलाह आज की महिलाओं को देती नज़र आती है.

भले ही महानगरों में महिला अकेले रहने का साहस दिखा रही हो. लेकिन आज का ही दौर है, जहा मेट्रो शहरों से कुछी दुरी पर महिला ८ बजे के बाद घरों से बाहर निकलती तक नहीं है. मेट्रो शहरों में अकेली लड़की को रेंट पर घर लेने में जितनी दिक्कत आती है, उतनी ही दिक्कत गाँव के महिलाओं को दिन में घर से अकेले जाने में आती है.

इसलिए, शादी ऐसे इंसान से करना चाहिए जो केवल आपको सहारा नहीं प्यार और इज्जत दे सके.

जो आपके विचारों का सम्मान करता हो और जीवन में आगे बढने का प्रोत्साहन दे. आप में एक विश्वास पैदा कर सके.

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