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जब अकेले में दिल का दौरा पड़े तब घबराये नहीं – बस इतना कीजिये !

अकेले में दिल का दौरा

दिल का दौरा एक जानलेवी बीमारी है, जिसमें मरीज को अपनी जान बचाने के लिए बहुत ही कम समय मिलता है.

इस दौरान जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है.

दिल का दौरा जगह और समय देखकर नहीं आता है. ये बिन बुलाए मेहमान की तरह होता है जो अचानक आता है और पलभर में सबकुछ तबाह करके चला जाता है.

हार्ट अटैक तब भी आ सकता है जब मरीज घर पर बिल्कुल अकेला हो और उसके आसपास मदद करने वाला कोई भी न हो. ऐसे में अगर मरीज ने धैर्य से काम नहीं लिया तो उसकी जान भी जा सकती है.

जब अकेले में दिल का दौरा पड़ जाए तब मरीज को क्या करना चाहिए. चलिए हम आपको बताते हैं.

heart-attack

दिल का दौरा पड़े तब —

1 – जमीन पर सीधे होकर लेट जाएं

हार्ट अटैक आने पर अगर आप कुछ नहीं कर पा रहे हैं तो जमीन पर सीधे होकर लेट जाएं और ज्यादा हिले नहीं. जमीन पर लेटने के बाद अपने पैरों को कुछ ऊंचाई पर रखें. ताकि इससे पैरों के ब्लड की सप्लाई हार्ट की ओर होने लगे और आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल हो सके.

2 – अपने कपड़ों को ढीला कर दें

हार्ट अटैक आने पर मरीज को बहुत ज्यादा बैचेनी महसूस होने लगती है. इसलिए ऐसे में मरीज को अपने कपड़ों को तुरंत थोड़ा ढीला कर लेना चाहिए. इससे बैचेनी कम होती है.

3 – धीरे-धीरे और लंबी सांस लें

अकेले में दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को धीरे-धीरे और लंबी सांस लेनी चाहिए. ऐसा करने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलता है.

4 – दवा के अलावा कुछ न खाएं

दिल के मरीज इस बात का हमेशा ख्याल रखें कि दौरा पड़ने पर दवाई के अलावा कुछ और खाना महंगा पड़ सकता है. इसलिए दवाई के अलावा कुछ और न खाएं. एस्प्रिन या डिस्प्रिन की गोली ही खाएं. यह दवा ब्लड क्लॉट रोकती है.

5 – एक तरफ मुड़कर उल्टी करें

अकेले में दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को उल्टी जैसा महसूस होता है. ऐसे में मरीज को एक तरफ मुड़कर उल्टी करना चाहिए. ताकि उल्टी लंग्स में न भरने पाए और मरीज को कोई नुकसान न हो.

6 – खाने-पीने की गलती न करें

दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को कुछ भी खाने पीने की गलती नहीं करनी चाहिए. इससे हालत और गंभीर हो सकती है. इसलिए दौरा पड़ने पर पानी या कोई भी ड्रिंक पीने की गलती न करें.

7 – डॉक्टर या पड़ोसी को फोन करें

अकेले में दिल का दौरा पड़ने पर वैसे तो मरीज को जल्द से जल्द डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए. लेकिन अगर ये मुमकिन नहीं हो सकता है तो अपने पड़ोसी या फिर परिचित को फोन लगाकर अपनी हालत के बारे में बताएं. इसके अलावा अपने डॉक्टर के नंबर को हमेशा कॉन्टैक्ट लिस्ट में सबसे ऊपर रखें ताकि इमरजेंसी में आपको नंबर ढूंढना न पड़े.

गौरतलब है कि अकेले में दिल का दौरा पड़ने पर वैसे तो मरीज को जितनी जल्दी डॉक्टरी सहायता मिल जाए उसके लिए उतना ही अच्छा होता है लेकिन जब मरीज अकेला है और ऐसे में उसे हार्ट अटैक आ जाए तो इस हालत में थोड़ी सी समझदारी उसकी जान बचा सकती है.

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