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नमाज या अजान के बाद अगर मुसलमानों ने किया ये काम तो मिलेगी सजा !

चीन में मुसलमानों पर अत्याचार

चीन में मुसलमानों पर अत्याचार – चीन अपने यहां मुस्लिमों से इस कदर डरा हुआ है कि वह उनको नियंत्रण में करने के लिए तरह तरह हथकंडे अपना रहा है.

चीन में मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है. रोजाना उन पर नए-नए कानून लादे जा रहे हैं. ताकि वह भी बौद्धों की तरह चीन में अपना सिर न उठ सके.

मुस्लिम आबादी से डरा-सहमा चीन अब अपने यहां रहने मुस्लिमों को उनके इस्लामिक नाम रखने से रोक रहा है. उसने नियम बना दिया है कि कोई भी मुसलमान अपने बच्चों के नाम मोहम्मद ईशा या रसूल मोहम्मद जैसे अरबी नाम नहीं रखे.

अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

गौरतलब है कि मस्जिदों में नमाज पढ़ने, रोजा रखने, नई मस्जिदों का निर्माण करने, सार्वजनिक स्थानों पर नकाब पहनने और मनपसंद दाढ़ी रखने पर प्रतिबंध चीन ने अब मुसलमानों पर कुछ खास तरह के नाम रखने पर भी रोक लगा दी गई है.

नियम ना मानने वालो पर कड़ी कार्यवाही की जा रही है. यह खुलासा मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने किया है. संस्था के मुताबिक चीन के मुस्लिम बहुल शिनजियांग प्रांत में बच्चों के मनपसंद नाम जैसे सद्दाम, मदीना और जिहाद पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इन नामों वाले मुस्लिम बच्चों को शिनजियांग में नागरिकता नहीं दी जाएगी.

नागारिकता ना मिलने से इन बच्चों को स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाएं हासिल नहीं हो सकेंगी. शिनजियांग की प्रांतीय सरकार ने इसकी घोषणा करते हुए कहा है कि मोहम्मद, सद्दाम जैसे दर्जनभर मुस्लिम नामों से धार्मिक कट्टरवाद बढ़ रहा है इसलिए इस पर रोक लगाई जा रही है. इस तरह से चीन में मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है.

चीन में पिछले काफी समय से वहां के शिनजियांग प्रांत के मुसलमानों पर दमन चक्र चला रहा है. एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वी चीन के अनहुई प्रांत की राजधानी हेफई में जब एक मस्जिद बनायी जा रही थी तो गैर-स्थानीय नागरिकों ने उसका तीव्र विरोध किया. विरोध करने वालों ने एक रात मस्जिद बनाने के लिए नियत जमीन पर सूअर का कटा सिर गाड़ दिया.

मस्जिद के विरोध में दर्जनों लोगों ने झंडे और बैनर के साथ प्रदर्शन किया. उसके बाद एक स्थानीय मस्जिद के इमाम को धमकी भरा संदेश मिला जिसमें कहा गया था कि तुम्हारे परिवार में कोई मारा जाए तो हम तुम्हें ताबूत उपलब्ध कराएंगे. अगर एक से ज्यादा ताबूत की जरूरत होगी तो वो भी देंगे.

बताते चलें कि चीन धार्मिक कट्टरपंथ पर नियंत्रण रखने के लिए कई तरीके अपना रहा है. फरवरी 2015 में शिनजियांग में धार्मिक आजादी को दबाने की एक और कोशिश की. चीन ने शिनजियांग की सड़कों पर मौलवियों को जबरन डांस के लिए मजबूर किया. मौलवियों से यह शपथ भी दिलवाई गई कि वह बच्चों को किसी तरह की धार्मिक शिक्षा नहीं देंगे.

लेकिन सबसे हैरत की बात यह है कि चीन में मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है लेकिन दुनियाभर के मुसलमानों की चिंता करने वाला पाकिस्तान और अरब मुल्क चीन पर खामोश है.

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