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माँ तुझे सलाम- साल का एक दिन नहीं बल्कि हर दिन हो अपनी माँ के नाम !

मदर्स डे

मदर्स डे – जो अपनी कोख में अपनी संतान को नौ महीने तक पनाह देती है उस मां को सलाम.

जो अपनी संतान को दुनिया की हर बला से बचाकर उसे अच्छे संस्कारों से नवाजती है उस मां को सलाम.  जिसके आंचल में सारा आसमां और कदमों में सारा जहां समाया हुआ है उस मां को एक बार नहीं बल्कि बार-बार सलाम !

जी हां, सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया हर साल मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे का जश्न मनाती है. यह साल का वो खास दिन होता जब हर संतान अपने-अपने अंदाज में अपनी मां के प्रति प्यार और सम्मान जाहिर करती है.

लेकिन क्या मां के नाम साल का सिर्फ एक दिन ही काफी है?  जी नहीं, जो अपनी संतान के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देती है उस मां के नाम साल का हर दिन हर पल समर्पित है. लेकिन साल के इस एक दिन हर औलाद अपनी मां को इस बात का अहसास दिलाती है कि वो उसके लिए कितनी खास है.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि मदर्स डे मनाने की शुरूआत आखिर कब से हुई और इसका इतिहास क्या है. अगर आप इससे बेखबर हैं तो चलिए हम इस खास दिन की अहमियत से आपको रूबरू कराते हैं.

मदर्स डे से जुड़ी है अलग-अलग कहानी

दरअसल मदर्स डे का जश्न दुनिया के हर कोने में मनाया जाता है और अलग-अलग देशों में मदर्स डे से कई कहानियां जुड़ी हुई हैं.

– मदर्स डे मनाने की शुरूआत ग्राफटन वेस्ट वर्जिनिया में एना जॉर्विस द्वारा समस्त माताओं और उनके गौरवमयी मातृत्व के लिए विशेष रुप से पारिवारिक और उनके परस्पर संबंधों को सम्मान देने के लिए शुरू किया गया था.

कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि मां के प्रति सम्मान जाहिर करने यानी मां की पूजा का रिवाज पुराने ग्रीस से शुरू हुआ है. मान्यता है कि स्य्बेले ग्रीक देवताओं की मां थीं और उनके सम्मान में यह दिन मनाया जाता था.

एशिया माइनर के आस-पास और रोम में वसंत के करीब इदेस ऑफ मार्च यानी मां को सम्मान देने का पर्व मनाया जाता था. यहां यह पर्व 15 से 18 मार्च तक मनाया जाता था.

वहीं यूरोप और ब्रिटेन में मां के प्रति सम्मान दर्शाने को लेकर कई परंपराएं प्रचलित हैं. उसी के अंतर्गत एक खास रविवार को मातृत्व और माताओं को सम्मानित किया जाता था. जिसे मदरिंग संडे कहा जाता था.

मदरिंग संडे फेस्टिवल,लितुर्गिकल कैलेंडर का हिस्सा है. यह कैथलिक कैलेंडर में लेतारे संडे, लेंट में चौथे रविवार को वर्जिन मेरी और मदर चर्च को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है.

अमेरिका में सबसे पहले ‘मदर डे प्रोक्लामेशन’ जुलिया वॉर्ड होवे द्वारा मनाया गया था. होवे द्वारा सन 1870 में रचित ‘मदर डे प्रोक्लामेशन’ में अमेरिकन सिविल वॉर में हुई मारकाट संबंधी शांतिवादी प्रतिक्रिया लिखी गई थी.  जिसके अनुसार महिलाओं या माताओं को राजनीतिक स्तर पर अपने समाज को आकार देने का संपूर्ण दायित्व देने का जिक्र किया गया था.

सन 1912 में एना जॉर्विस ने ‘सेकेंड संडे इन मे फॉर मदर्स डे’ को ट्रेडमार्क बनाया और मदर डे इंटरनेशनल एसोसिएशन का गठन किया.  जिसके बाद गूगल पर मदर्स डे से संबंधित जानकारी ढूंढने पर दो प्राथमिक परिणाम सामने आते हैं एक तो लेंट में मदरिंग संडे यानी ब्रिटिश कैलेंडर का चौथा संडे और मई महीने का दूसरा संडे.

वैसे कुछ देशों में प्रचलित धर्मों की देवी के जन्मदिन या पुण्य दिवस को इस रुप में मनाया जाने लगा. जैसे कैथलिक देशों में वर्जिन मैरी डे और इस्लामिक देशों में पैगंबर मोहम्मद की बेटी फातिमा के जन्मदिन की तारीखों से इस दिन को बदल लिया गया.

वैसे कुछ देश 8 मार्च को मनाए जानेवाले वुमंस डे को ही मदर्स डे की तरह मनाते हैं. जबकि कुछ देशों में मदर्स डे काफी लोकप्रिय है. जैसे चीन में मदर्स डे के खास मौके पर उपहार के रुप में गुलनार के फूल सबसे ज्यादा बिकते हैं. यहां साल 1997 में इस दिन को गरीब माताओं की मदद के लिए निश्चित किया गया था.

  जापान में मदर्स डे शोवा अवधि के दौरान महारानी कोजुन यानी सम्राट अकिहितो की मां के जन्मदिन के रुप में मनाया जाता था. इस दिन बच्चे गुलनार और गुलाब के फूल उपहार के तौर पर अपनी मां को भेंट करते हैं.

– थाईलैंड में मदर्स डे यहां की रानी के जन्मदिन पर मनाया जाता है. जबकि भारत में इसे कस्तुरबा गांधी के सम्मान में मनाए जाने की परंपरा है.

गौरतलब है कि पूरी दुनिया में भले ही मदर्स डे मनाने के तरीके अलग-अलग हैं लेकिन भावना सबकी एक ही होती हैं और वो है अपनी मां के प्रति प्यार और सम्मान जाहिर करना. अगर आप भी अपनी मां को ये बताना चाहते हैं कि वो आपके लिए कितनी खास है तो फिर अपनी इस भावना का इजहार साल के एक दिन नहीं बल्कि हर रोज अपनी मां के सामने कीजिए.

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