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यहाँ बलशाली हनुमान सर के बल खड़े हैं! चमत्कारी मंदिर जहाँ हनुमान के पैर ऊपर और सर नीचे है !

Hanumanji Standing Upside Down

हनुमान जी के आपने कई अनोखे मंदिरों के बारें में आप सुन चुके होंगे.

कहीं पर हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा है तो कहीं पर हाथ में तलवार लिए हुए जीत का आशीर्वाद देते हैं. लेकिन हनुमान जी का एक मंदिर ऐसा भी है जहाँ हनुमान जी की प्रतिमा उल्टी है.

जी हाँ, उल्टी प्रतिमा. जिसमें हनुमान जी के पैर ऊपर हैं और उनका सर नीचे है. मंदिर की महिमा ऐसी है कि यहाँ देश के दूर-दूर से हनुमान जी के भक्त आशीर्वाद लेने आते हैं. विश्व का इकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ के भगवान सर के बल खड़े हुए हैं.

कहाँ है यह मंदिर?

यह मंदिर मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी कही जाने वाली इंदौर शहर से 25 किलोमीटर दूर उज्जैन रोड पर स्थित सांवेर नामक स्थान पर है. इस मंदिर में बजरंगबली की उल्टी प्रतिमा स्थापित है. यह प्रतिमा संभवतया हनुमान जी की विश्व में इकलौती उल्टी प्रतिमा है.

लेकिन इस प्रतिमा को देखकर हर व्यक्ति यही सोचता है कि यहाँ हनुमान जी सर से बल क्यों खड़े हुए हैं. क्या हनुमान जी को कोई कष्ट उठाना पड़ रहा है? तो इसके पीछे एक रोचक कहानी जुड़ी हुई है.

जब भगवान राम और लक्ष्मण को हनुमान जी ने बचाया था.

जब रावण से युद्ध चल रहा था तो रावण के मित्र पातालराज अहिरावण ने एक चाल चली थी. उसने वेश बदल कर स्वयं को राम की सेना में शामिल कर लिया. रात्रि में जब सभी सो रहे थे तब अहिरावण ने अपनी मायावी शक्ति से श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्छित कर उनका अपहरण कर लिया था. इस कहानी को आपने सुना ही होगा.

लेकिन जब हनुमान जी को कपोत-कपोती (कबूतर) के वार्तालाप से पता चलता है कि भगवान राम और लक्ष्मण जी को अहिरावण पाताल ले गया है, जहां उनकी बलि देने की तैयारी चल रही है.

तब हनुमान जी उन दोनों की खोज में पाताल लोक पहुंच जाते हैं और भगवान राम और लक्ष्मण सहित अहिरावण से युद्ध कर उसका नाश कर देते हैं. इस प्रकार श्री राम और लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा करते हैं और उन्हें पाताल से निकाल कर सुरक्षित बाहर ले आते हैं.

यही वह स्थान है जहाँ से पाताल के लिए गये थे हनुमान…

तो यह मंदिर वही स्थान बताया जाता है जहाँ से हनुमान जी पाताल की ओर गये थे. हनुमान जी का सर तब धरती के ओर था और पैर आसमान की तरफ. इसलिए मंदिर की प्रतिमा भी उसी रूप में है.

मंदिर की महिमा का वर्णन करते हुए पंडित जी बताते हैं कि यह मंदिर काफी साल पुराना है. सदियों पुराने मंदिर की महिमा आज भी बरकरार है.

अगर कोई सच्चे दिल से यहाँ आता है तो बड़े से बड़े दुःख दर्द भी खत्म हो जाते हैं.

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