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जब बुद्धि वामपंथी बन जाती है तो बेटी गुरमेहर बन जाती है.

गुरमेहर कौर

दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा के गुरमेहर कौर के ट्वीट को लेकर इन दिनों सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक खूब हंगामा हो रहा है.

लेकिन इस पूरे प्रकरण को देखकर लगता है कि गुरमेहर कौर कहीं न कहीं वामपंथी ब्रिगेड की साजिश का मोहरा मात्र है.

ऐसा प्रतीत होता है कि खुद को प्रगतिशीलता का लंबरदार बताने वाले इन लोगों ने बहुत ही सोची समझी रणनीति के तहत शहीद की बेटी का ब्रेन वाश करके उसको अपने फायदे के लिए उपयोग किया है.

क्योंकि ये सर्वविदित है कि जब बुद्धि वामपंथी बन जाती है तो फिर व्यक्ति चाहे कोई भी वह उसी प्रकार की बातें करता है जैसे गुरमेहर कौर ने की है.

इसमें सारा दोष तथाकथित वामपंथी बुद्धिजीवियों का जिन्होंने अपने देश के लिए जान न्योछावर करने वाले शहीद की बेटी गुरमेहर कौर का ब्रेनवाश कर उसको अपने पिता की भावनाओं के विपरीत छोर पर ला खड़ा किया है.

जो लोग गुरमेहर कौर को दोषी मानकर अपना क्रोध व्यक्त कर रहे हैं उन्हें समझना होगा कि गुरमेहर कौर क्रोध की नहीं दया व सहानुभूति की पात्र है. हमें समझना होगा कि जिस बेटी के पिता को दुष्ट पाकिस्तानी घूसपेठीयों ने कारगिल में मौत के घाट उतरा हो, वह पाकिस्तान को निर्दोष कैसे कहने लगी ?

क्योंकि वामपंथी धारा ने अपने थोथे विचारों से कुतर्कों की सारी सरहदे पार कर दी है. इन वामपंथियों ने कभी शहीद की बेटी को यह बताने की जहमत क्यों नहीं उठाई भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई तो शांति बस लेकर लाहौर गए थे वो तो अपने साथ टैंक और तोप लेकर नहीं गए थे.

अपनी इस मित्रता के बदले प्रधानमंत्री वाजपेई को क्या मिला. धोखा ना. धोखे से कारगिल में पाक आतंकी सेना को घुसा दिया था. भारत ने तो युद्ध नहीं थोपा था. भारत ने तो अपनी सीमा की रक्षा हेतु पाकिस्तानी दुष्टों को खदेड़ा था.

पाकिस्तानी दुष्ट सेना को खदेड़कर मारने वालों में गुरमेहर के पिता भी लेकिन वे अपने देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए. ऐसे में भला उनकी पाकिस्तान को निर्दोष कैसे कहा जा सकता है ?

इस बात का जवाब वामपंथी कभी गुरमेहर कौर को नहीं बताएंगे. अगर उनके उपर युद्ध थोपा जा रहा है तो उस स्थिति में हमें क्या करना चाहिए.

कश्मीर व भारत के अन्य हिस्सों में आतंकवादी पिछले कितने समय से कहर बरसा रहे हैं. निर्दोष लोगों, बच्चों तक पर बम से मार रहे हैं, गोली बरसातें रहे हैं. उसका वामपंथी कभी क्यों विरोध नहीं करते हैं.

दरअसल, कश्मीर को भारत से अलग देखना या देश के खिलाफ नारे लगाना हो ये इन वामपंथियों का फैशन बन गया है, जो जेएनयू से शुरू होकर डीयू में आ पहुंचा है.

इसलिए अब गुरमेहर कौर को समझना होगा क्या देश के हित में है और क्या अहित में. आज सारा विश्व जनता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को संरक्षण देने वाला मुल्क है. ऐसे में गुरमेहर की अपने शाहिद पिता के हत्यारे पाकिस्तान को निर्दोष कहकर शाहिद पिता व देश की रक्षार्थ शाहिद हुए सैकड़ों सैनिकों का अपमान नहीं करना चाहिए.

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