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ग्रीस के पास क्या हैं 4 विकल्प?

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युरोजोन के वित्त मंत्रियों की बैठक में ये निष्कर्ष निकाला गया कि ग्रीस के बेलआउट को दुबारा आगे नहीं बढाया जाएगा.

इससे पहले ग्रीस ने भी कह दिया था की वो अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से लिए गए कर्ज की क़िस्त चुकाने में असमर्थ हैं.

इस बीच ग्रीस सरकार ने कहा है की वो आखिरी समय तक यूरोजोन के अन्दर व्यवहारिक समाधान ढूँढने की कोशिश करती रहेगी और आर्थिक सहायता के लिए खर्च में कटौती और करों में बढ़ोतरी की शर्तों पर रविवार को फिर जनमत संग्रह कराया जाएगा.

खुद ग्रीस के प्रधानमंत्री एलेक्सिस तिस्प्रास ने आशंका जताई है की ग्रीस को यूरोजोन से बाहर किया जा सकता है.

ऐसे में ग्रीस के पास ये चार विकल्प बचते हैं.

  1. यूरोजोन के देश कर्ज भरें-

ग्रीस यूरोजोन के देशों, आईएमेएफ से बातचीत कर रहा है, बातचीत सफल रही तो ग्रीस यूरोजोन में बना रह सकता है. लेकिन ये इतना आसान नहीं होगा क्योंकि ग्रीस को अगर यूरोजोन में बनाए रखना होगा तो उसके हिस्से का कर्ज भी यूरोज़ोन के देशों को ही भरना होगा, जिसके लिए उन्हें अपनी-अपनी संसदों से मंजूरी चाहिए होगी.

  1. खर्च में कटौती और करों में बढ़ोतरी-

दुसरे विकल्प के तौर पर ग्रीस में जनमत संग्रह होनी है. रविवार को जनता से जनमत संग्रह में पूछा जाएगा की ग्रीस खर्च में कटौती और करों में बढ़ोतरी करे या नहीं. यहाँ भी एक समस्या है.खुद सत्ताधारी वामपंथी पार्टी लोगों को “ना” पर वोट करने की अपील कर रही है. और अगर जनमत संग्रह का जवाब “हाँ” में होता है तो ये भी सम्भावना ही की प्रधानमंत्री एलेक्सिस तिस्प्रास अपना इस्तीफा दे देंगे.

  1. डेक्रमा को अपनाना होगा-

अगर जनमत संग्रह का जवाब ना होता है तो ऐसी भी सम्भावना है की ग्रीस यूरोजोन का हिस्सा ना रहे. जिससे ग्रीस को अपनी मुद्रा डेक्रमा अपनानी होगी. यूरो डेक्रमा के अदला बदली का अनुपात लगाना मुश्किल होगा. ऐसा हुआ तो ग्रीस में एक लम्बे समय तक आर्थिक अनिश्चिंतता बनी रहेगी.

  1. शर्तों के साथ यूरोज़ोन से बाहर निकलना-

एक विकल्प ये भी है की ग्रीस कुछ शर्तों के साथ यूरोज़ोन से बाहर निकल जाए. ये संकट कम जरूर करेगा पर ख़त्म नहीं करेगा. क्यूंकि तब भी लोगों को अपनी करेंसी बदलवानी होगी.

ग्रीस के पास इस वक़्त काफी कम विकल्प हैं. उसमे भी ऐसा कोई विकल्प नहीं दीखता जो उसकी परेशानी ख़त्म कर सके. हाँ संकट कम हो ऐसे विकल्प जरूर मौजूद हैं.

ग्रीस आज अपने ही किये की सजा भुगत रहा है. वो कहावत है न “जो जैसा करेगा वैसा भरेगा”.

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