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आखिर क्या था गोपाल गोडसे की उस किताब में जिसे कांग्रेस ने किया था बैन।

गोपाल गोडसे

गोपाल गोडसे – भारत को गांधीवाद की सोच देने वाले महात्मा गांधी जिनकी मृत्यु आज तक रहस्य बनी हुई है।

ऐसा रहस्य जिसमें गुनहगार गुनाह भी कबूला और फांसी की सजा भी मिली। लेकिन उसके बावजूद भी हत्या का असली मकसद कभी साफ नही हो पाया।  अखबार हिंदू राष्ट्र के संपादक नाथूराम गोडसे जो हमेशा से गांधी की सोच के कायल थे।

उन्होंने गांधी को अपने घर पर खाने का निमंत्रण  भी दिया था। उसी ने  गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी। और पुलिस के पास जाकर अपना गुनाह भी कबूला । ऐसा इंसान हत्यारा था हालातो ने उसे गुनहगार  बनाया।

गोपाल गोडसे

इस बात को आज तक कोई नहीं समझ पाया।नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे ने नाथूराम गोडसे को लेकर कई लेख और किताबें लिखी। जिनमे से कई लेख और किताबों को कांग्रेस ने बैन कर दिया । उन्ही मे से एक किताब ऐसी भी थी। जिसमे गोपाल गोडसे ने नाथूराम गोडसे के गांधी को लिखे सभी पत्र को संजोया था। नाथूराम गोडसे का  आखिरी पत्र जो उसने गांधी को आखिरी बार लिखा था। उसका भी गोपाल गोडसे ने उस किताब में जिक्र किया था। गोपाल ने अपनी किताब ‘गांधी वध क्यों’ में नाथूराम गोडसे की गांधी की हत्या के 130 कारणों की व्याख्या की थी। जो वजह नाथूराम गोडसे ने कोर्ट को बताई थी ।कुछ तथ्यों के अनुसार नाथूराम गोडसे भारत -पाकिस्तान विभाजन से बहुत न खुश थे ।

गोपाल गोडसे की  किताब में लिखा है कि नाथूराम  ने विभाजन को लेकर कहा, “जब कांग्रेस के दिग्गज नेता, गांधी की सहमति से देश के बंटवारे का फ़ैसला कर रहे थे, उस देश का जिसे हम पूजते रहे हैं, मैं भीषण ग़ुस्से से भर रहा था. व्यक्तिगत तौर पर किसी के प्रति मेरी कोई दुर्भावना नहीं है लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि मैं मौजूदा सरकार का सम्मान नहीं करता, क्योंकि उनकी नीतियां मुस्लिमों के पक्ष में थीं ।लेकिन उसी वक्त मैं ये साफ देख रहा हूं कि ये नीतियां केवल गांधी की मौजूदगी के चलते थीं। “

नाथराम गोडसे आरएसएस के साथ मिलकर हिंदूत्व का प्रचार कर रहे थे । शायद इसलिए उन्हें गांधी का मुसलमानों के लिए अनशन करना नही भाया। गोडसे ने कहा था – अगर मैं उसदिन गांधी की हत्या न करता तो दूसरा विभाजन पक्का था। गोडसे के अनुसार पाकिस्तान का माना था कि पूर्वी पाकिस्तान से पश्चिमी पाकिस्तान (बांग्लादेश) जाने में बहुत वक्त लगता है और हर कोई जहाज का खर्चा नहीं उठा सकता । इसलिए पाकिस्तान से दिल्ली होते हुए पश्चिमी पाकिस्तान तक एक कॉरिडोर तैयार किया जाए ।जिसके किनारे सिर्फ मुसलमानों की बस्तियां होंगी।

गोपाल गोडसे की किताब में नाथूराम गोडसे और महात्मा के सबसे छोटे बेटे देवदास की मुलाकात का जिक्र है। जिसमें कहा गया है कि  जब देवदास नाथूराम गोडसे से मिलने आए तो वो हैरान थे क्योंकि वो किसी क्रूर हत्यारे की तस्वीर मन में सोचकर आए थे लेकिन नाथूराम गोडसे तो बुहुत सौम्य और सहज थे।लेकिन गोडसे ने जो देवदास को कहा वो चौकाने वाला था।

देवदास के हत्या कारण पूछे जाने पर नाथूराम गोडसे ने कहा -“मैने उनकी हत्या केवल राजनीतिक कारणों से की है।”  नाथूराम गोडसे इसे पहले की पूरी बात बता पाते मिलने का वक्त खत्म हो गया। गांधी के बङे बेटे रामदास गांधी ने भी नाथूराम गोडसे से वजह जाने के लिए  पंडित जवाहरलाल नेहरू से अपील की लेकिन ये अपील खारिज कर दी गई । उस वक्त की सरकार ने ये फैसला क्यों लिया ये कहना तो मुश्किल है लेकिन इसने इस मामले को एक रहस्य जरुर बना दिया। जिसे सबने अपने – अपने हिसाब से समझा।

लेकिन गोपाल गोडसे ने नाथूराम गोडसे की संपत्ति का जिक्र करते हुए लिखा था । कि गोडसे की आखिरी इच्छा था कि उनकी हस्तियों को उसदिन सिंधु नदी में बहाया जाए जब सिंधु नदी दोबारा से भारत के तिरंगे झण्डे के नीचे बहने लगे। जिस वजह से उनकी हस्तियों को आज तक संभाल कर रखा गया है।

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