धर्म और भाग्य

जब जीत के लिए अंग्रेज़ों ने इस मंदिर में की थी पूजा

अंग्रेजो ने की थी पूजा – कई सालों तक हमारा देश अंग्रेजों का गुलाम रहा.

सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के कई देश अंग्रेजों की गुलामी में रह चुके हैं. आज भी इसी कारण कई देशों में अंग्रेजों की नस्ल देखी जा सकती है. अंग्रेजों की गुलामी की ज़ंजीर ने कई देशों को तबाह कर दिया, लेकिन भारत उन अंग्रेजों को अपने देश से निकाल बाहर फेंका.

जो अंग्रेज़ खुद को बहुत शक्तिशाली मानते थे वही प्रथम विश्व के दौरान भारत के एक मंदिर में पूजा कराने के लिए झुक गए थे.

अंग्रेजो ने की थी पूजा – तब अंग्रेजों को अपनी जीत के लिए बहुत ज़रूरी था कि वो उस मंदिर में अपना सर झुकाएं. मत्था टेकें ताकि उनकी सेना विजय प्राप्त कर सके. अगर आप जानेंगे कि भारत का वो कौन सा मंदिर था जिसमें अंग्रेजों ने पूजा की थी तो आप गर्व से फूले नहीं समाएँगे.

अंग्रेजो ने की थी पूजा –

उस मंदिर का नाम है स्वर्ण मंदिर.

सिर्फ सिखों ही नहीं बल्कि समूचे भारत में धर्म और आस्था का प्रतीक है स्वर्ण मंदिर. स्वर्ण मंदिर धर्म और आस्था का प्रतीक है. प्रतिवर्ष यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु जाते हैं और अपना मत्था टेकते हैं. हालांकि, धर्मस्थली स्वर्ण मंदिर जुड़ी कुछ बातें ऐसी हैं, जिनसे शायद आप अनजान हो सकते हैं.

इस गुरुद्वारे में सिर्फ सिक्ख ही नहीं बल्कि हर धर्म के लोग शीश नवाते हैं. इससे लोगों को अपार शक्ति मिलती है.

स्वर्ण मंदिर से जुड़े कुछ तथ्य आप भी जानें.

हरमिंदर साहिब  की  नींव सूफी संत साईं मियां मीर द्वारा रखी गई थी. शुरुआत से ही साईं मियां मीर का झुकाव सिख धर्म की ओर था. 19वीं शताब्दी में अफगान हमलावरों ने स्वर्ण मंदिर को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था. लगभग दो शताब्दी के बाद महाराजा रंजीत सिंह ने दोबारा मंदिर का निर्माण कर उसपर सोने की परत चढ़वाई थीं.

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजो ने की थी पूजा – ब्रिटिश सरकार ने जीत के लिए मंदिर में करवाया था अखंड पाठ. उस समय ब्रिटिश को लगता था कि यही एक मात्र उपाय है जिससे वो इस युद्ध में जीत सकते हैं.

स्वर्ण मंदिर में प्रवेश के लिए चार द्वार बने हुए हैं, जो इस बात का प्रतीक हैं कि किसी भी समुदाय और धर्म का व्यक्ति गुरु के द्वार में आ सकता है.

शायद इसी वजह से अंग्रेजों ने भी अपने फ़रियाद यहाँ की. उन्हें मालूम था कि उनके लिए यह एक बेहतर उपाय है.  मंदिर में हर रोज हजारों लोगों के लिए लंगर बनाया जाता है.

यहां लगभग 10 हजार लोग हर रोज लंगर में प्रसाद खाते हैं. 1983 में ऑपरेशन ब्लूस्टार के दौरान स्वर्ण मंदिर काफी चर्चा में रहा था. मंदिर पर अलगाववादियों ने कब्जा कर रखा था.  स्वर्ण मंदिर में हर दिन कई हज़ार लोग जाते हैं.

यहाँ सिर्फ सिक्ख समुदाय के लोग नहीं बल्कि दुनिया के हर समुदाय के लोग जाते हैं.

इस तरह जीत के लिए अंग्रेजो ने की थी पूजा – इस मंदिर को सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया में प्रमुख माना गया है. स्वर्ण मंदिर की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि एक हालिया रिपोर्ट में इस मंदिर को दुनिया का सबसे ज्यादा देखे जाने वाला धर्मिक स्थल घोषित किया गया है. अगर आप अभी तक स्वर्ण मंदिर नहीं देखे हैं तो ज़रूर जाएं.

Shweta Singh

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