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बीमार हुए भगवान अब नहीं देंगे दर्शन!

भगवान बीमार

इंसानों और जानवरों का बीमार पड़ना तो आम है, लेकिन क्या कभी आपने सुना है कि भगवान बीमार पड़ते हैं.

हैरान हो गए सुनकर! लेकिन हम सच कह रहे हैं इन दिनों पूरी के फेसम जगन्नाथ मंदिर में भगवान बीमार चल रहे हैं और फिलहाल वो भक्तों को दर्शन भी नहीं दे रहे. क्या है पूरा माजरा चलिए, बताते हैं.

दरअसल, हाल ही में पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ जी को स्नान कराया गया. जिसके बाद भगवान जगन्नाथ जी बीमार पड़ गए और अब वे 15 दिनों तक आराम करेंगे. ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ को स्नान कराया जाता है. जिसके बाद वे बीमार पड़ जाते हैं और 15 दिनों के लिए मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. इन दिनों उनकी सेवा की जाती है ताकि वे शीघ्र ठीक हो जाएं. भगवान के ठीक होने पर उस दिन जगन्नाथ यात्रा निकलती है.

दरअसल, ये एक मान्यता है जिसके तहत भगवान बीमार पड़ते हैं. भगवान भक्तों द्वारा करवाए स्नान के बाद आधी रात को बीमार होते हैं. इस दौरान भगवान जगन्नाथ जी को आयुर्वेदिक काढ़े का भोग लगाया जाता है. इंसानों की तरह ही उन्हें ठीक करने के लिए भी काढ़ा पिलाया जाता है. 15 दिनों तक मंदिर में कोई भी घंटे नहीं बजते और न ही अन्न का भोग लगता है. इस दौरान भगवान को सिर्फ आयुर्वेदिक काढ़ा और फलों का जूस दिया जाता है. जगन्नाथ धाम में भगवान की बीमारी की जांच के लिए प्रतिदिन वैद्य आते हैं.

दिन में दो बार आरती होती है लेकिन इससे पहले भगवान को काढ़े का भोग लगाया जाता है. इसके अतिरिक्त भगवान को प्रतिदिन शीतल लेप भी लगाया जाता है. भगवान जगन्नाथ को रात में सोने से पहले मीठा दूध भी चढ़ाया जाता है.

भगवान जगन्नाथ 13 जुलाई को पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे और मंदिरों के कपाट खोल दिए जाएंगे. भगवान को विशेष भोग प्रसाद चढ़ाया जाएगा. भगवान स्वस्थ होने के बाद 14 जुलाई जून को अपने श्रद्घालुओं को दर्शन देने मंदिर से निकलेंगे. इसके लिए भगवान की गुंडिचा यात्रा निकाली जाएगी. वे अपनी बहन सुभद्रा व भाई बलभद्र के साथ अपने भक्तों को दर्शन देते हुए मौसी मां के घर जाएंगे. वहां वे 9 दिन रहेंगे. मौसी मां के घर उनके मनोरंजन के साथ ही विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. फिर भगवान रुठी हुई माता लक्ष्मी को मनाते हुए अपने घर वापसी करेंगे. मंदिर में उन्हें विधिपूर्वक स्थापित किया जाएगा. इसके बाद फिर से भगवान का दरबार भक्तों के लिए खुल जाएगा. भगवान मंदिर से साल में सिर्फ एक बार बाहर निकलते हैं.

पूरी की रथ यात्रा पूरी दुनिया में मशहूर है और उस दिन लाखों की संख्या में भीड़ जुटती है. भारत की इसी सांस्कृतिक विविधता के तो विदेशी कायल है. हर त्योहार और पर्व हर्षो उल्लास से मनाया जाता है और अलग-अलग संस्कृतियों में गजब की एकता दिखती है.

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