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मुमताज़ महल का शरीर दफ़न है ताजमहल में – आत्मा भटकती है कहीं और – जानिए बेगम के भूत की कहानी!

मुमताज़ महल

ताजमहल, शाहजहाँ और मुमताज़ के प्यार की निशानी है.

दुनिया के 7 अजूबों में से एक है ताजमहल.

मुमताज़ महल और शाहजहाँ की मौत के सैंकड़ों सालों बाद भी ताज इन दोनों की मोहब्बत की कहानी बयां कर रहा है.

लेकिन क्या आप जानते है जिस मुमताज़ में शाहजहाँ की जान थी उस मुमताज़ महल की आत्मा आज भी कहीं तड़प रही है.

Taj_Mahal

शाहजहाँ अपनी बेगम मुमताज़ महल से बेइंतेहा मुहब्बत करता था. गर्भवती होने पर मुमताज़ बुरहानपुर के महल में थी. बच्चे को जन्म देते समय ही मुमताज़ महल की मौत हो गयी.

मुमताज़ की मौत से शाहजहाँ टूट सा गया.

मरने के बाद शाहजहाँ ने मुमताज़ के शरीर को बुरहानपुर में ही कब्र बनाकर दफ़न कर दिया.

अपनी प्यारी बेगम के प्यार को अमर करने के लिए शाहजहाँ ने ताजमहल बनाने का फैसला किया. पहले ताज महल को बुरहानपुर में ही बनाया जाने वाला था.

कुछ कारणों से ताजमहल का निर्माण बुरहानपुर की जगह आगरा में बनाया गया. ताजमहल का निर्माण कार्य करीब 20 वर्षों तक चला. इन 20 वर्षों तक बेगम मुमताज़ महल का शरीर बुरहानपुर में ही दफ़न रहा था.

Mumtaz Tomb

ताजमहल के बनने के बाद मुमताज़ महल के मृत शरीर को आगरा लाकर ताजमहल में एक खूबसूरत मकबरा बनाकर दफना दिया गया.

लेकिन प्यार की निशानी ताजमहल में बेगम मुमताज़ महल का शरीर ही आया . उनकी रूह तो बुरहानपुर में ही रह गयी थी.

बच्चे को जन्म देते समय मुमताज़ की मौत हुयी थी.

कहा जाता है कि मौत के बाद भी मुमताज़ की रूह अपने संतान मोह की वजह से बुरहानपुर में ही भटकती रही थी.

यहाँ तक की उनके शरीर को बुरहानपुर से हटाकर आगरा में दफन करने के बाद भी माँ की रूह उसी महल में रह गयी जहाँ उसकी पुत्री  का जन्म हुआ था.

आज भी मध्यप्रदेश के बरहामपुर में मुमताज़ का महल है, यहाँ के स्थानीय लोगों की माने तो इस महल से आज भी अजीबोगरीब तरह की आवाजें आती रहती है. रात के समय इस महल में जाने से लोग कतराते है.

Shajahan_mumtaz

बुजुर्ग लोग बताते है की सदियों से मुमताज़ महल की रूह इस महल में भटक रही है लेकिन इस रूह ने आज तक किसी को भी परेशान नहीं किया है.

अब इस कहानी में कितनी सच्चाई है और कितनी कल्पना ये तो वहां जाकर ही पता चलेगा. वैसे यदि मुमताज़ की आत्मा आज भी मुमताज़ महल के खंडहरों में भटकती है और किसी को नुक्सान नहीं पहुंचाती तो ये बात अच्छी है.

शायद आज भी एक माँ की रूह को अपनी संतान का मोह आज़ाद नहीं होने दे रहा है.

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