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इस डॉन ने सड़क पर ही कर दी थी दाउद की पिटाई

करीम लाला

दाउद की पिटाई – आज की डेमोक्रेटिक कहलाने वाली दुनिया कई बड़े डॉन से भरी हुई है.

एक समय था जब ये डॉन सड़कों पर अपनी छोटी-मोटी लड़ाईयो के लिए मशहूर थे और आज देखिए वही गली के गुंडे बदमाश आज बड़े-बड़े शहरों को धमकाए घूमते हैं.

डॉन एक ऐसा शब्द है जो किसी के भी नाम के आगे लग जाए तो वो व्यक्ति अपने आप ही बेहद ताकतवर इंसान बन जाता है. डॉन दो तरह के होते हैं एक जो अमीरों से लेकर गरीबों में बाटते हैं और दूसरे वो जो खून खराबे में यकीन करते हैं. इनकी ना कोई जाति होती है और ना ही कोई धर्म, वो केवल मार पीट कर पैसा वसूली करना जानते हैं.

डेमोक्रेसी का डॉन-गिरी पर काफी असर पड़ा है. आजकल कानून बेहद मजबूत हो चुके हैं और अब डॉन शब्द का उतना खौफ लोगों के बीच नहीं रहा है. लेकिन आज भी एक ऐसा नाम भारत में मौजूद है जिसे सुनकर लोग अब भी घबरा जाते हैं.

ये डॉन आज भी जिंदा है और इसे कई मुल्‍कों की पुलिस ढूंढ रही है. इस डॉन का नाम है दाउद इब्राहिम. इस नाम को सुनते ही लोगों के कान खड़े हो जाते हैं.

लेकिन आज हम आपको एक ऐसे डॉन के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका नाम सुनकर आज भी दाउद इब्राहिम सहम जाता होगा. ये डॉन भी उसी मुंबई शहर का था और इसी शहर में उसने एक समय पर दाउद को बीच सड़क घसीट-घसीट कर मारा था.

मुंबई के इस डॉन का नाम लेते ही दाउद कांप उठता होगा और इस डॉन के नाम के जिक्र से परहेज़ करता होगा. ये डॉन मुंबई का सबसे पहला डॉन था जिसने पूरे मुंबई शहर पर राज किया थाऔर इस डॉन का नाम आजतक देश के सबसे ताकतवर डॉन की लिस्ट से कोई नहीं मिटा पाया है. आपको बता देंकि दाउद को बनाने वाले हाजी मस्तान मिर्जा भी इस डॉन के आगे सिर झुकाते थे.

करीम लाला

इस डॉन का नाम है अब्दुल करीम शेर खान जिसे अंडरवर्ल्ड की दुनिया में करीम लाला के नाम से जाना जाता था.

करीम लाला को गरीबों का रॉबिन हुड भी कहा जाता था, क्योंकि ये गरीबों के लिए एक मसीहा जैसा था. 1911 में अफ्गानिस्तान में जन्मा करीम लाला 21 साल की उम्र में हीरो की तस्करी करने के लिए मुंबई आ पहुंचा था.

करीम लाला

कहा जाता है कि हीरों की तस्करी करते हुए करीम लाला इतना आगे बढ़ गया था कि उसे मुंबई का किंग कहा जाने लगा था. उस समय पूरे भारतीय अंडरवर्ल्ड में और कोई डॉन नहींथा लेकिन तभी दाउद इब्राहिम कासकर और शब्बीर इब्राहिम कासकर ने इस धंधे की ओर रुख किया.

इसके बाद करीम लाला और इब्राहिम दोनों की दुश्मनी शुरु हो गई जिसके बाद लाला ने 1981 में दाउद के भाई की हत्या कर दी और बदले में दाउद ने लाला के भाई को मार डाला. जिसके बाद पूरे मुंबई शहर में खून खराबा शुरु हो गया और जैसे ही दाउद इब्राहिम एक दिन लाला के हाथ लगा उसने दाउद को बीच सड़क खूब पीटा. उसने दाउद को इतना मारा कि उसके शरीर से खून तक निकलने लगा था.

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