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90 के दशक की फ़ैमिली और आज की फ़ैमिली: कुछ फ़र्क है क्या?

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90 का दशक सुन के कई लोगों को लगता होगा की अरे अभी कल ही की तो बात है पर नहीं, कम से कम 20 साल हो चुके हैं!

वक़्त बदल चुका है, ज़माना बदल गया है और आज एक नए हिंदुस्तान में रहते हैं हम!

वैसे तो भारत का इतिहास 5000 साल पुराना है और जहाँ तक परिवार की, फ़ैमिली की बात आती है कुछ ख़ास नहीं बदला था 90 के दिनों तक|

लेकिन पिछले 20 सालों में इतना कुछ बदला है कि देख के हैरानी होती है!

आईये देखें 90 के दशक की फ़ैमिली और आज की फ़ैमिली में !

1) आप में से जो उन दिनों में बच्चे थे, याद होगा कि रात को सब एक साथ बैठकर खाना खाते थे| दादा-दादी से लेकर घर के सबसे छोटे सदस्य तक के लिए डाइनिंग टेबल पर जगह बनायी जाती थी| लेकिन अब कौन क्या किस वक़्त खाता है, इसका पता लगाना बेहद मुश्किल है! हालांकि कोशिश होती है एक ही छत के नीचे रहने की लेकिन सबके अपने काम, अपनी अलग ज़िन्दगी है तो सिर्फ़ इतना पता होता है कि हाँ खा लिया!

2) वो दिन थे जब सलमान ख़ान की फ़िल्म आई थी, हम आपके हैं कौन और पूरी की पूरी जॉइंट फ़ैमिलीज़ एक साथ थिएटर में जाकर पिक्चर देखते हुए आंसू बहाती थीं! और आज के दौर में हम उन दिनों को याद करके हँसते हैं और सोचते हैं कि था क्या कभी ऐसा वक़्त? और जिन्होंने नहीं देखा, वो ये सोच रहे हैं कि सलमान अगली फ़िल्म प्रेम रतन धन पायो में कर क्या रहे हैं?

3) उन दिनों में सेल फ़ोन नए नए ही आये थे और हर किसी के पास होते भी नहीं थे| तो सुबह होती थी मम्मी के चिल्लाने से कि उठ जाओ और जब हम उठने नहीं थे तो ये पड़ती थी उनकी चप्पल! लेकिन उसके बाद प्यार भरा नाश्ता भी मिलता था! अब तो सबके पास स्मार्ट फ़ोन हैं और अब सुबह होती है एक रेकॉर्डेड आवाज़ सुनकर जिसका चेहरा भी किसी ने नहीं देखा! अनजान आवाज़ के अपनेपन से काम चलना पड़ता है!

4) स्कूल का कोई काम हो, कॉलेज का या घर का, सब कुछ घरवालों के साथ मिलकर हुआ करता था! आज के हालात ये हैं कि महीने में दो-चार बार एक दूसरे से उनका शेड्यूल पूछ कर मिला जाता है और कहीं साथ जाना हो तो हफ़्ते-दो हफ़्ते पहले बताना पड़ता है!

5) अगर दिल को राहत है तो सिर्फ़ इस बात की कि कम से कम इतना पता है कि कौन-कौन है हमारी फ़ैमिली में, वो क्या करते हैं और कहाँ रहते हैं, अगर साथ नहीं रहते तो! अभी तक इतने भी नहीं बदले कि पता ही ना चले कि कौन-सी दुनिया से आये हैं|

शायद इन बदलावों की ही वजह से लोग पुराने दिनों को मिस करते हैं और टीवी पर हम उन घिसे-पिटे सीरियल्स को देखते हैं जिनमें हमारे संस्कारों और संस्कृति के बारे में बताया जाता है, भले ही थोड़ा बढ़ा-चढ़ा कर!

और यही कारण है कि सलमान ख़ान एक बार फिर एक पारिवारिक फ़िल्म में आ रहे हैं!

पता नहीं चलेगी या नहीं, चलो कोशिश तो की!

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