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दीपावली पर केन्द्रित वो कथाएं जो अबतक रहीं अनसुनी

दीपावली पर केन्द्रित कथाएं

दीपावली पर केन्द्रित कथाएं – कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दीपों का त्योहार ‘दीपावली’ मनाया जाता है। जो हर्षोल्लास या रौशनी का प्रतीक है। दीपावली को दिवाली भी कहते हैं जो मुख्यत भगवान राम का अयोध्या लौट आने की खुशी में मनाया जा रहा है।

दीपावली पर केन्द्रित इस मुख्य कथा के साथ अन्य कथाएं भी हैं जो भिन्न समय में दीपावली की भाव के समानान्तर है लेकिन वे कथाएं, दीपावली की मुख्य कथा के समान प्रचलित नहीं रहीं। तो इस तरह दीपावली पर केन्द्रीत आपको सुनाते हैं अन्य कथाएं।

दीपावली पर केन्द्रित कथाएं – 

दीपावली पर आधारित मुख्य कथा-

दीपावली की मुख्य कथा में जब भगवान राम ने लंकाप्रजापति रावण का वध कर, सीता को बचाया था। और अपना चौदह वर्ष का कठिन वनवास पूरा कर अयोध्या लौट आए थे। तो उसके उल्लास में पूरे नगर में दीप जलाए गए थे। तदानुपरान्त दीपावली का त्योहार इस कथा के मध्य में प्रतिवर्ष मनाया जा रहा है।

दीपावली पर आधारित अन्य कथाएं-

यह मान्यता है कि जब भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी राजा नरकासुर का वध किया था। इसके उपरांत नगर में अपार हर्ष फैल गया और लोगों ने उस वक्त घी के दीये जलाए।

पौराणिक कथा के अनुसार विष्णु ने नरसिंह रुप अपनाकर हिरण्यकश्यप का वध किया था और इस दिन समुद्रमंथन के बाद देवी लक्ष्मी व भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए।

बौद्ध धर्म के अनुसार, 2500 वर्ष पूर्व गौतम बुद्ध के स्वागत में उनके प्रवर्तकों ने लाखों दीए जला कर दीपावली मनाई थी।

जैन के मान्यता के अनुसार, चौबीसवें तीर्थकर महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस दीपावली को ही हुआ था।

सिक्खों के छटे गुरु हरगोबिन्द सिंह को दीपावली के दिन कारागास से मुक्त किया गया था।

आयोध्या के भगवान राम के अतिरिक्त दीपावली पर्व को मनाए जाने के पीछे यह कथाएं भी अलग-अलग समय में घटित हुयी हैं। हालांकि भगवान राम की कथा उन सभी कथाओं में सर्वप्रथम सुनाई जाती रही है ।

ये है दीपावली पर केन्द्रित कथाएं.

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