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अगर आपके दिल में भी हैं भगवान के लिए शिकायतें तो खास आपके लिए है ये कहानी

भगवान के लिए शिकायतें

भगवान के लिए शिकायतें – भगवान को तो आप सभी मानते होंगे और उनके अस्तित्व पर विश्वास भी रखते होंगे।

इस संसार में हमे जीवन देने वाले भी भगवान ही हैं और वो ही हमारे कर्मों के हिसाब से हमे फल देते हैं और हम इस संसार को कब छोड़कर जाएंगे ये भी भगवान ही निर्धारित करते हैं।

भगवान के लिए शिकायतें

अपने जीवनकाल में हर मनुष्य सुख-दुख, प्रेम-पीड़ा, सुकून और कष्ट जैसे सभी भावों से गुज़रता है। अक्सर ऐसा होता है कि जब व्यक्ति सुख से अपना जीवन बिता रहा होता है, जब वो सभी प्रकार से समृध्द होता है तो भले ही वो ईश्वर को भूल जाए लेकिन जब ज़रा भी परेशानी आती है तो वो भगवान से शिकायत करना बिल्र्कुल नहीं भूलता।

आप भी अक्सर ऐसा करते होंगे और सिर्फ आप ही नहीं, ऐसे तमाम लोग हैं जिनके दिल में ये ख्याल आते है और जो अपने मन में भगवान के लिए ढ़ेरों शिकायतें रखते हैं।

जी हां, कईं लोग ऐसे होते हैं जो ज़िंदगी में ज़रा सी मुश्किल के आते ही आसमान की तरफ देखने लगते हैं। इस बात का भी ध्यान नहीं रखते कि इस मुश्किल वक्त से पहले उनकी ज़िदंगी कितनी आरामदेह थी।

भगवान के लिए शिकायतें

अगर आपको भी है भगवान के लिए शिकायतें और आप भी ऐसे ही लोगों में से हैं तो इस प्रेरक कथा को पढ़िए।

कृष्ण और सुदामा की मित्रता, उनके आपसी प्रेम से जुड़े कईं किस्से आपने पढ़े होंगे। इन दोनों का बचपन साथ ही बीता था और दोनों हर काम साथ ही किया करते थे। एक बार दोनों वन विहार के लिए गए और वहां भूख-प्यास से व्याकुल ये दोनों एक पेड़ के नीचे पहुंचे। इस वृक्ष पर एक ही फल लगा हुआ था जिसे कृष्ण ने तोड़ा और उसके पांच-छह टुकड़े किए। पहला टुकड़ा उन्होने सुदामा को दिया। सुदामा ने बड़े ही चाव से इस टुकड़े को खाया और कृष्ण से फल की प्रशंसा भी की। धीरे-धीरे सुदामा कृष्ण से सारे टुकड़े मांगकर खाते गए और जब आखिरी टुकड़ा बचा तो कृष्ण ने कहा , ”अब मै ये तुम्हे नहीं दूंगा, आखिर मै  भी कुछ खाउंगा”

भगवान के लिए शिकायतें

ये कहते हुए कृष्ण ने वो टुकड़ा अपने मुंह में रखा और तुरंत उसे थूक दिया क्योकि वो फल बहुत कड़वा था।

कृष्ण बोले, ‘तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए?

भगवान के लिए शिकायतें

उस सुदामा का उत्तर था, ‘जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले, एक कड़वे फल की शिकायत कैसे करूं?

जी हां, कुछ ऐसा ही भाव हमे भी अपने ह्दय में रखना चाहिए कि जिस परमपिता परमेश्वर ने हमे ज़िदंगी के इतने सुखद पड़ावों पर पहुंचाया, हमारे जीवन में इतने मीठे अध्याय जोड़े, उनसे हम थोड़ी सी परेशानी आने पर शिकायत कैसे कर सकते हैं ?

भगवान के लिए शिकायतें

इसके अलावा हमे इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए कि हम जिस स्थिति में हैं, उस स्थिति में आने के लिए भी हज़ारों लोग संघर्ष कर रहे हैं। इसलिए हमे संतुष्ट रहना चाहिए और जो हमारे पास है उसके लिए कृतज्ञ रहना चाहिए।

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