भारत

युवा भारत का बदलता चेहरा !

भारतीय युवा – हमारे देश में युवाओं को हमेशा से ही एक अस्त्र के रूप में, बाज़ार ने उपभोक्ता एवं समाज ने शक्ति के तौर पर परिभाषित कियाI

युवावस्था को समझा जाए तो इसमें बच्चों का अल्हड़पन, किशोरावस्था का उत्साह और वयस्क की प्रौढ़ता का सम्मिश्रण होता हैI 15-24 आयु वर्ग को संयुक्त राष्ट्र ने युवा वर्ग माना हैI इसी के तहत भारत में भी युवा वर्ग की आयु 13 से 35 वर्ष के बीच रखी गई हैI 2003 में राष्ट्रिय युवा नीति का भी निर्माण किया गया हैI बहरहाल आज देश की 1.21 अरब आबादी में युवाओं की संख्या तकरीबन 51 करोड़ पाई गई हैI

नए विचार, ऊर्जा, शक्ति एवं साहस यही सब तो मिलके युवा बनता हैI

फिर चाहे अन्याय को चुनौती देना हो या समाज व राष्ट्र में परिवर्तन इन सबको युवाओं के द्वारा ही साकार किया जा सकता हैI उसका यही साहस तथा निडर स्वभाव उसे व्यवस्था से लोहा लेने व परिवर्तन लाने को प्रेरित करता हैI देश की स्वतंत्रता के समय युवा चेतना एवं युवा राजनीति ही स्वतंत्रता संग्राम के मुख्य आधार थेI यही पीढ़ी थी जिसने 20वीं सदी में आदर्श, बलिदान एवं त्याग के सुनहेरे उदहारण दिखाएI इन सभी युवाओं के जीवन का एकमात्र उद्देश्य राष्ट्र प्रेम थाI इन्हें जाति, धर्म, संप्रदाय, भाषा के विचार छू भी नहीं पाते थेI वहीं, जैसे-जैसे शिक्षा और शैक्षिक मूल्यों में गिरावट आती गई वैसे ही युवा आंदोलनों का भी स्वरुप बदलता चला गया हैI

बिहार में 1974 में जयप्रकाश नारायण के यूथ फॉर डेमोक्रेसी के गठन ने युवा आंदोलन को एक नई दिशा दी थीI

1975 में हुए आपातकाल के दौरान राजनीति से जुड़े अनेक भारतीय युवा नेताओं को ज़बरदस्ती जेलों में डाल दिया गया थाI वहीं, 1980 तक राजनीतिक दलों के ध्रुवीकरण के कारण युवा राजनीति भी उसकी चपेट में आ गईI इसके साथ ही राजनीति पर परिवारवाद भी हावी होने लगाI जाति, धर्म से जुड़ी राजनीतिक घटनाओं, अनेक घोटालों, राजनीति में भ्रष्ट व आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों के प्रवेश ने भी युवा राजनीति को भ्रमित कर दियाI

व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ उठाते युवाओं को समाज विद्रोही, क्रांतिकारी या अपरिपक्व कहने से भी नहीं हिचकिचाताI समाज को समझना चाहिए कि जब युवाओं का सामाजिक संरचनाओं एवं सत्ता प्रतिष्ठानों से मोहभंग होता है तभी उसका आक्रोश मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ नज़र आता हैI वहीं, तकरीबन दो दशक पुरानी उदारीकरण की नीतियों ने देश के युवाओं को बेहतर अवसर प्रदान किए जिससे पहले जहाँ कारोबार शुरू करने की उम्र 40 मानी जाती थी वहीं अब ये घटकर 25 वर्ष पर पहुंच गई हैI

आज विश्व में सबसे युवा देश भारत को माना जाता हैI

परंतु संपूर्ण युवा जगत इस वक़्त संक्रमण से ग्रसित मालूम लगता हैI उसका सामाजीकरण तीन पीढ़ियों के इर्द-गिर्द हो रहा हैI पहली पीढ़ी जिसने गुलामी को झेलते हुए व आज़ादी को मिलते हुए देखा वहीं दूसरी और तीसरी पीढ़ी ने स्वतंत्रता के आदर्शों व मूल्यों को एवं राजनीतिक लोकतंत्र की परंपराओं को किताबों में पढ़ाI फिर इसी पीढ़ी को सैद्धान्तिक और व्यवहारिक जीवन में बहुत बड़ा अंतर दिखाई दियाI

भारतीय युवा धीरे-धीरे ही सही पर अपनी जड़ों की ओर लौटता हुआ दिख रहा हैI उसकी मनोदशा सामाजिक परंपराओं से टकराने की बजाय अब उनसे समझौता करने की अधिक हो गई है क्योंकि अब उसकी चिंताओं का सरोकार खुद का करियर और परिवार तक सीमित रह गया हैI

Devansh Tripathi

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