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कभी मांगता था भीख, लेकिन आज अपनी मेहनत के दम पर कर रहा है कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई!

जयवेल की कहानी

क्या आपने कभी सोचा है कि कोई भीख मांगने वाला व्यक्ति विदेश में जाकर पढ़ाई कर सकता है।

सोचने में ये बात आपको बड़ी ही अजीब लगी हो लेकिन ये सच है।

एक लड़के ने अपनी मेहनत के दम पर कैम्ब्रिज विश्वविध्यालय तक का सफर तय किया है।

जी हाँ ये कहानी एक ऐसे लड़के की है जिसने कभी चेन्नई की सड़कों पर भीख मांगने का काम किया था। लेकिन आज दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।

ये कहानी सुनने में आपको किसी फिल्म की स्टोरी जैसी लग रही हो, लेकिन ये सच है।

जयवेल की कहानी

इस कहानी के हीरो का नाम है जयवेल। ये है जयवेल की कहानी.  आंध्रप्रदेश के वेल्लोर में एक गरीब परिवार में जयवेल का जन्म हुआ था। लेकिन 80 के दशक में सुखा पड़ने की वजह से उनका परिवार रोजी-रोटी के लिए पलायन करके चेन्नई आ गया। चेन्नई में कोई सहारा नहीं मिलने की वजह से जयवेल को अपने पूरे परिवार के साथ भीख मांगना पड़ा।  जैसे-तैसे दो वक्त की रोटी मिल जाती थी और रात होती तो फुटपाथ को अपना बिस्तर समझकर सो जाया करते थे।

लेकिन एक दिन जयवेल की कहानी में एक मोड़ आया और जयवेल की जिंदगी बदल गई।

एक दिन भीख मांगने के दौरान जयवेल की मुलाकात उमा मुथुरमन नाम की एक सामाजिक कार्यकर्ता से हुई। उमा और उनके पति ‘सुयम’ नाम की एक सामाजिक संस्था चलाते है। एक बार वे दोनों भीख मांगने वाले बच्चों पर कुछ रिसर्च का काम कर रहे थे। तभी उनकी मुलाकात बच्चे जयवेल से हुई। जयवेल से मिलने के बाद उमा ने उसे पढ़ाने और आगे बढ़ाने का फैसला किया।

हालाँकि शुरू में जयवेल को पढ़ाई में बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन धीरे-धीरे जयवेल का पढ़ाई में मन लगने लगा और 12 वीं क्लास में उसने शानदार नंबर हासिल किये। 12 वीं क्लास में जबरदस्त सफलता के बाद कई दानदाताओं ने जयवेल की आगे की पढ़ाई के लिए उसकी मदद करने की पेशकश की। इसी दौरान जयवेल ने कैम्ब्रिज की एंट्रेंस परीक्षा में बाजी मार ली। दानदाताओं की मदद और लोन लेकर जयवेल आज कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर रहे है।

आज 22 वर्षीय जयवेल तीन साल का ‘परफॉरमेंस कार एन्हांसमेंट टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग’ का कोर्स कर रहे है।

जयवेल का कहना है कि जैसे ही मेरा कोर्स ख़त्म होगा सबसे पहले मैं लोन चुकाऊंगा और अपनी माँ के लिए एक घर बनाना चाहूँगा। इसके बाद में सुयम से जुड़कर अपना जीवन सड़कों पर रहने वाले बच्चों को समर्पित कर दूँगा क्योंकि मैं आज सब कुछ उनकी ही बदौलत हूँ।

ये है जयवेल की कहानी – आपको बता दें कि दुनिया में हर साल लाखों स्टूडेंट का सपना होता है कि वे कैम्ब्रिज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई करे।

तमाम संसाधनो के वाबजूद सिर्फ कुछ ही स्टूडेंट कैम्ब्रिज तक पहुँचने में सफल हो पाते है। ऐसी स्थिति में जयवेल जैसे लोग तमाम अभावों में जीने के बाद भी अपनी मेहनत के दम पर ऐसा कारनामा कर जाते है कि उनको सेल्यूट करने का मन करता है।

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