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ॐ, शिव और संसार की उत्पति का रहस्य ! शिव ही है एक आखिरी सत्य, वीडियो में देखिये कैसे शिव ने की है संसार की उत्पति

संसार की उत्पति का रहस्य

ॐ, शिव और संसार की उत्पति का रहस्य!

संसार की उत्पति कैसे हुई है, यह आज तक एक रहस्य समझा जाता है.

लेकिन विश्व के कुछ बड़े वैज्ञानिक ऐसे भी हैं जो अपनी थ्योरी से यह सिद्ध करना चाहते थे कि संसार की उत्पति में ॐ और शिव का सबसे बड़ा योगदान रहा है.

इसी क्रम में कार्ल सेगन जो एक बड़े वैज्ञानिक और खगोलशास्त्री रह चुके हैं उन्होंने इस रहस्य को सुलझाने का दावा किया था.

इनके अनुसार शिव एक शुद्ध ज्योति रूपी चेतना है. इसी ज्योति रूपी चेतना से संसार की उत्पति होती है और यहीं पर जाकर आत्मा का सफ़र खत्म हो जाता है. इसी शक्ति से ऊर्जा उत्पन्न होती है और उसी उर्जा से इलेक्ट्रान, प्रोटोन एवं न्यूट्रॉन की उत्पति होती है.

इसका मतलब ये हुआ कि संसार की उत्पति का रहस्य है – ॐ और शिव !

संसार में कई सबूत हैं कि शिव ही सत्य है

शिव ही सत्य है और कभी शिव ही पूरे संसार में पूजनीय थे. ऐसा कई जगह लिखा हुआ है. वैसे कहते तो यह भी हैं कि सनातन ही नहीं बल्कि हर धर्म का अंतिम लक्ष्य शिव से आत्मा का मिलन कराना है. बाकी बस लोगों को भ्रमित करने के लिए कुछ आखिरी रोशनी या प्रकाश पुंज को अलग-अलग नाम दिए गये हैं.

ॐ नमः शिवाय का अर्थ

ॐ नम: शिवाय का जब हम अर्थ खोजते हैं तो हम प्राप्त कर सकते हैं कि (अ +उ +म अर्थात आत्मा +परमात्मा +प्रकृति) नम: का तात्पर्य हुआ कि मन अर्थात इच्छाओं से दूर अर्थात अपनी आत्मा के निकट और शिवाय का तात्पर्य हुआ कि शिव तत्व अर्थात प्रेम अर्थात परमात्मा के  निकट.

तो सामान्य शब्दों में ॐ नमः शिवाय का अर्थ है कि मेरी आत्मा इस जड़ प्रकृति से दूर प्रेम और आनंद से परिपूर्ण मूल प्रकृति अर्थात परमात्मा के निकट आ जाये.

ॐ सबसे पहली ध्वनि थी

ऐसा बोला जाता है कि संसार की उत्पत्ति के समय जो सबसे पहली ध्वनि संसार में गूंजी थी वह ॐ की ही ध्वनि थी.

यजुर्वेद कहता है कि ॐ ही ब्रह्मा है. सिख धर्म कहता है कि एक ओंकार सतनाम, अर्थात मात्र ॐ स्वरुप ही परमात्मा है. बौद्ध, जैन और यहाँ तक कि यहूदी-इसाई धर्म में भी ॐ ही सबकुछ है. किन्तु यहाँ पर यह बताकर, इस लेख में किसी बहस को जन्म देना सही नहीं है. अपने आगामी लेख में इसकी चर्चा तथ्यों के साथ करेंगे.

तो शिव हैं क्या?

असल में सनातनी लोग भी शिव को पहचान नहीं पाए हैं. शिव वह नहीं है जो गले में सर्प लिए है या डमरू बजाता है. असल में शिव एक ऊर्जा है जो प्रकाश रूप में इस संसार को बनाये हुए है. आत्मा वहीँ से निकलती है और अगर उस आत्मा को मोक्ष मिलता है तो उसी में समा जाती है.

बाकि का पूरा सत्य आप इस वीडियो के माध्यम से जान सकते हैं जो यह बताने के लिए काफी है कि संसार का प्रथम और आखिरी सत्य शिव ही है.

वीडियो में वैज्ञानिक कार्ल सेगन संसार की उत्पति का रहस्य सिद्ध करते हुए आपको नजर आने वाले हैं.

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