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ज़िंदगी की जंग हार गए जन नेता अटल बिहारी वाजपेयी, 93 साल की उम्र में निधन

देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री और जन नेता अटल बिहारी वाजपेयी 93 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए.

वो पिछले 2 महीने से एम्स में भर्ती थे और आज सुबह से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी, जिसे देखते हुए सुबह से ही उन्हें मिलने के लिए नेताओं की लाइन लगी हुई थी.

जन नेता अटल बिहारी वाजपेयी के खुद के शब्दों में ‘मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं’. अटल जी बेहतरीन कवि भी थी.

वो आम लोगों के बीच कितने लोकप्रिय थे इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके भाषण सुनने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी. इतना ही नहीं देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने युवा अटल जी को देखकर कहा था कि ये एक दिन देश का प्रधानमंत्री ज़रूर बनेगा और उनकी कही बात बिल्कुल सच निकली.

अटल जी 3 बार देश के प्रधानमंत्री बने वो अपने 2 बार के कार्यकाल को तो पूरा नहीं कर पाए, मगर तीसरी बार 1999 में में पीएम बनने पर उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया. भारत रत्न से सम्मानित अटल जी लंबे समय से बीमार चल रहे थे और मीडिया से भी दूर थे.

जन नेता अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से देश की राजनीति के एक सुनहरे दौर का अंत हो गया है.

अटल जी की लोकप्रियता किसी पद पर उनके होने या न होने की मोहताज नहीं रही. उनकी स्वीकार्यता जितनी पार्टी के भीतर थी, उतना ही वे दूसरी पार्टियों में भी लोकप्रिय थे. यही वजह रही कि एम्स में उनकी भर्ती की खबर सुन सबसे पहले उनका हालचाल जानने पहुंचने वालों में पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी थे.

आज जब उनके निधन की खबर आई तो पूरा देश शोक में डूब गया.

जन नेता अटल बिहारी वाजपेयी ही वह शख्स थे जिन्होंने बीजेपी को शीर्ष पर पहुंचाया. उन्होंने एक बार कहा था ‘अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा’. उनकी कही बात बिल्कुल सच निकली आज केंद्र के साथ ही 20 राज्यों में बीजेपी की सरकार है और कांग्रेस को पछाड़कर बीजेपी देश की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है.

आज देश ने एक महान जननेता, कवि और शानदार इंसान को दिया.