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रितेश अग्रवाल : २१ साल की उम्र में ३६० करोड़ की कंपनी!! क्या यह अंतरिक्ष से आया है?

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होनहार बिरवान के होत चिकने पात!

यह कहावत तो आप सभी ने सुनी होगी, लेकिन इसका प्रमाण देखने को नहीं मिलता|

लेकिन हम लाये हैं आप के लिए एक ज़बरदस्त उदाहरण !

२१ साल की छोटी-सी उम्र में जब बाकी लड़के-लड़कियां प्यार मोहब्बत में व्यस्त होते हैं या पढ़ाई ख़त्म कर के रोज़गार के बारे में सोचने लगते हैं, ऐसी उम्र में रितेश अग्रवाल ने करोड़ों की कंपनी खड़ी करके सबको चकियाचौंध कर डाला है|

रह गए न आप भी हैरान?

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जी हाँ, यह खबर सुन के लगता है कि क्या सच में रितेश इसी धरती पर जन्मा है या किसी और ग्रह से आया है?

अगर रितेश की आज तक की ज़िन्दगी पर नज़र डालें तो एहसास होता है कि वो बचपन से ही इस अपूर्व सफलता की तैयारी में जुट गया था|
केवल ८ साल की उम्र में उसने कंप्यूटर प्रोग्राम लिखने शुरू कर दिए| १६ साल की उम्र में टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च (Tata Institute of Fundamental Research) ने रितेश को एशियन साइंस कैंप (Asian Science Camp) के लिए चुना| १७ का होते होते वह भारत के सबसे कम उम्र के सीईओ (CEO) की श्रेणी में अपना नाम लिखवा चुका था और उसकी कंपनी का नाम था वर्थ ग्रोथ पार्टनर्स| (Worth Growth Partners)!

असल में उसके व्यापर की शुरुआत हुई जब वह १३ वर्ष का था. कई शहरों में जाना पड़ता उसे और कभी रहने के लिए होटल अच्छे मिलते, कभी खराब| कभी सस्ते तो कभी बहुत महंगे| बस यहीं से उसे विचार आया कि क्यों न एक ऐसा मॉडल बनाया जाए ताकि लोगों को रहने के लिए सस्ते में अच्छा होटल मिल जाए|

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इसी आईडिया पर काम करते हुए उसने १८ की उम्र में ऑरवेल (Orwel) के नाम से कंपनी खोली जिसे वेंचर नर्सरी (Venture Nursery) की मदद से ३० लाख रुपये की मदद मिली| एक ही साल में उसने कंपनी में नए बदलाव कर उसका नाम रखा ओयो रूम्स (OYO Rooms)| कंपनी की कीमत लगी १४ करोड़ रुपये और उसे लाइटस्पीड वेंचर पार्टनर्स (Lightspeed Venture Partners) और डी स जी कंस्यूमर पार्टनर्स (DSG Consumer Partners), सिंगापुर की तरफ से ४ करोड़ रुपये मिले ताकि बिज़नेस का विस्तार किया जा सके| सिर्फ दस महीनों के बाद कंपनी का मूल्यांकन हुआ $६० मिलियन का और लाइटस्पीड वेंचर पार्टनर्स (Lightspeed Venture Partners) ने सेकोईआ कैपिटल (Seqouia Capital) के साथ मिल के रितेश की कंपनी में क़रीब ३६ करोड़ रुपये और निवेश किये!

और अब हाल ही में ओयो रूम्स (OYO Rooms) को फिर से फंडिंग प्राप्त हुई. ग्रीनओक्स कैपिटल (Greeoaks Capital), सेकोईआ कैपिटल (Sequoia Capital), लाइटस्पीड वेंचर पार्टनर्स (Lightspeed Ventures) और डी स जी कंस्यूमर पार्टनर्स ( DSG Consumer Partners) ने कंपनी का मूल्यांकन किया ३६० करोड़ पर और क़रीब १५८ करोड़ रुपये निवेश किये|

तो यह है रितेश की सफलता की सीढ़ियां चढ़ने की पूरी कहानी!

लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था| दिन रात की कड़ी मेहनत का नतीजा है यह| एक वक़्त ऐसा भी आया रितेश के जीवन में जब दिल्ली में घर का किराया न दे पाने के कारण उसके मकान मालिक ने उसे घर में घुसने नहीं दिया| मकान की सीढ़ियों में कितनी ही रातें काटीं उसने!
और अब देखिये, उसकी गुडगाँव स्थित कंपनी, ओयो रूम्स (OYO Rooms) के देश भर के १० शहरों में २०० से ज़्यादा कमरे हैं!

सोचिये, अगर रितेश ने इतनी कम उम्र में इतना बड़ा जोख़िम न उठाया होता तो यह सफलता शायद उसे कभी हासिल नहीं होती| हाँ, वह विफल हो सकता था लेकिन उसकी बहादुरी का साथ दिया उसकी किस्मत और उसके कड़े परिश्रम ने| आज वह कितने ही लोगों के लिए रोज़गार के नए रास्ते खोल चुका है|

आज की और आने वाली पीढ़ी के लिए एक उदहारण है रितेश: अगर जी जान से मेहनत की जाए तो किस्मत भी झक मरा के आपका साथ देती है!

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