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भारत प्राचीनकाल से ही अतिसमृद्ध देश था – ऐसा हम नहीं बल्कि हमारे ये 10 प्रमाण बोलते हैं।

प्राचीनकाल का भारत

आज का भारत क्या है इस बात पर जरूर मतभेद अथवा विवाद हो सकते हैं, लेकिन प्राचीनकाल का भारत कैसा था इस बात पर आज भी तथा भविष्य में भी कोई विवाद की सम्भावना दिखाई नहीं देती इसका कारण है वह साक्ष्य जो हमें हमारे विकसित तथा समृद्ध प्राचीनकाल का भारत दिखाते है ।

जानते है कैसा था प्राचीनकाल का भारत –

प्राचीनकाल का भारत

१. हम जानते हैं जब यूरोप में रोम, मैसोपोटामिया जैसी सभ्यताएं पल रही थी तब भारत में भी सिन्धु घाटी जैसी वैश्विक स्तर की सभ्यताएं पलती थी। जिनके प्रमाण आज तक उपलब्ध है। भारत की इस सभ्यता को इसकी नगर योजना,व्यापार के स्तर, जल निकास तथा पक्की सड़क व्यवस्था के कारण इसकी वर्तमान से तुलना की जाती है।

2. भारत की सम्रद्धि को जांचने का दूसरा सबसे बड़ा आयाम है योग। योग की शुरुआत भारत में ही हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों द्वारा की गई थी। आज के दौर में बिभिन्न मानसिक और शारीरिक समस्याओं से निजात पाने के लिए मैडिटेशन एक-लौता ऐसा रास्ता है जिसे कोई भी अपना सकता है। आज पूरी दुनिया जानती है कि योग करने के कितने फायदे है और इसलिए 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाता है।

3. आज के इस आर्टिकल में तीसरा आयाम है भाषा। जैसा कि हम जानते हैं संस्कृत भाषा को इस विश्व की सबसे प्राचीन भाषा माना जाता है। इस दुनिया में बोली जाने वाली कई भाषाएँ संस्कृत से प्रभावित हैं अथवा उन भाषाओं में संस्कृत के शब्द देखने को मिलते हैं। जो हमें हमारे प्राचीन भारत की तस्वीर से रूबरू करवाता है।

4. विज्ञान की तरह ज्योतिष को भी मान्यता प्राप्त है अतः भारत ने ज्योतिष शास्त्र के रूप में दुनिया को एक अनोखी भेंट दी है। यह ज्योतिष की गणनाओं से ही पता चला है कि यह प्रथ्वी गोल है और इसके घूमने से ही दिन रात होते हैं। आर्यभट तो सूर्यग्रहण  और चन्द्रग्रहण होने के कारण भी जानते थे। वेदों में तो इस अनंत दुनिया का भी वर्णन है और उड़न तश्तरी यानी UFO के बारे में भी बताया गया है।

5. जब भी भारत की उपलब्धियों की बात होती है तो गणित विषय प्रथम पंक्ति में शामिल होता है क्योंकि हमारे गणितज्ञों ने इस दुनिया को बहुत कुछ सिखाया। गणित के सबसे महत्वपूर्ण अंक शून्य का आविष्कार भी भारत में ही किया गया था। सबसे पहले महर्षि आर्यभट्ट ने ही इस दुनिया को शून्य के उपयोग के बारे में समझाया था। इसके अलावा वेदों से हमें 10 खरब तक की संख्याओं के बारे में पता चलता है। सम्राट अशोक के शिलालेखों से पता चलता है कि हमें संख्याओं का ज्ञान बहुत पहले से था। भास्कराचार्य की लीलाबती में लिखा हुआ है कि “जब किसी अंक में शून्य से भाग दिया जाता है तब उसका फलक्रम अनंत आता है।

6. जब सम्रद्धि की बात आती है तो स्वास्थय की बात करना आवश्यक है शल्य चिकित्सा का जन्म भी भारत में ही हुआ है। इस विज्ञान के अंतर्गत शरीर के अंगों की चीड-फाड़ की जाती है और उन्हें ठीक किया जाता है। शरीर को ठीक करने वाली इस विधि की शुरुआत सबसे पहले महर्षि सुश्रुत द्वारा की गई। बाद में इसे पश्चिमी देशो द्वारा अपनाया गया।

7. किसी देश के विकसित होने में वहां की सरकार अथवा प्रशासन का सबसे पहले योगदान होता है । वैसे भी हमारे देश में चन्द्रगुप्त, अशोक जैसे शासक हुए हैं जिनकी राज्य की सीमाओं में अखंड भारत की तस्वीर देखने को मिलती थी। साथ ही हमें ज्ञात है कि इन शासकों द्वारा अंतरष्ट्रीय स्तर पर व्यापार किये जाते थे।

8. भारत धन, स्वर्ण, खनिजों के मामले में हमेशा ही शीर्ष स्थल पर रहा है। भारत में चाहे गोलकुंडा की खाने हों या फिर पन्ना की खदाने हम पाते हैं कि भारत हमेशा से वेशकीमती आभूषणों को उगलने वाला स्थान रहा है।

9. शिल्प के मामले में भारत का जो स्थान है वह अनूठा है। उदाहरण स्वरुप चाहे खजुराहो के मंदिर हो या फिर चोल कालीन मूर्तियाँ शिल्प के माध्यम से भारतीय सुन्दरता की छठा हर जगह बिखरी है।

10. अगर खाद्य पदार्थों की बात कि जाए तो जिस तरह के व्यंजन भारत में पाए जाते हैं ऐसी विविधिता विश्व में कहीं भी देखने को नहीं मिलती. फिर चाहे वो मथुरा के पेडे हो या उड़ीसा का रसगुल्ला, इतिहास के पन्नो में इन व्यंजनों की अद्भुत और अलग अलग गाथाएं हैं. आदि.

प्राचीनकाल का भारत

ये है प्राचीनकाल का भारत और उनकी संस्कृति ! अतः उपर्युक्त बातों को देखते हुए हम यह कह सकते हैं कि यह हमारा भारत ही था जिसने ना केवल दुनिया को सभ्यता का पाठ पढाया बल्कि दुनिया का नेतृत्व भी किया, अतः यह सत्य है कि प्राचीन काल से ही भारत अतिसम्रद्ध था और बिभिन्न विविधिताओं को सहेजते हुए आज भी है.

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