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दुनिया के सबसे पहले विमान का आविष्कार किया था एक भारतीय ने

shivkur-bapuji

इंसान चाहे तो क्या कुछ नहीं कर सकता है?

नीचे लिखी चीज़ें इस बात का स्पष्ट उदाहरण हैं.

आपको कैसा लगेगा जब मैं यह कहूँ कि दुनिया के सबसे पहले हवाई जहाज़ का आविष्कार, अमरीका के राइट बंधुओं ने नहीं, बल्कि भारत के शिवकर बापूजी तलपडे ने किया था.

shivkar bapu talpade

जी हाँ! दुनिया के पहले हवाई-जहाज़ का आविष्कार एक भारतीय ने किया था और वह भी मुंबई में.

इस हवाई-जहाज़ का नाम तलपडे जी ने ‘मरुत्सखा’ रखा था. ‘मरुत्सखा’ एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है ‘हवाओं का मित्र’.
मरुत्सखा की पहली उड़ान का ठीक से दस्तावेजीकरण नहीं किया गया है, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि पहली उड़ान सन 1895 में भरी गई थी, राइट बधुओं द्वारा बनाए विमान से 8 साल पहले.

तलपडे जी के छात्रों में से एक, सातवलेकर जी ने कहा था कि ‘मरुत्सखा’ कुछ मिनटों के लिए हवा में किसी पंछी की तरह उड़ा था.
इस बात के और सबूत मिलते हैं कि शिवकर बापूजी तालपडे जी ने वाकई में दुनिया का सबसे पहला हवाई जहाज़ बनाया था.

पहला सबूत- सातवलेकर जी का ऊपर दिया गया बयान.
दूसरा सबूत- महादेव गोविन्द रानाडे का ‘मरुत्सखा’ के उड़ान भरने के समय वहां पर मौजूद रहना.
तीसरा सबूत- सयाजीराव गाइकवाड का इस बात को मानना कि मरुत्सखा ने वाकई में उड़ान भरी थी.

लीजिए! हमने 3 स्पष्ट और मज़बूत सबूत आपके सामने रख दिए.

तलपडे जी ने अपना विमान, पहली उड़ान के बाद अपने स्टोर हाउस में रख दिया था. और वह वहाँ काफी समय तक पड़ा रहा. तलपडे, संस्कृत के विद्वान थे और पुराणों में दिए गए विमानों के उल्लेखों ने उन्हें मरुत्सखा का निर्माण करने के लिए प्रेरित किया.

ऐसा बहुत कुछ है जिसे इंसान ठीक तरह से नहीं समझ पाया है. हम पूरी तरह से स्कूलों में सिखाई गई चीज़ों पर निर्भर नहीं हो सकते. इस संसार में ऐसी बहुत चीज़ें हैं जिनका आविष्कार पिछली सदी में हुआ है लेकिन पुराणों और वेदों में उन आविष्कारों का पहले से ही उल्लेख है.

हमारी भारतीय सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है.
साश्त्रों और वेदों में दिए ज्ञान को हासिल करना हमारा कर्तव्य है. ठीक उसी तरह जैसे शिवकर बापूजी तलपडे किया था.

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