इतिहास

क्या आप जानते है कौन थी खूबसूरत नैनों वाली ‘आम्रपाली’!

आम्रपाली – भारत विविधताओं से भरा देश है, जहां कदम-कदम पर कहानियों और हकीकत के कई किस्से सुनने को मिलते है।

ये कहानियां कभी हमें चौका देती है, तो कभी हमे मजबूर कर देती है कि हम इतिहास के पन्नों को और ज्यादा खंगाले। निश्चित तौर पर भारत में कुछ विषय आदिकाल से ही चर्चा में रहे है, जिनमें जादू-टोना, भूत-प्रेत, राजनीति के अलावा महिलाओं की स्थिति भी शामिल है।

ये कहानी है भारतीय इतिहास की सबसे खूबसूरत महिला के नाम से प्रचलित आम्रपाली की, जिसे अपनी खूबसूरती की किमत वैश्या बन कर चुकानी पड़ी थी, हालांकि आम्रपाली को वैश्या बनने का जरा भी दुख नहीं था। वह अपने आप को नगरवधू के रूप में बेहद खुशनसीब समझती थी। इतना ही नहीं आम्रपाली के रहन-सहन, गहने, शानो-शौकत से सम्पूर्ण नगर की महिलायें जलती थी। उस दौरान हर महिलायां आम्रपाली के जीवन की मनोकामना करती थी।

क्या अर्थ है नगरवधू का, क्यों बनी थी आम्रपाली नगरवधू 

उनके जैविक माता-पिता का किसी को पता नहीं, लेकिन जिन मुंह बोले माता पिता ने उसे पाला था, उनका कहना था कि वह उन्हें आम के पेड़ के नीचे पड़ी मिली थी। इसलिए उन्होंने उसका नाम आम्रपाली रखा था। आम्रपाली इतनी खूबसूरत थी कि हर कोई उसे अपनी जीवन संगीनी बनाना चाहता था, लेकिन वह किस की पत्नी बनेगी इस बात को लेकर पूरे राज्य में शीत युद्ध की स्थिती बन जाती थी। वह जब भी किसी एक का हाथ थामती, तो अन्य सभी लोग आक्रोश में आ जाते और राज्य का माहौल बिगड़ जाता। आम्रपाली की खूबसूरती और लोगों के बीच उसकी रूची को देखते हुए उसे प्रथा के अनुसार नगरवधू बना दिया गया। कहानियों में कहा जाता है कि उस समय काल में नगरवधू बनने के लिए लड़कियां एक तरह की प्रतियोगिता में भाग लिया करती थी।

वह अब किसी एक की पत्नी नहीं बल्कि पूरे राज्य की नगरवधू थी। आम्रपाली ने अपने लिए यह जीवन स्वयं नहीं चुना था, बल्कि वैशाली नगर में शांति बनाये रखने के लिए उसे नगरवधू बना राज्य को सौंप दिया गया। अब वह वैशाली की नगरवधू थी, जिसके आगे अमीर से अमीर व्यक्ति, हर नामचीन हस्ती अपना सिर झुकाती थी और उसकी सोहबत के लिए तरसती थी। आम्रपाली के जीवन यापन को लेकर यह भी कहा जाता है कि आलीशान महल और सभी सुख-सुविधाओं से लैस जीवन व्यतीत करने वाली आम्रपाली के पास इतनी धन दौलत थी कि वह राजा-महराजाओं को भी रूपये पैसे उधार दिया करती थी।

नगरवधू से वैश्या तक का सफ़र

यहां सिर्फ नाम का ही अतंर है, वरन दोनों ही शब्दों में महिलाओं की स्थिती काफी दयनीय होती है। पहले नर्तकी या नगरवधू कहा जाता था, जिनका काम अपनी शरण में आए पुरूषों को प्रेम की अनुभूति प्रदान करना होता था। फिर उन्हें ‘कोठेवाली’ की संज्ञा दी गई और अब उन्हें बस एक ही नाम से जाना जाता है ‘वैश्या’

फर्क सिर्फ यही है कि पहले हर स्त्री इनकी शान, खूबसूरती और लोकप्रियता से जलन करती थी और खुद अपने लिए ऐसा ही भविष्य मांगती थी। वहीं जब उन्हें कोठेवाली की संज्ञा दी जाने लगी तब से उनकी छवि खराब होने लगी और इस काम को लेकर महिलाओं का रूख भी बदलने लगा। अब इस तरह के काम में महिलाओं को या तो जबरन धकेला जाता है, या फिर उनकी मजबूरी उन्हें इस दलदल तक ले जाती है।

Kavita Tiwari

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