विशेष

महज़ एक फिट गहरी है ये ओखली लेकिन हज़ार लीटर पानी डालने पर भी नहीं भरती !

ओखली  – दुनिया में अजीबो-गरीब चीज़ें होती हैं.

हमारे यहाँ भी कुछ ऐसी चीज़ें होती हैं जिनपर विश्वास करना मुश्किल हो  जाता है, लेकिन होती सच हैं.

जब हम उनसे जुडी खबरें पढ़ते हैं तो लगता है की ये संभव नहीं है, लेकिन जैसे ही उस जगह जाते हैं तो सच को कबूल करने में बाध्य हो  जाते हैं.

एक ऐसा ही सच है मंदिर से जुड़ा.

एक ऐसा मंदिर हैं जहाँ पर एक छोटी सी ओखली है, लेकिन वो कभी भर्ती नहीं. इसे भरने के लिए हज़ारों लीटर पानी मंगाया जाता है, लेकिन एक फिट गहरी ये ओखली भारती नहीं है. अब आप सोच रहे हैं की ऐसा कैसे हो सकता है?

ऐसा है और ये बिलकुल सच है.

ये मंदिर राजस्थान में है. राजस्थान के पाली जिले में एक अजब परंपरा और उससे जुड़ी गजब दास्तां आज भी लोगों के बीच अचरज का विषय है.

हम बात कर रहे हैं पाली जिला मुख्यालय से 105 किलोमीटर दूर भाटून्द गांव की जहां के शीतला माता मंदिर से जुड़ी इस कहानी के साथ ही एक हैरत में डालने वाली ओखली भी है. ये महज एक फीट गहरी है और 6 इंच चौड़ी है, लेकिन अचरज की बात है कि इसमें हज़ारों-लाखों लीटर पानी समा जाता है.

महिलाएं अपने सर पर पानी से भरा मटका लेकर मंदिर में जाती हैं और उस ओखली में डालती हैं, लेकिन ये ओखली भारती नहीं है.

आखिर ऐसा क्या है इसके पीछे का सहस्य.

क्यों यह महज़ एक फुट गहरी ओखली हज़ारों लीटर पानी से भी नहीं भरती ? इसके पीछे की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है. हज़ार साल पूर्व भाटून्द गांव में कई ब्राह्मण परिवार निवास किया करते थे.

इस गांव में एक बाबरा नामक राक्षस का आतंक था जिससे लोग बेहद परेशान थे.

एक बार साधुओं की एक टोली गांव से गुजर रही थी तो ग्रामीणों ने उनसे अपनी पीड़ा से छुटकारा पाने का रास्ता पूछा.

साधुओं ने बताया कि मेवाड़ में उतेरा गांव है. वहां मां शीतला की तपस्या करने से वो खुश हो गईं तो गांव को इस राक्षस से छुटकारा मिल सकता.

बस क्या था गाँव के लोग मिलकर माता की पूजा करने लगे. लम्बे समय तक माता की आराधना चलती रही.

माता अपने भक्तों से ज्यादा दिन तक दूर नहीं रहतीं. गाँव वालों की तपस्या से खुश होकर माता रानी प्रगट हुईं और परेशानी पूछा.

गाँववालों ने राक्षस की बात कह सुनाई. देवी शीतला एक बच्ची का रूप धारण कर भाटूंद गांव पहुंचीं और गांव के बीच में ही शादी की तैयारी करने को कहा. माता की लीला अपरम्पार. गांववालों ने ऐसा ही किया. मज़े से मंडप सज गया. आसपास के लोगों को शादी का न्योता चला गया. सब उस दिन जमा होने लगे.

गाँव वालों ने माता की शादी के लिए धूमधाम से तैयारी की. मंडप सजाया गया और बरात भी धूमधाम से आई.

जब तीसरा फेरा लेने की बारी आई तो राक्षस भी वहां पहुंच गया. तभी देवी शीतला विकराल रूप में प्रकृट हुईं और राक्षस को ज़मीन पर पटक कर अपना त्रिशूल छाती पर रख दिया. राक्षस जिंदगी की भीख मांगने लगा. माता शीतला ने राक्षस से उसकी अंतिम इच्छा पूछी. उसने कहा, मुझे साल में दो बार बलि और पीने को मदिरा चाहिए. गाँव के लोगों ने दोनों मांगें मानने से इनकार कर दिया, क्योंकि गाँव में सभी लोग ब्राह्मण थे.

उसके बाद माँ ने उस राक्षस को ये कहकर गाँव छोड़ने को कहा कि उसे बलि के रूप में हत्या नहीं बल्कि अनाज और मदिरा के रूप में पानी मिलेगा.

तब से उसे बलि के रूप में सूखा आटा, गुड़ और दही इत्यादि का भोग दिया जता है और मदिरा की जगह पर राक्षस को पानी पिलाया जाता. ऐसा माना जाता है कि इस छोटी सी ओखली के मध्य से राक्षस के बड़े शरीर को पानी मिलता है, इसलिए ये ओखली भरती नहीं है.

Shweta Singh

Share
Published by
Shweta Singh

Recent Posts

इंडियन प्रीमियर लीग 2023 में आरसीबी के जीतने की संभावनाएं

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) दुनिया में सबसे लोकप्रिय टी20 क्रिकेट लीग में से एक है,…

2 months ago

छोटी सोच व पैरो की मोच कभी आगे बढ़ने नही देती।

दुनिया मे सबसे ताकतवर चीज है हमारी सोच ! हम अपनी लाइफ में जैसा सोचते…

3 years ago

Solar Eclipse- Surya Grahan 2020, सूर्य ग्रहण 2020- Youngisthan

सूर्य ग्रहण 2020- सूर्य ग्रहण कब है, सूर्य ग्रहण कब लगेगा, आज सूर्य ग्रहण कितने…

3 years ago

कोरोना के लॉक डाउन में क्या है शराबियों का हाल?

कोरोना महामारी के कारण देश के देश बर्बाद हो रही हैं, इंडस्ट्रीज ठप पड़ी हुई…

3 years ago

क्या कोरोना की वजह से घट जाएगी आपकी सैलरी

दुनियाभर के 200 देश आज कोरोना संकट से जूंझ रहे हैं, इस बिमारी का असर…

3 years ago

संजय गांधी की मौत के पीछे की सच्चाई जानकर पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक जाएगी आपकी…

वैसे तो गांधी परिवार पूरे विश्व मे प्रसिद्ध है और उस परिवार के हर सदस्य…

3 years ago