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आग भी इसे नहीं जला सकती इसलिए दुनिया इन्हें कहती है अग्नि योगी !

अग्नि योगी

अग्नि योगी – रामायण की गाथा पर गौर करें तो जब भगवान श्रीराम ने माता सीता की अग्नि परीक्षा ली थी तो माता ने ना सिर्फ जलती अग्नि में अपनी पवित्रता को साबित किया था बल्कि वो सही सलामत उस अग्नि से बाहर भी आ गई थीं.

रामायण की इस गाथा को जानकर मन में ये सवाल उठता है कि क्या इस कलयुग में कोई जलती हुई अग्नि से सही सलामत बाहर निकल सकता है. इसका जवाब ना ही होगा क्योंकि अग्नि के साथ जो खेलने की कोशिश करता है अग्नि उसे जलाकर राख कर देती है.

लेकिन हमारे देश में एक ऐसा बुजुर्ग मौजूद है जो आग के बिस्तर पर बैखोफ होकर लेट जाता है और आग से खेलने के बाद भी आग उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाती. यही वजह है कि आज वो दुनिया भर के लिए किसी अजूबे से कम नहीं समझे जाते हैं.

अग्नि योगी के नाम से मशहूर है यह शख्स

दरअसल 80 साल के रामभाऊ स्वामी आग पर ऐसे लेट जाते हैं जैसे कि कोई अपने बिस्तर पर लेटता हो. अग्नि में लेटने के बावजूद ना तो आग उन्हें छू पाती है और ना ही उनके कपड़े आग में जलते हैं.

आपको बता दें कि तमिलनाडु के तंजावुर में रहनेवाले रामभाऊ स्वामी साल 1970 से लगातार आग से खेलने का यह चमत्कार दिखाते आ रहे हैं. जिसकी वजह से लोग उन्हें अग्नि योगी कहकर पुकारते हैं.

आग में नहीं जलने के पीछे है ये कारण

खबरों की मानें तो रामभाऊ स्वामी ने यह चमत्कारिक अग्नि योग अपने गुरु श्री राम नरेंद्र सरस्वती के सानिध्य में सीखा था. उस दौरान उनके गुरु ने उन्हें ऐसे 32 मंत्र दिए थे जिनके प्रभाव से वो दहकती आग में सुरक्षित रहते हैं.

उनके द्वारा दिखाए जाने वाले इस चमत्कार पर दुनिया के कई वैज्ञानिक अध्ययन कर चुके हैं बावजूद इसके कोई भी इस रहस्य को उजागर नहीं कर पाया है.

अमेरिका के टेक्सास में रहनेवाले मशहूर न्यूरोलॉजिस्ट ई एफ ब्लॉक ने जब रामभाऊ स्वामी की आग से खेलनेवाली इस कहानी के बारे में सुना तो इस चमत्कार को अपनी आंखों से देखने के लिए वो खुद तंजावुर में उनके आश्रम पहुंचे.

इस चमत्कार के हकीकत को जानने के लिए उन्होंने स्वामी जी को अपने साथ लाए कपड़े पहनने को दिए और उन्हीं कपड़ों में स्वामी जी ने सफलता पूर्वक अग्नि योग करके दिखाया. उनके इस चमत्कार को दुनिया तक पहुंचाने के लिए साल 2002 में एक विदेशी फिल्मकार ने डॉक्यूमेंट्री भी बनाई थी.

इस तरह से अग्नि योगी बने रामभाऊ स्वामी

स्वामी जी की मानें तो उन्होंने साल 1961 में अपने गुरु के साथ मिलकर अग्नि योग का अभ्यास शुरू किया था. जबकि साल 1972 में उन्होंने पूरी तरह से भोजन का त्याग कर दिया था लेकिन अब वो सिर्फ उबले हुए चावल और दूध का सेवन करते हैं.

साल 1975 में स्वामी जी ने जल को भी त्याग दिया था यानी वो बगैर पानी के ही जिंदा हैं. बताया जाता है कि साल 1979 में स्वामी जी ने अपने गृहस्थ जीवन का त्याग कर दिया और पूरी तरह से योगी का जीवन अपना लिया.

गौरतलब है कि अग्नि योग के जरिए रामभाऊ स्वामी पूरे विश्व में शांति और सद्भाव लाना चाहते हैं लेकिन उनके इस अग्नि योग को देखकर हम भी यही कहने पर मजबूर हो गए हैं कि चमत्कार को नमस्कार है.

 

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