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आतंकी अबू दुजाना की कहानी ‘यंगिस्थान की जुबानी’

अबू दुजाना की कहानी

अबू दुजाना की कहानी – हाल ही में कश्मीर में अबू दुजाना को भारतीय सुरक्षाबलों ने मार गिराया।

2 अगस्त, 2017 को सभी मीडिया चैनलों और अखबारों में दुजाना की मौत की खबरें दिखाई जा रहीं थीं।

अबू दुजाना की मौत के बाद हिंसा की भनक लगते ही घाटी में इंटरनेट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया इसके अलावा भी घाटी में कई और चीजों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। माना जा रहा था कि अबू दुजाना की मौत के बाद घाटी में उग्र प्रदर्शन हो सकते हैं और जिसकी वजह से हिंसा भी हो सकती है।

हालांकि कई तरह की रोक के बाद भी हिंसा हुई। हालांकि इसपर काबू पा लिया गया। लेकिन ये दुजाना आखिर था कौन जो भारत सरकार और जवानों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। आज यंगिस्थान आपको बताएगा अबू दुजाना की कहानी ।

अबू दुजाना की कहानी – 

लश्कर का चीफ ऑपरेशनल कमांडर और सुरक्षाबलों का टार्गेट था दुजाना:

अबू दुजाना घाटी में लश्कर तैयबा का चीफ ऑपरेशनल कमांडर था।

अबू दुजाना का नाम ‘A++’ आतंकियों की सूची में शामिल था। दुजाना के सिर पर 15 लाख का इनाम था और दुजाना भारतीय सुरक्षाबलों का सबसे मुख्य लक्ष्य था। घाटी में मुख्य रूप से आतंकियों को 2 भागों में बांटा गया है। पहले वो हैं जो घाटी के ही होते हैं और दूसरे वो जो पाकिस्तान से आते हैं। दुजाना पाकिस्तान से आया था। दुजाना का मारा जाना सुरक्षाबलों और सरकार दोनों के लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी है। इसका सबूत इस बात से ही लग जाता है कि दुजाना के मारे जाने के बाद जवानों ने एक के बाद एक कुल 3 प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं।

हमलों की प्लानिंग का मास्टरमाइंड था दुजाना:

दुजाना को सुरक्षाबलों पर हमले का मास्टर माइंड कहा जाता था।

उसे रणनीति बनाने में महारत हासिल थी। दुजाना ज्यादातर हमले भारतीय सुरक्षाबलों के काफिले पर करता था। 2016 में उसने पंपोर में बीएसएफ के काफिले पर हमला कराया था, इस हमले में 8 जवान शहीद हो गए थे। ठीक इसी तरह का हमला दुजाना ने साल 2017 में भी करवाया था। दुजाना ज्यादातर हमले अपने साथियों से कराता था और वो हमले करने नहीं जाता था।

भारतीय सुरक्षाबलों को बार-बार देता था चकमा:

घाटी में 9 साल से अपनी दहशत फैला रहा दुजाना भारतीय सुरक्षाबलों को बार-बार चकमा देता था और दावा किया जाता है कि वो सबसे ज्यादा दिनों तक जिंदा रहने वाला विदेशी आतंकी था।

साल 2016 में सेना की राष्ट्रीय राइफल्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस की एस.ओ.जी और सीआरपीएफ की टीम ने दुजाना के मोबाईिल फोन से उसका पता लगा लिया था। माना जाता है कि जहां दुजाना मारा गया है उसी गांव में सुरक्षाबलों ने उसे 24 मई 2017 को भी घेर लिया था लेकिन वो सुरक्षाबलों को चकमा देने में कामयाब रहा था। ये भी कहा जाता है कि वो कश्मीरी भाषा जानता था और इस वजह से वो लोगों में आसानी से घुल-मिल जाता था। जब भी सेना उसके खिलाफ कोई ऐक्शन लेने का मन बनाती थी तो उसे तुरंत खबर मिल जाती थी।

दुजाना के पकड़े जाने का मास्टर प्लान:

काफी लंबे समय से दुजाना को पकड़ने के लिए रणनीतियां बना रही भारतीय फौज को हर बार विफल होना पड़ता था।

लेकिन कुछ दिन पहले पुलिस को एक ऐसी लड़की के बारे में पता लगा जिसे दुजाना ने छोड़ दिया था। बस फिर क्या था सुरक्षाबलों ने उस लड़की की निशानदेही पर छापे मारने शुरू कर दिए। सुरक्षाबलों ने दुजाना को पुलवामा के हकीरपोड़ा में घेर लिया। दुजाना से सरेंडर करने की अपील की गई लेकिन दुजाना ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया और उसने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने भी जवाबी फायरिंग की। दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हो गई। अंत में सुरक्षाबलों ने दुजाना और उसके साथी आरिफ एहमद को मार गिराया।

ये है अबू दुजाना की कहानी – इस तरह सुरक्षाबलों ने अबू दुजाना को मार गिराने में कामयाबी पाई लेकिन सुरक्षाबलों के लिए दुजाना को मार पाना इतना आसान नहीं था। क्योंकि जब जवान दुजाना पर फायरिंग कर रहे थे तभी वहां गांव वालों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी और वो ऑपरेशन वाली जगह पर जाने की कोशिश करने लगे। सुरक्षाबलों के सामने राह आसान नहीं थी एक तरफ उन्हें गाव वालों की सुरक्षा भी करनी थी और दूसरी तरफ उनके सामने दुजाना जैसा खुंखार आतंकी था। लेकिन सुरक्षाबलों की मुस्तैदी के आगे दुजाना के समर्थकों की एक नहीं चली और वो अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए। अत में सुरक्षाबलों ने दुजाना को मारकर ही दम लिया।

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