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आम आदमी पार्टी ने ‘आप’ का पंजीकरण रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में डाली अर्जी

आप पार्टी

आप पार्टी –अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली आम आदमी पार्टी ने ‘आप’ पार्टी का पंजीकरण रद्द कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी डाली है। दरअसल आम आदमी पार्टी, आप पार्टी का पंजीकरण रद्द करवाना चाहती है और इसके लिए उसने पार्टी को नोटिस भी भेज दिया है।
ये खबर पढ़कर आप चौंक गए ना।

लेकिन चौंकने की जरूरत नहीं है। क्योंकि यह दोनों अलग-अलग पार्टी है लेकिन दोनों का शॉर्ट फॉर्म एक जैसा है। इसलिए ही आम आदमी पार्टी ने ‘आप’ का पंजीकरण रद्द करवाने की मांग की है।

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नई है ‘आप’

अब आते हैं मुद्दे पर। ‘आप’ एक नई राजनैतिक पार्टी है जिसका पूरा नाम ‘आपकी अपनी पार्टी (पीपुल्स)’ है। इसी पार्टी को दिल्ली हाई कोर्ट ने नोटिस भेजा है और इसके साथ चुनाव आयोग को भी नोटिस भेजा गया है।
कोर्ट ने यह नोटिस दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है।

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एक जैसे हैं नाम

आम आदमी पार्टी ने ‘आपकी अपनी पार्टी (पीपुल्स)’का पंजीकरण रद्द करवाने के पीछे यह तर्क दिया है कि ‘नई गठित इस पार्टी का संक्षिप्त नाम बिल्कुल उस की पार्टी के नाम की तरह है। दोनों दलों का संक्षिप्त नाम ‘आप’ एक जैसा है, जिससे मतदाता भ्रमित हो सकते हैं।’

13 नवम्बर को होगी अगली सुनवाई

इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट 13 नवम्बर को अगली सुनवाई करेगा।

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चुनाव आयोग से की थी अपील

कोर्ट जाने से पहले आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग से इस नई पार्टी का पंजीकरण रद्द करने की मांग की थी। आप ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत राजनीतिक पार्टी के रूप में गठित नई पार्टी ‘आपकी अपनी पार्टी’ का पंजीकरण, चुनाव आयोग से रद्द करने की अपील की थी।

चुनाव आयोग ने इस अपील को 16 जुलाई को खारिज कर दिया था। जिसके बाद ‘आप’ ने चुनाव आयोग के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। इसी के बाद हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग और ‘आपकी अपनी पार्टी (पीपुल्स)’ को नोटिस भेजा।

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‘आपकी अपनी पार्टी’

आप पार्टी – ‘आपकी अपनी पार्टी’ दिल्ली में काफी एक्टिव है और इसने कई मोर्चों पर दिल्ली सरकार का विरोध किया है। अब तक यह पार्टी दिल्ली सरकार की जमकर खिलाफत करती आई है, इसके लिए पार्टी ने दिल्ली में कई बार सरकार के विरोध में प्रदर्शन भी किया है। अब अरविंद केजरीवाल और उसकी पार्टी को अदालत की अगली सुनवाई का इंतजार है।

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