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भारत का एक ऐसा गाँव जहाँ की ९९ पेरसेंट लड़कियाँ करती हैं देह व्यापार 

भारत में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या बहुत कम है. कुछ जगहें तो ऐसी हैं जहाँ कि शादी के लिए भी लड़कियां नहीं मिलतीं. घर में एक लड़की आ गई तो उससे कई का विवाह कर दिया जाता है, लेकिन इसी देहस में एक जगह ऐसी है जहाँ पर लड़कियों की संख्या ज्यादा ही नहीं बल्कि वो अपने घर को आर्थिक रूप से चलाती हैं. यहाँ की लड़कियों का व्यापार कुछ और नहीं बल्कि देह व्यापार है. यहाँ की लड़कियां १० -१२ की होते ही देह व्यापर के ज़रिये अपने घर का खर्च चलाती हैं.

सबसे बड़ी बात ये है कि इस धंधे में उनके माता-पिता खुद उन्हें भेजते हैं. घर की बड़ी लड़की की ये ज़िम्मेदारी होती है कि वो घर को आरेथिक रूप से मदद करें. ये कहानी है मध्य प्रदेश के कुछ गाँव की. एक दो नहीं बल्कि कई गाँव हैं जो इस व्यापार में लिप्त हैं.

 

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले का नाम सिर्फ अफीम की खेती के कारण ही नहीं लिया जाता बल्कि इससे कहीं ज्यादा नाम उसके इस काम से है. मंदसौर जिले के कई गाँव में बांछड़ा समाज के लोग फैले हुए हैं. उनका मुख्य पेशा अब देह व्यापार ही है.

सिर्फ मंदसौर ही नहीं बल्कि नीमच, रतलाम जिले के लगभग ७५ गाँव में ये जाति रहती है. इनकी आबादी २३ हज़ार के आसपास है. इनमें से अधिक महिलाएं इसमें शामिल हैं. इस जाति में महिलाओं की बड़ी इज्ज़त होती है. ख़ास बात ये है कि जब भी किसी के घर लड़की होती है तो उनके घर ढोल बाजे और आने होते हैं.

इस समाज की बड़ी लड़की को देह व्यापार में बड़े शौक से भेजा जाता है. इस लड़की को कमाई के लिए उत्साहित किया जाता है. वो जो भी कमाती है उससे घर का खर्च चलता है. परिवार के अन्य सदस्य बड़ी उत्सुकता से लड़की के बड़े होएं का सपना देखते हैं. लड़कियां भी बचपन से यही सपना देखती हैं कि बड़ी होकर उन्हें अपनी बड़ी बहन की ही तरह देह व्यापर में जाना होगा. उसनके दिमाग में पढ़ाई, शादी जैसे कोई सपना  नहीं हटा. वो तो बस, यही सोचती  रहती हैं की वो ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की कोशिश करेंगी.

ये भारत की विडंबना ही है कि जहाँ डिजिटल होने की बता की जा रही है वहीँ कुछ ऐसे गाँव हैं जहाँ लड़कियों की दशा ऐसी है. भला इन लड़कियों को प्रधानमंत्री से क्या उम्मीद होगी. वो तो ये भी नहीं जानती होंगी कि इस तरह का कोई आदमी भी है जो देश को चलाता है.

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