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मिल गये पक्के सबूत कि यही व्यक्ति था नेताजी सुभाषचंद्र बोस ! नहीं हुई थी विमान दुर्घटना में नेताजी की मौत

Proof About Subhash Chandra Bose

सालों से ही यह आवाज सुनने को मिल रही थी कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस का निधन हवाई दुर्घटना में नहीं हुआ था अपितु वह भारत में ही रहे और कुछ बड़े लोगों को इस बारे में पूरी जानकारी भी थी.

आजाद हिन्द फ़ौज के कुछ पूर्व सैनिक भी थे जो यह कहते रहते थे कि नेताजी भारत में ही हैं.

लेकिन इस बात को आजादी के समय इसलिए जोर से नहीं बोला गया या जांच नहीं की गयी थी कि क्योकि आजादी के समय देश के कुछ नेताओं ने एक संधि पर हस्ताक्षर किये थे. वह संधि यही थी कि अगर नेताजी मिलते हैं तो उनको गोरों के हवाले करना पड़ेगा.
तो कहीं न कहीं अंग्रेजों को भी लग रहा था कि नेताजी का निधन विमान दुर्घटना में नहीं हुआ है.

वह अभी भी जिन्दा ही हैं.

अब उठा राज से पर्दा

अभी हाल ही में मीडिया रिपोर्ट से खबर आ रही है कि गुमनामी बाबा के आखिरी बक्से में नेताजी की फैमिली फोटो भी मिली है. ज्ञात हो कि कोर्ट के आदेश के बाद पिछले करीब 2 हफ्तों से गुमनामी बाबा के सामान के बॉक्स खोले जा रहे है. इसी क्रम में मंगलवार को उनका आखिरी बक्सा खोला गया जिसमें नेताजी की फैमिली फोटो मिली है. गुमनामी बाबा के 26वें बक्से से नेताजी से जुड़े जो सामान मिल रहे हैं वो बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

कौन थे गुमनामी बाबा

बहुत कम लोग इस सच को जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के फ़ैजाबाद जिले में एक बाबा रहते थे.

सभी इनको भगवान का अवतार मान इनकी पूजा करते थे. इनका नाम यहाँ पर गुमनामी बाबा रखा गया था. लेकिन अचानक से जब 1985 में इस बाबा की मृत्यु हुई तो सरकार बाबा का सारा सामान जब्त कर लेती है.

यह बाबा अच्छी अंग्रेजी बोलते थे और साथ ही साथ जर्मन भी बोलते थे. ना जाने कितने तरह के अख़बार और पत्रिका यह पढ़ते थे.
आज जब इतने सालों बाद गुमनामी बाबा का सामान खोलना शुरू किया गया है तो उसमें से बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी मिलना शुरू हो चुकी हैं.

कहते हैं सुभाष जी के पत्र पर चीन ने युद्ध रोक दिया था

यह बात भी कुछ लोग बोल रहे हैं कि जब चीन से भारत युद्ध कर रहा था तो अंत में चीन के एक बड़े आर्मी अधिकारी ने एक लेटर को पढ़ते ही युद्ध रोकने के निर्देश दे दिए थे.

यह पत्र सुभाष जी का ही था.

आजादी के कई सालों बाद तक नेताजी देश में काम करते रहे थे. कई बार वह जर्मनी भी गये थे और चीन यात्रा पर भी. बंगाल में भी कई बार इनके होने की ख़बरें आती रही थीं.

कहते हैं कि नेताजी के बारे में  जो भी खबर विश्व के किसी भी अख़बार में छपी थी वह बाबा के सामान से मिल गयी हैं. इसके साथ-साथ अन्य कई तरह की जानकारी भी बाबा से मिली है जिसे सरकार अभी बाहर नहीं  आने दे रही है.

अगर यह बात सत्य है कि गुमनामी बाबा ही नेताजी थे तो इससे बड़े दुःख की बात क्या हो सकती है कि देश में रहते हुए भी देश उनका फायदा नहीं ले पाया है.