ENG | HINDI

इलेक्ट्रीशियन के बेटे को मिली अमेरिका में 96 करोड़ की नौकरी, जानें पूरा सफर

भारतीय छात्रो का सफर

भारतीय छात्रो का सफर – भारत की युवा पीढी ने दुनिया भर को ये साबित कर दिया है की उनसे बेहतर इस युग एन और कोई नहीं, फिर चाहे वह तकनीकी हो या फिर भी सेक्टर में नौकरी. भारतीय छात्रो ने अमेरिका की सिलिकोनवैली पर अपना राज जमा रखा है.

फिर चाहे वो गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई हो या फिर माईक्रोसोफ्ट के सत्यम नादेला.

लेकिन भारतीय छात्रो का सफर अभी यही नहीं थमा है दोस्तो, देश के कोने-कोने से युवा छात्र अपने देश का नाम रोशन करने अमेरिका, रूस, चीन, जापान और ब्रिटेन जैसे देशो से नौकरीयो के प्रस्ताव पा रहे हैं. ऐसे ही कुछ भारत के मध्य प्रदेश के रहने वाले एक इलेक्ट्रीशियन के बेटे ने भी कर दिखाया.

इस लडके को अमेरिका से 96 करोड की नौकरी का प्रस्ताव मिला है.

भारतीय छात्रो का सफर –

भारतीय छात्रो का सफर

जी हाँ, मात्र २२ वर्ष के अमर ने कुछ ऐसा कर दिखाया जिससे उनके पिता की छाती सौ गुना चौडी हो गई. मध्य प्रदेश में जबलपुर के रहने वाले अमर का जन्म एक साधारण परिवार से हुआ था. उनके पिता एक इलेक्ट्रीशियन का काम करते थे और मा घर समभालती थी. अमर के पिता ने बडी मुश्किल से अपने बेटे की  कॉलेज की फीस भरी थी वह दिन रात मेहनत करते थे ताकि उनका बेटा बड़ा होकर कामयाब बन सके और उनकी तरह लोगो के घर-घर जाकर बिजली का काम ना करना पडे.

अपने पिता को संघर्ष में देखते हुए अमर ने खूब मेहनत की और वह हर साल स्कूल में प्रथम आते रहे. लेकिन उनकी असली प्रतीक्षा शुरू हुई कॉलेज में जहा उनके आस पास बहुत कॉम्पीटिशन था. अमर अपने कॉलेज में एक लौते ऐसे छात्र नहीं थे जो पढाई में हमेशा से प्रथम आते हो. उनके लिए कॉलेज में अवल आना बेहद मुश्किल  था लेकिन अमर ने कभी हार नहीं मानी और दिन रात एक कर के खूब पढाई की. और उनकी यह मेहनत तब रंग लाई जब अमेरिका से कई कंपनी उनके कॉलेजइंटर्न्स को हायर करने आई.

भारतीय छात्रो का सफर

अमर को इस बात की कोई भनक नहीं थी की उन्हे एक अमेरिकी कंपनी से इतना बड़ा पैकेज मिलेगा. जब अमर और उनके पिता को इसकी खबर मिली तो उन दोनो और उनके परिवार का खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

अमर का बचपन काफी मुश्किलो से गुजरा था क्योंकि वह एक गरीब घर के रहने वाले थे. अमर ने अपने एक इंट्रव्यू में बताया था की एक्जाम से पहले अगर उनके घर में बिजली चली जाती थी तो उनके पिता किसी ना किसी तरह से मेरी पढाई के लिए लाइट का इंतजाम करते थे. मैं आज इस काबिल बन सका हूँ तो कह केवल मेरे पिता की वजह से अगर वो नहीं होते तो मैं शायद इस मुकाम तक कभी नहीं पहुंच पाता.

अमर इस समय अमेरिका में इंजीनियर की नौकरी कर रहे हैं.

भारतीय छात्रो का सफर – अमर की इस उपलब्धि के बाद उन्हे अपेन कॉलेज और यहाँ तक की लोकल एमएलए और सरकार से सम्मान भी प्राप्त हुआ. अमर का कहना है की अगर आप किसी भी चीज के लिए मन लगा कर मेहनत करे तो आपसे आपकी उस उपलब्धि को कोई दूर नहीं कर सकता.

Don't Miss! random posts ..