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विश्व में सबसे तेज गति से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने हैं यह 5 चुनौतियां

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इस समय भारत की आर्थिक विकास दर सात प्रतिशत से ऊपर है.

बेशक अब आप बोलें कि आपको तो नजर नहीं आ रही है तो उसमें आपकी कोई गलती भी नहीं है.

इस समय चीन साढ़े छह प्रतिशत की गति से आगे बढ़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक भी भारतीय अर्थव्यवस्था की इस गति को देखकर हैरान है. वह बोल रहा है कि अगर भारत सामने आ रही कुछ चुनौतियों से बच जाए तो वह विश्व का एक शक्तिशाली देश बन सकता है.

तो आखिर वह चुनौतियाँ क्या हैं जिनका जिक्र विश्व बैंक कर रहा है?

तो आइये एक नजर डालते हैं भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां सर उठाये खड़ी हुई हैं-

1.  तकनीक में पिछड़ापन

बेशक आज हमारी आर्थिक विकास दर सात फीसदी से ऊपर जा रही है. बेशक आज विश्व में सबसे तेज हम आगे जा रहे हैं. लेकिन आज भी भारत देश तकनीक के प्रयोग में काफी पीछे है. यह तकनीकी पिछड़ापन हमारे विकास को धुंधला कर रहा है. जैसे की चीन हमसे तकनीक में काफी आगे है. इस बारें में भारत को अभी काफी आगे तक जाने की आवश्यकता है.

2.  प्रतिभा पलायन

यह एक बड़ी समस्या है. युवा की देश की ताकत बताये जा रहे हैं. लेकिन जब वह युया देश के काम आना चाहिए तो ऐसे में वह बाहर के देशों में धन कमाने चला जाता है. यह एक बड़ी समस्या है. वैसे युवाओं के पलायन के पीछे जो एक बड़ी वजह है वह यही है कि हमारे पास उनके लायक नौकरियां नहीं होती हैं. तकनीक का पिछड़ापन यहाँ भी साफ नजर आ जाता है.

3.  कृषि प्रधान देश में मरता किसान

भारत को कृषि प्रधान देश बोला जाता है.देश की 75 प्रतिशत जमीन खेती योग्य है. लेकिन फिर भी अगर देश का किसान आत्महत्या कर रहा है. खेती खत्म होती जा रही है तो यह इस देश के लिए चिंताजनक विषय है.

4.  देश में उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल उद्योग

पिछले चार सालों में जिस तरह से हमारा रियल एस्टेट जमीन पर आकर गिरा है वह कोई अच्छे संकेत नहीं हैं. यह उद्योग देश की रीढ़ बताया जाता है. नई सरकार से सभी को बहुत उम्मीद थी. लेकिन वह रियल एस्टेट के लिए कुछ नहीं कर पाई है. इसी तरह से ऑटो- मोबाइल भी कुछ अच्छी गति नहीं पकड़ पाया है.

5.  स्वदेशी की पकड़ आज भी कमजोर है

नई सरकार से उम्मीद की जा रही थी कि वह विदेशी की जगह स्वदेशी को ज्यादा महत्त्व देंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ है. देश का पैसा बाहर जा रहा है. डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर बना हुआ है. देश के लोगों को नौकरियां तो मिल रही हैं लेकिन देश को मालिकों की तुलना में नौकर ज्यादा प्राप्त हो रहे हैं.

तो अभी देश की मौजूदा सरकार को इन समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए और सभी का विकास-मजबूत विकास पर पकड़ कसनी चाहिए.

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