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गलती से भी ऐसा ट्वीट मत करना नहीं तो इनकी तरह आपकी भी पछताओगे !

गलती से भी ऐसा ट्वीट मत करना नहीं तो इनकी तरह आपकी भी पछताओगे !

ये शख्स अब सोशल नेटवर्किंग साइट ट्वीटर पर ट्वीट करने से पहले हजार बार सोचेगा.

लेकिन आप ऐसी गलती मत भूलकर भी मत करना. जैसी गलती पुणे स्थित आईटी कंपनी में काम करने वाले स्मित राज ने की है.

पुणे स्थित आईटी कंपनी में काम करने वाले स्मित राज का वनवास तो खत्म होगा या नहीं लेकिन एक बात तो साफ है कि अब उनकी पत्नी के लिए मुश्किले खड़ी हो सकती है.

दरअसल, हुआ यूं कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को स्मित राज ने ट्वीट करके मदद की गुहार लगाई थी. क्योंकि आपने देखा है कि मोदी सरकार के अधिकांश मंत्री जनता की सुविधा को देखते हुए ट्वीटर पर एक्टिव रहते हैं और मुश्किल में पड़े लोगों को तुरंत सहायता पहुंचाते हैं.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी अक्सर इस प्रकार लोगों की मदद करने की कोशिश करती हैं. यही सोचकर स्मित राज ने भी सुषमा स्वराज को ट्वीट कर मदद की गुहार लगाई.

लेकिन आईटी कंपनी में काम करने वाले स्मित को विदेश मंत्री को ट्वीट करना महंगा पड़ा. स्मित राज ने ट्वीट कर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से कहा कि उनकी पत्नी रेलवे में काम करती है और झांसी में तैनात है और वह पुणे में काम करता है. वे करीब एक साल से दूर रह रहे हैं. ट्रांसफर की अर्जी के साथ वह सारे तरीके अपना चुके हैं लेकिन उनका ट्रांसफर नहीं हो पा रहा है.

यहां तक तो सब ठीक था लेकिन पत्नी से मिलने के लिए स्मित ने अगली जो लिखी उसने विदेश मंत्री सुषमा स्वाराज का पारा हाई करा दिया. स्मित ने लिखा कि क्या आप हमारा वनवास खत्म करने में मदद करेंगी.

बस फिर क्या था सुषमा स्वाराज ने इसके जवाब में लिखा कि अगर तुम या तुम्हारी पत्नी मेरे मंत्रालय में काम कर रहे होते तो इस तरह ट्विटर पर ट्रांसफर की अर्जी देने के लिए सस्पेंड कर देती.

ट्वीट पढ़ने के बाद तो स्मित के पैरों की जमीन खिसक गई. उसने सपने भी नहीं सोचा था कि ट्वीटर पर से मजाक उसे इतनी महँगी पड़ जाएगी. क्योंकि सुषमा स्वराज ने यह ट्वीट रेल मंत्री सुरेश प्रभु को फॉरवर्ड कर दिया. हालांकि इस ट्रांसफर की अर्जी के जवाब में सुरेश प्रभु ने लिखा, वे रेलवे बोर्ड के चेयरमैन से कहकर इस मामले में नियम के मुताबिक कारवाई करने के लिए कहेंगे. लेकिन वे नियम स्मित की पत्नी के लिए कहीं मुसिबत न बन जाए इसकी चिंता अब मियां बीवी दोनों को सता रही होगी.

इसलिए यदि आप भी सरकार या उनके मंत्रियों के ट्वीटर या सोशल प्लेटफार्म पर गैरजिम्मेंदाराना कामेंट लिखते हैं तो यह जरूरी नहीं कि आप हर बार बच जाए. यह आपको महंगा भी पड़ सकता है.

 
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