जीवन शैली

इस देश में किसी को देखकर हंसने का नहीं है रिवाज़

कम बोलने वालों का देश – कुछ लोगों को कम बोलने की आदत होती है तो कुछ ज्‍यादा बोलते हैं लेकिन ऐसा तो बहुत ही कम होता है कि पूरा देश ही कम से कम बात करें। ये तो सुनने में बहुत अटपटा सा लगता है।

इस देश में नहीं बोलते लोग

यूरोप का लातविया ऐसा देश है जिसे कम बोलने वालों का देश कहा जाता है। कम बोलना यहां की संस्‍कृति का हिस्‍सा है। इस देश में रहने वाले लोग खुद इस आदत की निंदा करते हैं। यहां के लोग मिजाज से बहुत क्रिएटिव होते हैं। लातविया के लोगों की खासियत है कि ये कम बोलने और रचनात्‍मक सोच में रिश्‍ता तलाशते हैं।

लातविया की एक लेखक ने अपनी किताब में लिखा है कि लातविया के लोगों की कम बोलने और लोगों से कम मिलने-जुलने की आदत सही नहीं है। जहां पूरी दुनिया एक मंच पर आ गई है, हर विषय पर लोग खुलकर अपनी राय रखने लगे हैं वहीं लातविया का खामोश रहना नुकसान दे सकता है। लोगों को अपनी आदत बदलने की जरूरत है।

कम बोलने वालों का देश 

यहां के लोगों को पसंद है एकांत

लातविया के लोग खुद को ज्‍यादा पसंद करते हैं और अपनी ही दुनिया में मगन रहते हैं।

इस पर एक रिसर्च की गई है जिसमें पता चला कि कम बोलने की आदत ज्‍यादातर उन लोगों की है जो रचनात्‍मक कामों जैसे कला, संगीत या लिखने के काम से जुड़े हैं।लातविया के एक मनोवैज्ञानिक के मुताबिक क्रिएटिविटी लातविया के लोगों की पहचान के लिए जरूरी है। इस वजह से यहां के लोग कम ही बोलना पसंद करते हैं और उनके ज़हन में हर वक्‍त ये ख्‍याल रहता है कि उन्‍हें कम बोलना है।

दरअसल, लातविया की सरकार ने शिक्षा और आर्थिक उन्‍नति के लिए जितनी योजनाएं बनाई हैं उसके लिए रचनात्‍मक सोच को प्राथमिकता दी गई है। यूरोपियन कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपियन यूनियन मा‍र्केट में रचनात्‍मक काम करने वाले सबसे ज्‍यादा लातविया के लोग हैं। लातविया के लोग ना सिर्फ कम बोलते हैं बल्कि एकांत पसंद करते हैं।

एक-दूसरे से मुखाबित होने पर किसी के चेहरे पर मुस्‍कुराहट तक नहीं बिखरती। अजनबियों को देखकर तो ये बिलकुल भी हंसते नहीं हैं।

खुली सड़क पर भी नहीं चलते

लातविया के लोग खुली सड़क की बजाय गलियों से रास्‍ता तय करना पसंद करते हैं। यहां पर ऐसे कार्यक्रमों तक का आयोजन नहीं होता जिसमें ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग जमा हों। जैसे कि लातविया में सॉन्‍ग एंड डांस फेस्टिवल यहां का सबसे बड़ा आयोजन है और इसमें दस हज़ार से भी ज्‍यादा गायक और डांसर्स हिस्‍सा लेते हैं लेकिन कम लोगों के आने की वजह से ये फेस्टिवल 5 साल में एक बार ही होता है।

अकेलेपन और एक-दूसरे से दूर रहने की हद ये है कि रस्‍मी सलाम दुआ से बचने के लिए लोग पहले पड़ोसी के घर से निकलने का इंतजार करते हैं।

लातविया कम बोलने वालों का देश है – इस देश के बारे में जानकर आपको भी हैरानी हो रही होगी कि भला पूरे देश के लोगों की ऐसी आदत कैसे हो सकती है। भारत के लोग तो अपने मिलनसार रवैये के लिए फेमस हैं और हम तो एक मिनट भी किसी से बात किए बिना नहीं रह सकते हैं।

Parul Rohtagi

Share
Published by
Parul Rohtagi

Recent Posts

इंडियन प्रीमियर लीग 2023 में आरसीबी के जीतने की संभावनाएं

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) दुनिया में सबसे लोकप्रिय टी20 क्रिकेट लीग में से एक है,…

2 months ago

छोटी सोच व पैरो की मोच कभी आगे बढ़ने नही देती।

दुनिया मे सबसे ताकतवर चीज है हमारी सोच ! हम अपनी लाइफ में जैसा सोचते…

3 years ago

Solar Eclipse- Surya Grahan 2020, सूर्य ग्रहण 2020- Youngisthan

सूर्य ग्रहण 2020- सूर्य ग्रहण कब है, सूर्य ग्रहण कब लगेगा, आज सूर्य ग्रहण कितने…

3 years ago

कोरोना के लॉक डाउन में क्या है शराबियों का हाल?

कोरोना महामारी के कारण देश के देश बर्बाद हो रही हैं, इंडस्ट्रीज ठप पड़ी हुई…

3 years ago

क्या कोरोना की वजह से घट जाएगी आपकी सैलरी

दुनियाभर के 200 देश आज कोरोना संकट से जूंझ रहे हैं, इस बिमारी का असर…

3 years ago

संजय गांधी की मौत के पीछे की सच्चाई जानकर पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक जाएगी आपकी…

वैसे तो गांधी परिवार पूरे विश्व मे प्रसिद्ध है और उस परिवार के हर सदस्य…

3 years ago