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	<title>story Archives - Youngisthan.in</title>
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		<title>एक किस्सा आईने का, जो कोई न समझ पाया!</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/the-story-of-a-mirror-that-nobody-understood-15689/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Sagar Shri Gupta]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Oct 2015 07:52:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[human beings]]></category>
		<category><![CDATA[indian story]]></category>
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		<category><![CDATA[world behind money]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Hindu-Sadhu-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="Hindu-Sadhu" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Hindu-Sadhu-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Hindu-Sadhu-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Hindu-Sadhu.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />हम सब के लिए पैसों की कितनी एहमियत हैं, यह हम सब को अच्छी तरह से ज्ञात हैं. इसलिए हर दिन सुबह से लेकर रात तक पूरी ज़िन्दगी हम पैसे कमाने में निकाल देते हैं, लेकिन इन सब से अलग ताजुब की बात यह हैं कि जिन पैसों के लिए हमने अपनी पूरी ज़िन्दगी खपा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Hindu-Sadhu-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="Hindu-Sadhu" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Hindu-Sadhu-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Hindu-Sadhu-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Hindu-Sadhu.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>हम सब के लिए पैसों की कितनी एहमियत हैं, यह हम सब को अच्छी तरह से ज्ञात हैं.</p>
<p>इसलिए हर दिन सुबह से लेकर रात तक पूरी ज़िन्दगी हम पैसे कमाने में निकाल देते हैं, लेकिन इन सब से अलग ताजुब की बात यह हैं कि जिन पैसों के लिए हमने अपनी पूरी ज़िन्दगी खपा दी उसे अपनी मौत के बाद हम यही छोड़ कर चले जाते हैं.</p>
<p>अगर इन बातों को सकारात्मक तरीके से लिया जाये तो यह तकलीफदेह नहीं लगती हैं, लेकिन यदि इसी बात को नकारात्मक तौर पर लिया जाये तो हमारा पूरा का पूरा जीवन व्यर्थ लगता हैं.</p>
<p>हम सुबह क्यों उठे?</p>
<p>क्यों ऑफिस पहुचने की हड़बड़ी में अपना नाश्ता छोड़ कर भागते है?</p>
<p>क्यों 2 मिनिट की देरी के डर से अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रेन और बस पकड़ते है?</p>
<p>क्यों अपने ज़मीर को तांक में रखकर वो सारे काम करे जिसके लिए हम तैयार ही नहीं हैं?</p>
<p>सिर्फ इसलिए कि ज़िन्दगी काटने के हम सभी के लिए कुछ पैसे ज़रूरी होती हैं, मगर ये पैसे तो यही रह जाने हैं.</p>
<p>ऐसी बात से जुड़ी एक कहानी आज हम आप को बताते हैं &#8211; एक किस्सा आईने का, जो कोई न समझ पाया!</p>
<p>किसी गाँव में एक साहूकार होता था, जिसे धन सम्पति जोड़ने में बहुत आनंद मिलता था और वह इस काम में काफी योग्य भी था. लेकिन कुछ ही दिन में उसे अपनी योग्यता का अहंकार भी हो गया था. अपने धन सम्पति और गुणों के से हुए घमंड के कारण जब भी कोई ज़रूरतमंद व्यक्ति उसके घर कुछ लेने या भीख मांगने आता तो वह उसे भला बुरा कहकर भगा दिया करता था.</p>
<p>एक रोज़ उसने अपने घर किसी महात्मा को भोजन करने के लिए निमंत्रण दिया और महात्मा के भोजन पूर्ण होने के बाद  लौटते वक़्त एक दर्पण भेंट किया और कहा कि आप को जब भी दुनिया का सबसे मुर्ख व्यक्ति मिले तो आप उसे यह दर्पण भेंट कर दीजियेगा. साहूकार की बात सुनकर महात्मा दर्पण लेकर वहां से चले गए. लेकिन बहुत समय जब घूमते हुए वहीं महात्मा वापस उस साहूकार के घर पहुचे तो देखा कि उस साहूकार की तबियत बहुत ख़राब चल रही हैं और वह मृत्यु सैय्या पर लेटा हुआ हैं.</p>
<p>महात्मा को देख साहूकार टूट गया और कहने लगा कि महाराज कोई ऐसी विद्या बताये जिससे मेरे प्राण बच जायें. साहूकार की बात सुनकर महात्मा ने जवाब दिया कि मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ. ये बात कह कर उन्होंने अपने झोले से एक आईना निकाल कर उसे साहूकार को दिया.</p>
<p>उस दर्पण को देखकर साहूकार को याद आया कि यह दर्पण तो उसने ही महात्मा को भेंट स्वरुप दिया था यह कहकर कि जब दुनिया में आपको कोई मुर्ख व्यक्ति मिले तो उसे दे दीजियेगा. इसके बाद महात्मा ने कहा कि मैंने दुनिया में तुमसे ज्यादा मुर्ख व्यक्ति नहीं देखा इसलिए तुम्हे ही यह दर्पण दे रहा हूँ.</p>
<p>तुमने अपनी पूरी ज़िंदगी धन कमाने में निकाल दी लेकिन आज वही धन तुम्हारे प्राण बचाने में असमर्थ हैं.</p>
<p>महात्मा की इन बातों को सुनकर साहूकार को समझ आ गया कि उससे कहा भूल हुई हैं.</p>
<p>वैसे यह किस्सा हम सब के साथ भी होता हैं कि हम अपना पूरा जीवन एक ऐसी चीज़ के लिए निकाल देते हैं जिसका महत्त्व वस्तु के लेनदेन से अधिक कुछ नहीं हैं.</p>
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		<title>राष्ट्रपति के ड्राईवर से इतिहास के प्रोफेसर बनने की दिलचस्प कहानी</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/a-journey-from-presidents-driver-to-history-professor-14721/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Sagar Shri Gupta]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Oct 2015 11:26:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सफलता की कहानियाँ]]></category>
		<category><![CDATA[APJ abdul kalaam]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[kathiresan]]></category>
		<category><![CDATA[story]]></category>
		<category><![CDATA[success story]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Kathiresan-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="Kathiresan" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Kathiresan-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Kathiresan-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Kathiresan.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />एक ड्राईवर की पढ़ाई कितनी होती हैं 10 वीं या 12 वीं लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपने करियर की शुरुआत सेना में ड्राईवर के तौर पर कर के आज इतिहास का प्रोफेसर बन कर कॉलेज में छात्र-छात्राओं को इतिहास पढ़ाई करवाता हैं तब इस कहानी के लिए क्या कहेंगे. ये कहानी है राष्ट्रपति के ड्राईवर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Kathiresan-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="Kathiresan" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Kathiresan-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Kathiresan-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/10/Kathiresan.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>एक ड्राईवर की पढ़ाई कितनी होती हैं 10 वीं या 12 वीं लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपने करियर की शुरुआत सेना में ड्राईवर के तौर पर कर के आज इतिहास का प्रोफेसर बन कर कॉलेज में छात्र-छात्राओं को इतिहास पढ़ाई करवाता हैं तब इस कहानी के लिए क्या कहेंगे.</p>
<p>ये कहानी है राष्ट्रपति के ड्राईवर से इतिहास के प्रोफेसर बनने की&#8230;</p>
<p>भारतीय इतिहास में अभी तक के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति रहे डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के ड्राईवर रह चुके कथीरेसन ने  अपनी सबसे पहले नौकरी सेना में एक ड्राईवर के तौर करना शुरू किया था.</p>
<p>कथीरेसन और कलाम का साथ बहुत लम्बा रहा हैं.</p>
<p>एक बार भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ कलाम तमिलनाडु के एक छोटे कस्बे विरुदूनगर में किसी कॉलेज के कार्यक्रम में आये थे और वही पास के एक गाँव से कोई व्यक्ति उनसे मिलने आये लेकिन यह व्यक्ति कार्यक्रम के समय अनुसार देर से पंहुचा, तो उसे गेट पर ही रोक दिया गया. सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रख कर बाहर रोके गए उस व्यक्ति ने भी वही खड़े रहकर राष्ट्रपति का इंतज़ार करना उचित समझा.</p>
<p>बहुत देर इंतज़ार करने के बाद जब उस व्यक्ति को यह ज्ञात हुआ कि राष्ट्रपति कलाम का दिन का भोजन पीडब्लूडी बंगले में होने वाला हैं, तो वह व्यक्ति वही पहुच कर वह के सुरक्षा अधिकारियों से अपने बारें बताया लेकीन उस वक़्त उन्होंने ने उनकी बातों पर यकीन नहीं किया और कुछ ही देर वहां डॉ कलाम का काफ़िला आता दिखा और राष्ट्रपति जैसे ही गाड़ी से उतरे उन्होंने उस व्यक्ति को देख कर बहुत आत्मीयता से अपने पास बुलाया और अपन साथ भोजन के लिए अन्दर ले गए. डॉ. कलाम से मिलने के लिए इतना लम्बा इंतज़ार करने वाला व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि “कथीरेसन” ही था.</p>
<p>यह सब मंजर उन अधिकारीयों के सामने ही हुआ जो कथीरेसन को डॉ कलाम से मिलने देने के लिए रहे थे.</p>
<p>53 वर्षीय कथीरेसन आज जो भी हैं उसका पूरा श्रेय वह डॉ कलाम को देते हैं. वो कलाम ही थे जिन्होंने ने कथीरेसन  को सेना में ड्राईवर के पद से आज इतिहास का प्रोफेसर बना दिया.</p>
<p>दरअसल कथीरेसन जब अपनी 10 वीं कक्षा की परीक्षा पास नहीं कर पाए तो, उन्होंने पढ़ाई छोड़ कर सेना में एक ड्राईवर के पद नियुक्त होकर काम करना शुरू कर दिया. कथीरेसन की पहली पोस्टिंग रक्षा अनुसन्धान और विकास संस्थान इलाहाबाद में सबसे पहले हुई थी. बस वही से कलाम और कथीरेसन एक साथ काम करने लगे. डॉ कलाम भी कथीरेसन के साथ इतने घुल मिल चुके थे कि उनका कोई भी दौरा कथीरेसन के बिना अधुरा ही होता था.</p>
<p>कथीरेसन अपने बारे में बताते हुए कहते हैं कि मैं अंग्रेज़ी में बहुत कमज़ोर था.</p>
<p>जब में दसवीं में था तब अंग्रेज़ी के पेपर में मुझे 26 नंबर मिलें थे और मैं फेल हो गया था. उसके बाद डॉ कलाम ही मुझे अंग्रेज़ी भाषा के लिए मदद करने लगे. डॉ.कलाम की मदद से ही कथीरेसन ने फिर से अपनी पढ़ाई पूरी की और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे पीएचडी भी पूरी की और आज एक इतिहास प्रोफेसर के तौर पर गवर्मेंट साइंस एंड आर्ट्स अथुर में अपनी सेना की नौकरी से सेवानिवृत होकर यहाँ पढ़ाने लगे हैं.</p>
<p>ऐसी कहानियों को सुन कर लगता हैं कि अगर दिल में सच्ची लगन हो और सही मार्गदर्शन मिले तो दुनिया में कुछ भी चीज़ की जा सकती हैं.</p>
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		<title>गलत होने पर गलती का अहसास होना ज़रूरी हैं.</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sagar Shri Gupta]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Aug 2015 04:45:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[good deeds]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[story]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/feeling-guilty-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="feeling-guilty" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/feeling-guilty-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/feeling-guilty-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/feeling-guilty.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />यह बात सर्वविदित हैं कि हमने इस दुनिया में अगर इंसान के रूप में जन्म लिया है तो हमसे गलतियाँ अवश्य होंगी और फिर एक जुमला भी प्रचलित हैं “नो वन इज़ परफेक्ट इन दिस वर्ल्ड”. जिसने भी यह बात कही हैं बहुत सोच समझ कर कहीं हैं कि कोई भी इंसान पूरी तरह से [&#8230;]</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi/it-is-necessary-to-be-aware-of-your-mistake-11622/">गलत होने पर गलती का अहसास होना ज़रूरी हैं.</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi">Youngisthan.in</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/feeling-guilty-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="feeling-guilty" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/feeling-guilty-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/feeling-guilty-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/feeling-guilty.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>यह बात सर्वविदित हैं कि हमने इस दुनिया में अगर इंसान के रूप में जन्म लिया है तो हमसे गलतियाँ अवश्य होंगी और फिर एक जुमला भी प्रचलित हैं “नो वन इज़ परफेक्ट इन दिस वर्ल्ड”.</p>
<p>जिसने भी यह बात कही हैं बहुत सोच समझ कर कहीं हैं कि कोई भी इंसान पूरी तरह से कभी सही नहीं हो सकता उससे कोई न कोई गलती ज़रूर होती हैं.</p>
<p>लेकिन उस इंसान द्वारा हुई गलती का एहसास उसे ज़रूर होना चाहियें क्योकि अपने द्वारा हुई इस गलती का भाव ही उसे आगे इस तरह की गलतियाँ करने से रोकता हैं. इंसान के भीतर इस गलती से उत्पन्न हुई ग्लानि ही उसे सम्पूर्ण होने की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं और भविष्य में गलतियाँ न दोहराने के लिए प्रोत्साहित करती हैं.</p>
<p>अपने द्वारा किये गए गलत काम और उस गलती के एहसास से जुड़ी एक कहानी हम आप सब को सुनाते हैं, जो बहुत शिक्षाप्रद हैं.</p>
<p>पुराने समय में पैंठन नाम के किसी गाँव में एकनाथ महाराज नाम के संत हुआ करते थे, जो अपने शांत और संयमित व्यवहार के जाने जाते थे. कहा जाता था कि उन्हें कभी क्रोध नहीं आता था. किसी रोज़ गाँव में खाली बैठे कुछ दुराचारियों ने एक घोषणा कर दी कि जो व्यक्ति एकनाथ महाराज को गुस्सा दिला देगा उसे 200 रुपये इनाम दिए जायेंगे. पैसे की लालच में आकर एक ब्राह्मण युवक ने उन लोगों से कहा कि मैं महाराज को क्रोध दिला सकता हूँ.</p>
<p>अपनी इस शर्त के चलते वह युवक एकनाथ महाराज के घर पंहुचा और देखा कि उस समय महाराज पूजा में लीन हैं. उन्हें क्रोधित करने के उद्देश्य से वह ब्राह्मण युवक एकनाथ महाराज की गोद में जा कर बैठ गया. उसने सोचा था कि इस तरह पूजा में व्यवधान उत्पन्न होने के कारण महाराज तो अवश्य उस पर गुस्सा करेंगे और वह शर्त जीत जायेगा. लेकिन इस के विपरीत महाराज ने उस युवक को देखकर बिना क्रोधित हुए कहा- ब्राम्हण..तुम्हे देख कर प्रसन्नता हुई. मुझसे कई लोग मिलते हैं, लेकिन तुम्हारा प्यार जताने का तरीका सबसे अलग हैं. महाराज की इस प्रतिक्रिया से वह युवक पूरी तरह चौंक गया. उसे यह समझ में आ गया कि इन्हें गुस्सा दिलाना आसान काम नहीं हैं. लेकिन शर्त के पैसे की लालच ने उसकी हिम्मत नहीं तोड़ी और वह दुबारा प्रयास करने का सोचने लगा.</p>
<p>पूजा कर के उठे एकनाथ महाराज जब भोजन करने बैठे और उनकी पत्नी उन्हें भोजन परोसने आई और झुकी तब वह  युवक महाराज को क्रोधित करने के उद्देश्य से उनकी धर्मपत्नी की पीठ पर किसी बच्चे की भांति चढ़ गया. महाराज ने इस बात पर क्रोधित होने बजाये अपनी पत्नी से यह कहा कि- देखना कही ब्राहमण गिर न पड़े. उनकी पत्नी ने कहा कि- मुझे अपने बच्चे को पीठ में लाद कर काम करने की आदत हैं, फिर कैसे इस बच्चे को मैं गिरने दूंगी.</p>
<p>महाराज और उनकी पत्नी की इन बातों से वह युवक अब शर्म से पानी पानी हो चूका था. उसके पास अपनी इस अभद्रता के विषय में कहने के लिए कुछ  भी नहीं था. उस ब्राहमण को अपने द्वारा की गयी इस गलती की ग्लानि होने लगी. एकनाथ महाराज युवक की इस मनोदशा को भलीभांति समझ चुके थे और इसको देखते हुए उन्होंने उस युवक से कहा-</p>
<p>मैं चाहता तो उसी समय तुम क्रोध कर के तुम्हे अभद्रता करने से रोक सकता था, लेकिन ऐसे में तुम्हे अपनी गलती का एहसास नहीं हो पाता और तुम आगे भी ऐसी गलतियाँ करते. हमें अपने द्वारा की गयी गलती का अहसास होना ज़रूरी हैं.</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi/it-is-necessary-to-be-aware-of-your-mistake-11622/">गलत होने पर गलती का अहसास होना ज़रूरी हैं.</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi">Youngisthan.in</a>.</p>
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