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	<title>Birthday Archives - Youngisthan.in</title>
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	<description>Empowering Youth</description>
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		<title>रात के समय जन्मे लोगों के पास होती है किस्मत बदलने की शक्ति </title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/raat-ke-samy-janme-bache-hote-hain-bhagyashali-58519/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Parul Rohtagi]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Nov 2017 03:48:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आपका भाग्य]]></category>
		<category><![CDATA[Birthday]]></category>
		<category><![CDATA[born at night]]></category>
		<category><![CDATA[destiny]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[रात के समय जन्मे लोग]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/11/babyhgjj-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/11/babyhgjj-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/11/babyhgjj-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/11/babyhgjj-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/11/babyhgjj.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />ज्‍योतिष शास्‍त्र में किसी व्‍यक्‍ति की खूबियों और खामियों को जानने के कई तरीकों के बारे में बताया गया है। ज्‍योतिष शास्‍त्र की मानें तो हिंदू धर्म में हर चीज़ का एक विशेष महत्‍व होता है जिसके अनुसार बताया गया है कि रात में जन्‍म लेने वाला बच्‍चा दिन में जन्‍म लेने वाले बच्‍चों की [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/11/babyhgjj-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/11/babyhgjj-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/11/babyhgjj-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/11/babyhgjj-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2017/11/babyhgjj.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>ज्‍योतिष शास्‍त्र में किसी व्‍यक्‍ति की खूबियों और खामियों को जानने के कई तरीकों के बारे में बताया गया है। ज्‍योतिष शास्‍त्र की मानें तो हिंदू धर्म में हर चीज़ का एक विशेष महत्‍व होता है जिसके अनुसार बताया गया है कि रात में जन्‍म लेने वाला बच्‍चा दिन में जन्‍म लेने वाले बच्‍चों की अपेक्षा ज्‍यादा भाग्‍यशाली होता है।</p>
<p>हिंदू धर्म के शास्‍त्रों में हर एक छोटी- बड़ी चीज़ों का उल्‍लेख किया गया है। इसमें व्‍यक्‍ति के जन्‍म पर आधारित ग्रहों के अनुसार ही उसके जीवन की रूपरेखा तैयार होती है और उसी के अनुसार उसके जीवन में अलग-अलग परिवर्तन आते हैं और विकास होते हैं।</p>
<p>कहा जाता है कि दिन में जन्‍म लेने वाले बच्‍चों की तुलना में रात के समय जन्‍म लेने वाले बच्‍चे ज्‍यादा भाग्‍यशाली होते हैं। उन्‍हें अपनी किस्‍मत का पूरा साथ मिलता है। हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार रात में जन्‍म लेने वाला बच्‍चा दिन की अपेक्षा में ज्‍यादा बेहतर होते हैं। वो कोई भी निर्णय जल्‍दबाज़ी में नहीं लेते बल्कि पहले उस चीज़ के बारे में अच्‍छी तरह से सोच विचार करते हैं, उसकी जांच करते हैं और फिर किसी के बारे में निर्णय लेते हैं।</p>
<p>इसके अलावा रात में जन्‍म लेने वाले बच्‍चे की सोचने-समझने की क्षमता दिन में जन्‍म लेने वाले लोगों की अपेक्षा काफी अधिक होती है। रात में जन्‍म लेने वाले बच्‍चे में अधिकतर यह गुण पाया जाता है कि वह किसी नए काम को करने के लिए अपनी पूरी जान लगा देता है यानि कि वो मेहनती भी होते हैं।</p>
<p>हाल ही में हुई एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि रात के समय जन्‍म लेने वाले बच्‍चे अपने भविष्‍य में आगे चलकर ज्‍यादा जिम्‍मेदार बनते हैं। वह किसी भी काम को तब तक करते हैं जब तक कि उसका परिणाम ना मिल जाए। ये लोग कभी हार नहीं मानते हैं। किसी भी चीज़ के बारे में पूरी जानकारी लिए बिना ये बोलना पसंद नहीं करते हैं। इसी कारण ये लोग दूसरों से ज्‍यादा बेहतर होते हैं।</p>
<p>इन्‍हें अपनी जिम्‍मेदारी का अहसास होता है और ये पूरी शिद्दत के साथ उसे पूरा भी करते हैं। ये पूरी ईमानदारी के साथ अपनी जिम्‍मेदारी और कर्त्तव्‍यों का पालन करते हैं।</p>
<p>देखा जाए तो हर इंसान में कोई ना कोई खूबी होती है लेकिन ज्‍योतिष शास्‍त्र में व्‍यक्‍ति की खूबियों और खामियों को जानने के लिए कई तरीकों के बारे में बताया गया है। ये भी उसी में से एक है।</p>
<p>ज्‍योतिष की मानें तो रात के समय जन्‍म लेने वाले लोगों में दिन के समय जन्‍मे लोगों की तुलना में ज्‍यादा  गुण होते हैं। ये जिम्‍मेदार, कर्त्तव्‍यनिष्‍ठ और ईमानदार होते हैं। साथ ही ये किसी के भी बारे में बिना जानकारी के बोलना पसंद नहीं करते हैं।</p>
<p>इनकी खूबियों के बारे में जानने के बाद कहा जा सकता है कि इन लोगों की सोशल लाइफ बहुत बेहतर होती है। अपनी अच्‍छाईयों के कारण ये हमेशा दूसरों को आकर्षित करते हैं और इसी वजह से ये दूसरों से अलग और बेहतर होते हैं। इनके गुण ही इन्‍हें दूसरों से अलग बनाते हैं। ये अपनी किस्‍मत को खुद अपनी मेहनत से बदलने की शक्‍ति रखते हैं।</p>
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		<title>गुलज़ार साहब&#8230; इस दुनिया में आप जैसी रूहें कम ही आती हैं</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/happy-birthday-to-gulzar-sahab-11648/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Sagar Shri Gupta]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2015 05:03:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[Birthday]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[film industry]]></category>
		<category><![CDATA[gulzaar]]></category>
		<category><![CDATA[gulzar's birthday]]></category>
		<category><![CDATA[happy birthday gulzar sahab]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/gulzar-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="gulzar" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/gulzar-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/gulzar-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/gulzar.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />आप सब से एक सच बात कहूँ तो मैं पिछले कई घंटों से गुलज़ार साहब के बारे में लिखने की कोशिश कर रहा हूँ, लेकिन यकीन मानिए, मुझे ढंग का एक लफ्ज़ भी नहीं सूझ रहा हैं. गुलज़ार साहब के बारे कहाँ से शुरु करू, क्या लिखूं अभी तक कुछ भी समझ नहीं पा रहा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/gulzar-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="gulzar" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/gulzar-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/gulzar-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/gulzar.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>आप सब से एक सच बात कहूँ तो मैं पिछले कई घंटों से गुलज़ार साहब के बारे में लिखने की कोशिश कर रहा हूँ, लेकिन यकीन मानिए, मुझे ढंग का एक लफ्ज़ भी नहीं सूझ रहा हैं.</p>
<p>गुलज़ार साहब के बारे कहाँ से शुरु करू, क्या लिखूं अभी तक कुछ भी समझ नहीं पा रहा हूँ.</p>
<p>गुलज़ार साहब के बारे में लिखना सच में बहुत मुश्किल काम हैं. यह बिलकुल वैसी ही बात हैं कि “आप किसी रौशनी को ये बताएं की वो कितनी रौशन हैं”</p>
<p>सच कहूँ तो मेरी औकात ही नहीं हैं उनके बारे में कुछ कहने की. मेरी उमर से दोगुना तो उनका तजुर्बा हैं, तो मेरी क्या बिसात कि मैं गुलज़ार साहब के लिए कुछ भी लिखूं. अपनी पूरी जिंदगी उन्होंने लोगों को सिर्फ दिया ही हैं, फिर वह चाहे गीत के बोल के रूप में हो या इंसानी एहसासों को बड़ी बारीकी से सिनेमा के परदे में पिरोने के रूप में या फिर अपने एहसासों को नज़्म की शक्ल देकर किताबों के ज़रियें लोगों तक पहुचाना हो, गुलज़ार साहब बिना किसी उम्मीद के पूरी दयानतदारी से दुनिया को बस देते ही आये हैं, तो उनके बारे में कुछ भी कह पाना मेरे बस का नहीं हैं.</p>
<p>इसलिए सोचा कि आप सब को एक खास क़िस्सा सुनाऊँ जो मेरे साथ हुआ था जिसके बाद गुलज़ार मेरे लिए “गुलज़ार साहब” हो गए.</p>
<p>मुझे मुंबई आये कुछ 4-5 महीने ही हुए थे, जब मैं अपने पहले शो के लिए काम कर रहा था. वह नवम्बर 2011 की ठण्ड थी. यशराज स्टूडियो के स्टूडियो नंबर-2 की सुबह और 9 बजे का कॉल टाइम. 9बजे के आस-पास शो से जुड़े सभी लोग आ चुके थे. शो का रिहर्सल चल रहा था और शो के एंकर विक्रम चन्द्रा अपना एंकरलिंक रिहर्स कर रहे थे. एक स्पॉट लाइट को छोड़ कर बाकि सब लाइट बंद थी. तभी स्टूडियो का दरवाज़ा खुला और ऊपर से नीचे तक पुरे सफ़ेद लिबास में एक शख्स अंदर आया और स्टेज के नीचे रखी कुर्सियों में से एक पर जाकर बैठ गया.</p>
<p>रिहर्सल के कारण पुरे स्टूडियो में ख़ामोशी थी कि तभी किसी की तेज़ आवाज़ उस ख़ामोशी को चीरती हुई सुनाई दी- “अरे गुलज़ार साहब..आप यहाँ क्यों बैठे हैं?”</p>
<p>इस आवाज़ से विक्रम चंद्रा भी अपना रिहर्सल रोककर स्टेज के नीचे आ गए और गुलज़ार साहब का पैर छूते हुए बोले- “गुलज़ार साहब, आप यहाँ क्यों बैठ गए, सीधे ऊपर आते स्टेज पर&#8230;”</p>
<p>कुछ देर की ख़ामोशी के बाद एक भारी आवाज़ मेरे कानों में आई-“विक्रम जी आपके रिहर्सल में रुकावट आती, इसलिए मैं  नीचे ही इंतज़ार करने लगा”.</p>
<p>गुलज़ार साहब के इस जवाब के बाद विक्रमचंद्रा उन्हें स्टेज में ले गए और शो शुरू हुआ.</p>
<p>हर 1 घंटे के बाद शो में ब्रेक लिया जाता था.</p>
<p>मैंने गुलज़ार साहब को ज़िन्दगी में पहली बार देखा था लेकिन उनकी वो भारी और संजीदगी से भीगी, पुरसुकूं आवाज़ मेरे कानों में बैठ चुकी थी. मैंने सोचा अगर आज गुलज़ार साहब के पास जाकर एक बार उनका आशीर्वाद नहीं लिया तो इस फिल्मइंडस्ट्री में काम करना ही बेकार हैं.</p>
<p>यही बात सोच-सोच कर मैं अपनी हिम्मत बढ़ा रहा था कि जैसे ही कोई ब्रेक होगा, मैं जाकर गुलज़ार साहब से ज़रूर बात करूँगा. अब मेरा पूरा ध्यान अपने इस शो से हटकर गुलज़ार साहब और घड़ी पर जम गया था. जैसे ही ब्रेक हुआ मैं तेज़ी से स्टेज पर पंहुचा और गुलज़ार साहब से कहाँ कि मैं आप को एक दफे गले लगाना चाहता हूँ. मेरी यह बात सुन कर गुलज़ार साहब मुस्कुराये और कुछ बोलने ही वाले थे कि प्रोडक्शन रूम से एक अनाउंसमेंट हुआ ‘प्लीज क्लियर डी फिल्ड’ और मुझे बेमन स्टेज  से नीचे उतरना पड़ा.</p>
<p>अब मैं हर ब्रेक का इंतज़ार करने लगा ताकि गुलज़ार साहब से जाकर मिल सकू. टाइम कम होने की वजह से ब्रेक काफी छोटे हो रहे थे, जिसके कारण मुझे स्टेज पर जाने का मौका नहीं मिल पा रहा था. देखते ही देखते शूट पूरा हो गया और मेरे स्टेज पर पहुचने के पहले ही वहां काफी लोग इकट्ठे हो चुके थे. इतनी भीड़ देख कर अब बाउंसर भी स्टेज पर आ गए थे और लोगो को हटा रहे थे लेकिन तभी स्टेज से गुलज़ार साहब ने मुझे देख कर हाथ हिलाया और ऊपर आने का इशारा किया. मैंने जैसे ही गुलज़ार साहब का हाथ देखा, भीड़ के बीच से होता हुआ गुलज़ार साहब की ओर भागा और जाकर उनके पैर छू लिए, तभी गुलज़ार साहब ने एक बात कहीं –</p>
<p>“तुम मुझे गले लगाना चाहते थे, फिर पैर क्यों छू रहे हो? गले लगो यार अभी से बूढा मत बनाओं”.</p>
<p>इसके बाद मैं गुलज़ार साहब को बस देखता ही रहा और गुलज़ार साहब मुस्कुरा रहे थे.</p>
<p>सचमुच कभी कभी कोई इंसान अपने इंसान होने के रुतबे से भी ऊपर हो जाता हैं. उसके आगे ये नाम, सारे अवार्ड्स भी  बौने लगने लगते हैं.</p>
<p>इस किस्से की बतौर निशानी तो मेरे पास कोई तस्वीर नहीं हैं, लेकिन उस रोज़ ऐसा लगा था कि मैं गुलज़ार साहब की रूह को छू पाया हूँ, उन्हें महसूस कर पाया हूँ. उस रोज़ पहली बार लगा कि कोई इंसान रूहानी तौर पर भी इतना  खुबसूरत  हो सकता हैं.</p>
<p>उस दिन के इस किस्से ने मुझे यह कहने पर मजबूर कर दिया कि “ख़ुदा भी गुलज़ार साहब जैसी रूहें कम ही बनाता हैं.”</p>
<p>उस दिन को याद करके आज मैं बड़े फक्र से कहता हूं: &#8211; “आने वाली नस्लें मुझ पर रक्श करेंगी, मैंने गुलज़ार को देखा हैं.”</p>
<p>सालगिरह की बहुत मुबारकबाद गुलज़ार साहब.</p>
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		<item>
		<title>आज हुआ था जन्म &#8216;मदर इंडिया&#8217; का</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/happy-birthday-to-nargis-dutt-5213/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Durgesh Dwivedi]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Jun 2015 09:54:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बॉलीवुड]]></category>
		<category><![CDATA[Birthday]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[Nargis]]></category>
		<category><![CDATA[नर्गिस]]></category>
		<category><![CDATA[मदर इंडिया]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/nargis-dutt-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="nargis dutt" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/nargis-dutt-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/nargis-dutt-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/nargis-dutt.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />भारतीय सिनेमा की सबसे महान अभिनेत्री, एक महानायिका, एक देवी और सबसे बढ़कर, एक औरत, ‘फ़ातिमा रशीद’. मैं बात कर रहा हूँ ‘नर्गिस’ जी की, जो शादी की बाद बन गईं ‘नर्गिस दत्त’. कलकत्ता में, 1 जून 1929 के दिन, नर्गिस का जन्म हुआ था. यानी आज इस महान अदाकारा का जन्मदिन है. लेकिन अफ़सोस [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/nargis-dutt-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="nargis dutt" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/nargis-dutt-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/nargis-dutt-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/nargis-dutt.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>भारतीय सिनेमा की सबसे महान अभिनेत्री, एक महानायिका, एक देवी और सबसे बढ़कर, एक औरत, <strong>‘फ़ातिमा रशीद’</strong>.</p>
<p>मैं बात कर रहा हूँ <strong>‘नर्गिस’</strong> जी की, जो शादी की बाद बन गईं <strong>‘नर्गिस दत्त’.</strong></p>
<p>कलकत्ता में, 1 जून 1929 के दिन, नर्गिस का जन्म हुआ था. यानी आज इस महान अदाकारा का जन्मदिन है. लेकिन अफ़सोस आज नर्गिस जी हमारे साथ नहीं हैं.</p>
<p>स्वतंत्रता के बाद भारत को एक नई शुरुआत करनी पड़ी थी. सरकार को नई आर्थिक नीतियां बनानी पड़ी थीं और 45 करोड़ की आबादी को कुछ ऐसा चाहिए था जिसे देखकर, महसूस कर, जानकार और पहचानकर वह अपने दुखों को किसी तरह दबा सके!</p>
<p>1940 के दशक में लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने का मोर्चा संभाला राज कपूर और देव आनंद जैसे दिग्गज कलाकारों ने, जो भारत भर में इतने मशहूर हुए कि उनकी फिल्में आज इतने दशकों बाद भी देखी जाती हैं. ऐसे में किसीको ज़रुरत थी की औरतें भी इस क्षेत्र में अपना योगदान दें. औरतों की तरफ से मेरे नज़रिए में सबसे आगे थीं नर्गिस और लता मंगेशकर जी!</p>
<p>अपनी पहली फिल्म तलाश-ए-इश्क़ से लेकर अपनी आखिरी फिल्म, ‘रात और दिन’ तक, नर्गिस ने हर एक फिल्म में अपनी कार्यकुशलता और महानता का ऐसा उदाहरण सबके सामने पेश किया था जैसा शायद कोई और अभिनेत्री नहीं कर पाती.</p>
<p>मुझे ऐसा लगता है कि भले ही कोई विद्या बालन, श्रीदेवी, कंगना रानौत आदि के बारे में कुछ भी कहे लेकिन भारतीय सिनेमा का और मेरे ख्याल से वर्ल्ड सिनेमा की सबसे पहली फेमिनिस्ट(नारीवादी) फिल्म थी ‘<strong>मदर इंडिया’. </strong>सबसे पहली नारीवादी फिल्म होने के साथ-साथ यह सबसे प्रभावशाली नारीवादी फिल्म थी, है और रहेगी!</p>
<p>राधा, एक अकेली माँ, जो ज़माने से लड़कर अपने बच्चों को पालती है और अंत में सबके भले के लिए अपने बेटे को मारने के लिए तौयार हो जाती है, यह किरदार नर्गिस ने इस तरह से निभाया कि आपको फिल्म में नर्गिस के अलावा और कोई नहीं दिखता!</p>
<p>मदर इंडिया पहली भारतीय फिल्म थी जो ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुई थी और इस फिल्म की सबसे अहम् भूमिका निभाई थी नर्गिस जी ने. यह फिल्म इस बात को सिद्ध कर देती है कि ज़रूरी नहीं कि एक फिल्म को कामियाब बनाने के लिए, फिल्म में एक लोकप्रीय अभिनेता हो, 1950 के दशक में, नर्गिस ने इस सोच की धज्जियां उड़ा डाली थीं. एक पुरुष-प्रधान इंडस्ट्री में एक औरत का ऐसा करना उसकी महानता को दर्शाता है.</p>
<p>दरअसल शादी के बाद उनकी अदाकारी में एक नया खुलापन आ गया. उनकी अदाकारी एक तरीके से विकसित हो गई और ‘घर-संसार’, ‘अदालत’ और ‘रात और दिन’ जैसी फिल्में इस बात का सबूत हैं.</p>
<p>नर्गिस ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को एक और बड़ा नाम दिया. उन्होंने एक ऐसे अभिनेता को जन्मा जो शायद बॉलीवुड के सबसे महान अदाकारों में से एक हैं. मैं बात कर रहा हूँ संजय दत्त की!</p>
<p>वे अगर आज के समय पर जिंदा होतीं तो उनकी उम्र 86 साल होती और न जाने वे शायद आज भी फिल्मों में नज़र आती रहतीं. आज के बॉलीवुड में नारी केवल एक आकर्षण के तौर पर इस्तेमाल की जाती हैं. मुझे पूरा यकीन है कि अगर वे आज जिंदा होतीं तो इसके खिलाफ ज़रूर आवाज़ उठातीं.</p>
<p>उनकी मृत्यु 3 मई 1981 में हुई.</p>
<p>नर्गिस जी के जाने के साथ-साथ एक पूरा युग चला गया था.</p>
<p>लेकिन आज के भारतीय सिनेमा की हर एक अभिनेत्री में, मदर इंडिया की वह राधा कहीं न कहीं ज़रूर दिखती है.</p>
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